बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:32 IST

ठाणे में 66 साल की महिला के लिवर से निकली बड़ी गांठ, पहले बढ़ाया गया स्वस्थ लिवर का हिस्सा

किम्स हॉस्पिटल्स, ठाणे के डॉक्टरों ने लिवर के करीब 75% हिस्से में फैली गांठ का ऑपरेशन किया। उससे पहले स्वस्थ लिवर का अनुपात करीब 25% से बढ़ाकर लगभग 45% किया गया।

ठाणे के किम्स हॉस्पिटल्स में डॉक्टरों ने एक 66 साल की महिला के लिवर से बड़ी गांठ निकाली है। यह गांठ लिवर के करीब 75% हिस्से में फैली हुई थी। अक्टूबर 2026 में सामने आए इस मामले में ऑपरेशन मुमकिन था, लेकिन उसमें बड़ा जोखिम था।

डॉक्टरों का अंदाजा था कि गांठ और प्रभावित हिस्सा निकालने के बाद सिर्फ करीब 25% स्वस्थ लिवर बचेगा। इसलिए तुरंत ऑपरेशन करने के बजाय किम्स हॉस्पिटल्स, ठाणे के कंसल्टेंट GI और HPB ऑन्कोसर्जन डॉ. सानिया पांड्रोवाला की अगुवाई में बहुविशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पहले यह काम किया कि ऑपरेशन के लिए उपलब्ध स्वस्थ लिवर की मात्रा बढ़ाई जाए।

महिला को दमा, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी दिक्कतें भी थीं। शुरुआत में किम्स हॉस्पिटल्स, ठाणे के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जिनेश सिंघवी ने उनका इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से इलाज शुरू किया। उसी दौरान किम्स हॉस्पिटल्स, ठाणे के वैस्क्युलर एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नीरज शेट्टी ने लिवर का काम करने वाला हिस्सा बढ़ाने के लिए एक खास प्रक्रिया की। इसमें लिवर के बीमार हिस्से की तरफ जाने वाला खून का बहाव मोड़ा गया। इससे स्वस्थ हिस्से को ज्यादा खून मिला और उसका आकार धीरे-धीरे बढ़ने में मदद मिली।

आने वाले कुछ महीनों में ऑपरेशन के बाद काम करने वाले लिवर के हिस्से (फ्यूचर लिवर रेमनेंट) का अनुपात करीब 25% से बढ़कर लगभग 45% तक पहुंच गया। इसी वजह से डॉक्टर लिवर का बड़ा हिस्सा निकालने का ऑपरेशन कर पाए।

डॉ. सानिया पांड्रोवाला ने कहा, "गांठ इतनी बड़ी थी कि चुनौती सिर्फ कैंसर निकालने की नहीं थी। यह पक्का करना भी जरूरी था कि ऑपरेशन के बाद मरीज के शरीर का काम ठीक से चलता रहे, इसके लिए पर्याप्त स्वस्थ लिवर बचे। इसलिए जल्दबाजी में ऑपरेशन करने के बजाय हमने इलाज की योजना कई चरणों में बनाई।"

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की प्रक्रिया के बारे में डॉ. नीरज शेट्टी ने बताया, "लिवर की बड़ी गांठ के कारण अगर स्वस्थ लिवर का सिर्फ छोटा हिस्सा बचता हो, तो तुरंत गांठ निकालना सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। ऑपरेशन से पहले स्वस्थ लिवर की मात्रा बढ़ाने के लिए खून के बहाव को चुनकर उस हिस्से की तरफ मोड़ना हमारी भूमिका थी। आने वाले कुछ महीनों में इससे स्वस्थ लिवर का अनुपात करीब 25% से बढ़कर लगभग 45% हो गया। इस तरह तय ऑपरेशन के लिए लिवर का ज्यादा पर्याप्त काम करने वाला हिस्सा उपलब्ध हो गया।"

इस दौरान मरीज की उम्र और पहले से मौजूद बीमारियों को देखते हुए उनकी पोषण की स्थिति, शारीरिक फिटनेस और सांस की सेहत पर भी नजर रखी गई। स्वस्थ लिवर की मात्रा पर्याप्त बढ़ जाने के बाद उन्हें ऑपरेशन के लिए फिट माना गया। डॉ. सानिया पांड्रोवाला की अगुवाई वाली टीम ने लिवर का बड़ा हिस्सा निकालने का ऑपरेशन कामयाबी से किया, जिसमें गांठ के साथ लिवर का प्रभावित हिस्सा निकाला गया।

ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत में अच्छा सुधार हुआ। उन्हें करीब 10 दिन अस्पताल में रखा गया। इस दौरान कुछ समय के लिए उनके पेट में पानी जमने की दिक्कत हुई, लेकिन उसका सफल इलाज किया गया। बाद की नियमित जांचों में भी उनकी हालत ठीक बताई गई है।

डॉक्टरों के मुताबिक यह मामला लिवर की बीमारियों में बदलते रुझान की ओर भी इशारा करता है। पहले लिवर के कैंसर को हेपेटाइटिस और शराब से जुड़ी लिवर की बीमारियों के साथ जोड़ा जाता था। लेकिन अब मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी मेटाबॉलिज्म से जुड़ी दिक्कतें भी अहम जोखिम कारक के रूप में ज्यादा सामने आ रही हैं।

डॉ. पांड्रोवाला ने कहा, "नियमित जांच के दौरान किए गए स्कैन में फैटी लिवर की तकलीफ अक्सर संयोग से पकड़ में आती है। शुरुआती दौर में उसके लक्षण दिखें, यह जरूरी नहीं। लेकिन कुछ लोगों में यह तकलीफ बढ़कर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और कुछ मामलों में लिवर के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। वजन, डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिज्म से जुड़ी दिक्कतों को काबू में रखने और सही मेडिकल निगरानी लेने से बीमारी के आगे बढ़ने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।"

डॉक्टरों का कहना है कि बड़ी गांठ निकालने के बाद जिन मरीजों में लिवर का पर्याप्त काम करने वाला हिस्सा बचना मुश्किल हो, उनमें चरणों में इलाज करना और ऑपरेशन से पहले लिवर का कामकाजी हिस्सा बढ़ाने की योजना बनाना कितना अहम है, यह इस मामले से रेखांकित होता है।

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