दिवाली से पहले महंगाई की मार: अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंची
त्योहारी सीजन में पेट्रोल, प्याज और चीनी समेत कई चीजों के दाम चढ़े हैं। रिजर्व बैंक के अंदाज में अक्टूबर से दिसंबर के बीच महंगाई 5.9% तक जा सकती है।
त्योहारों का मौसम शुरू होते ही महंगाई फिर सिर उठाने लगी है। गणेशोत्सव की शुरुआत में चीनी और प्याज के भाव चढ़े थे। सरकार ने दाम काबू में रखने की काफी कोशिश की, लेकिन महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही। दशहरा और दिवाली जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, बाजार में चीजों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। पेट्रोल से लेकर प्याज, सोने से लेकर स्मार्टफोन और खाने-पीने की चीजों तक, सब महंगा हो रहा है।
दिवाली 8 नवंबर को है और बाजारों में तैयारी शुरू हो चुकी है। पर इस बार खरीदारी की लिस्ट बनाते वक्त लोगों को काफी सोचना पड़ेगा, क्योंकि पिछले साल के मुकाबले ज्यादातर चीजें महंगी हो गई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछली दिवाली के आसपास खुदरा महंगाई करीब 2% थी। अब अगस्त 2026 में यह 4.82% पर पहुंच गई है। रिजर्व बैंक के अंदाज के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर के बीच त्योहारी सीजन में महंगाई 5.9% तक जा सकती है।
इसके पीछे तीन बड़ी वजहें बताई गई हैं: पश्चिम एशिया की जंग, मानसून की कमी और डॉलर का महंगा होना।
पहली वजह तेल के दाम हैं। इस साल फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में जंग शुरू हुई, जिसका असर होर्मुज के समुद्री रास्ते पर पड़ा। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। जंग से पहले करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर बिकने वाला कच्चा तेल अप्रैल में 141 डॉलर पर पहुंच गया। अभी भी यह 96 से 98 डॉलर के आसपास है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85% से ज्यादा बाहर से मंगाता है, इसलिए इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा। मई में पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए, जो कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर थे। दिल्ली में पेट्रोल अब 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है।
डीजल महंगा होने का मतलब है ढुलाई का खर्च बढ़ना। ट्रक का भाड़ा बढ़ता है तो सब्जी से लेकर कपड़ों तक हर चीज के दाम पर असर पड़ता है। मिठाई की दुकानों और होटलों में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में 2,747.50 रुपये का हो गया है, यानी इस बार मिठाई और स्नैक्स भी महंगे हो सकते हैं। थोक महंगाई अगस्त में 9.92 प्रतिशत रही, जबकि ईंधन और बिजली में करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी। जानकारों का कहना है कि थोक बाजार की यह महंगाई धीरे-धीरे दुकानों तक पहुंचती है, यानी आने वाले कुछ हफ्तों में इसका असर ज्यादा साफ दिख सकता है।
दूसरी वजह मानसून की कमी है। इस साल अल नीनो की वजह से मानसून कमजोर रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 29 सितंबर तक देश में औसत से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई। दक्षिण भारत में यह कमी करीब 24 प्रतिशत थी। कर्नाटक में करीब 30 प्रतिशत, बिहार में 32 प्रतिशत और पंजाब में 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। सूखे की सबसे ज्यादा मार कर्नाटक और महाराष्ट्र पर पड़ी है। कर्नाटक सरकार ने 177 तालुका और महाराष्ट्र सरकार ने 265 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल धान की बुवाई भी करीब 4 प्रतिशत कम हुई है। सरकार ने 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य भी घटा दिया है।
हालांकि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक कुल बुवाई में सिर्फ 1 प्रतिशत की कमी आई है और पैदावार में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। किसानों के लिए राहत की बात यह है कि दुनियाभर में खाद के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में DAP और यूरिया की बोरी अब भी उसी दाम पर मिल रही है, क्योंकि सरकार सब्सिडी बढ़ाकर यह बोझ उठा रही है। फिर भी महंगा डीजल और सूखे इलाकों में पंप से सिंचाई का बढ़ा खर्च किसानों की जेब पर भारी पड़ रहा है। जानकारों को डर है कि कम पैदावार का असर दिवाली के बाद अनाज के दामों पर दिख सकता है।
तीसरी वजह डॉलर की उछाल और रुपये की कमजोरी है। साल की शुरुआत में एक डॉलर करीब 90 रुपये का था, जो अब करीब 96 रुपये पर पहुंच गया है। रुपया कमजोर होने से बाहर से आने वाली सारी चीजें महंगी हो रही हैं, चाहे कच्चा तेल हो, खाने का तेल हो, सोना हो या फोन और टीवी के पुर्जे।
रसोई पर असर की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में अनाज और खाने-पीने की चीजों की महंगाई 5.95 प्रतिशत रही। सबसे बड़ी चिंता प्याज की है, जिसके दाम पिछले साल के मुकाबले करीब 48 प्रतिशत बढ़े हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक पिछले साल करीब 28 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अगस्त में करीब 40 रुपये प्रति किलो था। चीनी करीब 24 प्रतिशत महंगी हुई है, और गुड़, किशमिश और खाने के तेल के दाम भी चढ़े हैं। इसका सीधा असर दिवाली की मिठाई पर पड़ सकता है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। टमाटर पिछले साल के मुकाबले करीब 31 प्रतिशत और आलू करीब 13 प्रतिशत सस्ते हुए हैं। इसी वजह से क्रिसिल के मुताबिक घर की शाकाहारी थाली सिर्फ 1 प्रतिशत महंगी हुई है और अब 29.5 रुपये की पड़ती है, जबकि मांसाहारी थाली करीब 5 प्रतिशत महंगी होकर 57.5 रुपये की हो गई है।