बुलढाणा में सोयाबीन कटाई तेज, एमपी से आए हजारों मजदूर, स्थानीय मजदूरों के काम पर सवाल
बुलढाणा जिले में खरीफ की सोयाबीन कटाई जोरों पर है। मध्य प्रदेश से पांच से छह हजार मजदूर आए हैं, पर सीजन खत्म होने के बाद स्थानीय मजदूरों के रोजगार का सवाल खड़ा हो सकता है।
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बुलढाणा जिले में खरीफ सीजन की सोयाबीन की कटाई ने रफ्तार पकड़ ली है। इस बार बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई, इसलिए पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है। फिर भी जो हालात हैं, उन्हीं में किसानों ने कटाई शुरू कर दी है। करीब तीन महीने की मेहनत के बाद शुरू हुआ कटाई का यह सीजन अगले एक से दो हफ्ते तक चलने की संभावना है।
कटाई के लिए पड़ोसी मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में मजदूर जिले में पहुंचे हैं। खरगोन, बैतूल और खांडवा इलाके से लगभग पांच से छह हजार मजदूर आए हैं। इनके मिलने से ही कटाई का काम तेजी से चल रहा है। तपती धूप में भी खेतों में मजदूर सोयाबीन काटने में लगे हैं।
खरीफ सीजन खत्म होने के बाद ये मजदूर वापस मध्य प्रदेश लौट जाएंगे। लेकिन स्थानीय मजदूरों के सामने रोजगार का सवाल खड़ा रहेगा, यह तय माना जा रहा है। इस साल बारिश बहुत कम हुई है, जिसका असर रबी सीजन पर पड़ेगा। इसलिए रबी की बुवाई घटेगी और मजदूरों को काम मिलेगा या नहीं, इसकी गारंटी नहीं रह गई है। ऐसे में देखना होगा कि जिले के मजदूरों को काम की तलाश में बाहर जाना पड़ेगा, या प्रशासन की ओर से उन्हें यहीं रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
जिले में रोजगार के मौके सीमित हैं और अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है। इसी वजह से सोयाबीन कटाई का सीजन खत्म होने के बाद स्थानीय मजदूरों का बड़े शहरों की तरफ पलायन बढ़ने की संभावना है। काम की तलाश में मजदूर पुणे, मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों का रुख कर सकते हैं।
खरीफ का काम खत्म होने के बाद स्थानीय मजदूरों के सामने रोजगार की दिक्कत आने की आशंका है। कम बारिश की वजह से रबी सीजन के खेती के काम भी सीमित रहने की संभावना है। इसलिए हर मजदूर को लगातार काम मिलता रहेगा, इसका भरोसा कम हुआ है।
आम तौर पर नवंबर-दिसंबर के बाद जिले में निर्माण क्षेत्र के राजमिस्त्रियों और मजदूरों को काम मिलने लगता है। लेकिन कम बारिश के कारण इस साल घर बनाने और निर्माण के काम कम रहने की बात कही जा रही है। नतीजतन स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके और घटने की आशंका है।