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22:01 IST

तीस से पहले बाल पतले हो रहे हैं? विशेषज्ञ बोले, इलाज से पहले वजह की जांच जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक हर बाल झड़ने की वजह एक जैसी नहीं होती, इसलिए इलाज चुनने से पहले सही जांच सबसे अहम कदम है।

तीस से पहले बाल पतले हो रहे हैं? विशेषज्ञ बोले, इलाज से पहले वजह की जांच जरूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार तनाव और कम नींद के चलते राज्य के शहरी इलाकों में कम उम्र में ही बाल पतले होने की चर्चा बढ़ गई है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं कि हर बाल झड़ने के पीछे वजह एक जैसी नहीं होती।

मुंबई, पुणे, नाशिक या नागपुर के कई नौजवानों के लिए यह तस्वीर अब नई नहीं रही। पहले चालीस के बाद दिखने वाली यह दिक्कत अब पच्चीस से तीस की उम्र में ही महसूस होने लगी है, ऐसा कई लोग बताते हैं। सोशल मीडिया की रील्स, घरेलू नुस्खों की सलाह और "हफ्ते में नए बाल" जैसे विज्ञापनों के शोर में बहुतों को समझ नहीं आता कि क्या सच है और क्या नहीं।

विशेषज्ञों के मुताबिक हर बाल एक तय चक्र से गुजरता है। पहले बढ़ने का दौर आता है, जो कुछ साल चलता है। फिर एक छोटा बदलाव का दौर आता है और आखिर में आराम का दौर, जिसके बाद पुराना बाल झड़ जाता है और उसकी जगह नया बाल आता है। सिर के कुछ बाल हमेशा आराम के दौर में रहते हैं, इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि रोज करीब 50 से 100 बाल झड़ना आम माना जाता है। फिक्र तब शुरू होती है जब झड़ने वाले बालों की मात्रा लगातार बढ़ती जाए, सिर के किसी खास हिस्से में बाल पतले दिखने लगें या नए बाल आने की रफ्तार धीमी पड़ जाए। ऐसे में पहला कदम यह पहचानना है कि झड़ना किस किस्म का है।

विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों में सबसे आम वजह आनुवंशिक पैटर्न बाल्डनेस मानी जाती है। इसमें बालों की जड़ें धीरे-धीरे पतली होती जाती हैं, हेयरलाइन पीछे खिसकती है और सिर के बीच के हिस्से में बाल कम हो जाते हैं। महिलाओं में यही दिक्कत अक्सर मांग वाले हिस्से में बाल पतले होने के रूप में दिखती है।

कुछ मामलों में बाल झड़ना अस्थायी होता है। तेज तनाव, बड़ी बीमारी, अचानक वजन घटना, सख्त डाइट, प्रसव या सर्जरी जैसी घटना के करीब दो से तीन महीने बाद अचानक बहुत बाल झड़ने लगते हैं। मेडिकल भाषा में इसे टेलोजन एफ्लुवियम कहते हैं और वजह दूर होने पर बाल अक्सर पहले जैसे हो जाते हैं। आयरन, विटामिन डी या बी12 की कमी, थायराइड का असंतुलन, महिलाओं में PCOS जैसे हार्मोनल बदलाव, फंगल इन्फेक्शन, रूसी या स्कैल्प सोरायसिस जैसी त्वचा की बीमारियां भी वजह हो सकती हैं। कसी हुई हेयरस्टाइल, बार-बार केमिकल ट्रीटमेंट और ज्यादा गर्मी के इस्तेमाल से भी बाल जड़ के पास से टूटने लगते हैं।

विशेषज्ञों ने कुछ गलतफहमियों का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक टोपी या हेलमेट पहनने से गंजापन नहीं होता, हालांकि बहुत कसा हुआ और लगातार रगड़ने वाला हेडगियर जड़ों पर जोर डाल सकता है। रोज शैंपू करने से ज्यादा बाल झड़ते हैं, यह भी गलत है, क्योंकि धोते वक्त झड़ने वाले बाल पहले से झड़ने की हालत में होते हैं। सिर मुंडवाने से नए बाल मोटे आते हैं, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। महंगा तेल या कोई एक घरेलू नुस्खा जादू की तरह काम करता है, ऐसे दावों पर भरोसा न करने की बात भी विशेषज्ञ कहते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि वजह के हिसाब से इलाज बदलता है, इसलिए जांच सबसे अहम है। त्वचा और बाल रोग विशेषज्ञ शुरू में मरीज की हिस्ट्री, खान-पान, परिवार में बाल झड़ने का इतिहास और हाल की बीमारी या दवाओं की जानकारी लेते हैं। स्कैल्प की जांच ट्राइकोस्कोपी नाम के खास उपकरण से होती है, जिससे बालों की मोटाई और जड़ों की हालत पता चलती है। जरूरत पड़ने पर खून की जांच भी सुझाई जाती है। इसके बाद ही विशेषज्ञ तय कर सकते हैं कि आगे का रास्ता दवाओं का है, स्कैल्प थेरेपी का या सर्जरी का।

मुंबई के हेयर रिस्टोरेशन क्लिनिक Kibo Clinics के विशेषज्ञों के मुताबिक कई मरीज शुरू में शैंपू या घरेलू नुस्खों पर महीनों गंवा देते हैं। क्लिनिक के एक विशेषज्ञ ने कहा, "बाल झड़ने का निदान पहले होना चाहिए। क्योंकि खून की जांच में सामने आने वाली कमी और आनुवंशिक पैटर्न का इलाज बिल्कुल अलग होता है।"

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती दौर में खान-पान और जीवनशैली में सुधार, कमी की भरपाई और डॉक्टर की बताई दवाएं काम आ सकती हैं। कुछ मरीजों को PRP (प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा) जैसी स्कैल्प थेरेपी से फायदा होता है, जिसमें मरीज के अपने खून से बना प्लाज्मा स्कैल्प में लगाया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये दवाएं और थेरेपी विशेषज्ञ की सलाह से ही ली जाएं, क्योंकि हर किसी पर असर अलग होता है और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। बाल झड़ना रोकना और जा चुके बाल वापस लाना दो अलग बातें हैं। जिन हिस्सों में जड़ें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं, वहां दवाओं से नए बाल आने की संभावना कम होती है।

ऐसे में सर्जरी का विकल्प सामने आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका FUE हेयर ट्रांसप्लांट है। इसमें सिर के पिछले हिस्से की सेहतमंद जड़ें एक-एक करके निकाली जाती हैं और पतले हिस्से में लगाई जाती हैं। पिछले हिस्से के बाल आम तौर पर आनुवंशिक झड़ने पर असर नहीं लेते, इसीलिए उसे "डोनर एरिया" कहा जाता है। पुराने पट्टी निकालने वाले तरीके की तरह इसमें लंबा निशान नहीं रहता, बल्कि छोटे बिंदुओं जैसे निशान रहते हैं, जो अक्सर बालों के नीचे छिप जाते हैं।

प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया देकर की जाती है। पहले हेयरलाइन का डिजाइन तय होता है, क्योंकि प्राकृतिक दिखने वाली हेयरलाइन सीधी रेखा नहीं होती, उसके किनारे थोड़े बेतरतीब और मुलायम होते हैं। फिर डोनर एरिया से ग्राफ्ट्स निकाले जाते हैं और छोटे छेदों के जरिए पतले हिस्से में लगाए जाते हैं। ग्राफ्ट्स की संख्या और इलाज के क्षेत्र के हिसाब से प्रक्रिया में कुछ घंटे लगते हैं और मरीज आम तौर पर उसी दिन घर चला जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पहले कुछ दिनों में हल्की सूजन और पपड़ी दिखती है। पहले हफ्ते में धूप, धूल, भारी कसरत और सिर रगड़ने से बचने की सलाह दी जाती है, और सोते वक्त सिर थोड़ा ऊंचा रखने को कहा जाता है। ज्यादातर लोग करीब हफ्ते भर में दफ्तर के काम पर लौट आते हैं। लगाए गए बाल दो से चार हफ्तों में झड़ जाते हैं, जो अपेक्षित है, और नए बाल तीन-चार महीने बाद दिखने लगते हैं। पूरा नतीजा दिखने में करीब बारह महीने, कभी-कभी उससे ज्यादा लगते हैं। विशेषज्ञ जोर देकर कहते हैं कि यह सब्र का खेल है।

यह सर्जरी हर किसी के लिए सही नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक बाल झड़ने का पैटर्न स्थिर हो चुका है या नहीं, पीछे के हिस्से में पर्याप्त डोनर बाल हैं या नहीं और उम्मीदें हकीकत भरी हैं या नहीं, ये तीनों बातें जांचकर ही फैसला लेना चाहिए। अगर झड़ने की वजह टेलोजन एफ्लुवियम जैसी अस्थायी हो, तो सर्जरी की जरूरत ही नहीं होती। स्कैल्प पर सक्रिय इन्फेक्शन या काबू में न आई त्वचा की बीमारी हो, तो पहले उसका इलाज करना पड़ता है। बीस की उम्र में जल्दबाजी में सर्जरी कराने पर आगे झड़ना बढ़ने से हेयरलाइन अप्राकृतिक दिखने का खतरा रहता है। सर्जरी के बाद भी असली बाल झड़ते रह सकते हैं, इसलिए अक्सर दवाएं आगे भी चलानी पड़ती हैं।

महिलाओं में बाल झड़ने की वजहें अक्सर हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी, प्रसव के बाद का दौर और थायराइड से जुड़ी होती हैं। इसलिए उनके मामले में विशेषज्ञ पहले वजह की तलाश करने और मेडिकल इलाज को वक्त देने पर जोर देते हैं। सर्जरी कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए ही सही बैठती है और उसके लिए अलग से जांच जरूरी होती है।

खर्च ग्राफ्ट्स की संख्या, इस्तेमाल हुई तकनीक, सर्जन की असल भागीदारी और पैकेज में क्या शामिल है, इस पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ सबसे कम रेट देखकर फैसला लेना ठीक नहीं बताया गया है। क्लिनिक जाकर यह पूछने की बात कही गई है कि प्रक्रिया असल में कौन करेगा, ग्राफ्ट्स की यही संख्या क्यों सुझाई जा रही है, पिछले मरीजों के असली और बिना बदले नतीजे देखे जा सकते हैं या नहीं, और दिक्कत होने पर क्या किया जाएगा और फॉलो-अप कैसे होंगे। "100 प्रतिशत नतीजे की गारंटी" या "एक हफ्ते में नए बाल" जैसे विज्ञापनों से सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि मेडिकल इलाज में ऐसी गारंटी कोई नहीं दे सकता।

घर पर रोजमर्रा की आदतों के बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रोटीन, आयरन और विटामिन से भरपूर संतुलित आहार, पूरी नींद और तनाव का सही प्रबंधन बालों की सेहत पर अच्छा असर डालते हैं। स्कैल्प साफ रखना, हल्का शैंपू इस्तेमाल करना, गीले बालों पर कसी हेयरस्टाइल से बचना और कंघी जोर से न खींचना जैसी आदतें भी काम की बताई गई हैं। बाल झड़ना दो-तीन महीने कम हुए बिना चलता रहे, तो त्वचा और बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराने की बात कही गई है।

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