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08:22 IST

तिरोडा के सातोना, बोरगाव, वडेगाव में लौहयुगीन स्थल, मंडल ने किया दौरा

इतिहास अभ्यास संशोधन मंडल, गोंदिया के पदाधिकारियों ने तिरोडा तालुका के प्राचीन स्थलों का मुआयना किया और नागपुर के पुरातत्त्व विभाग से संरक्षण की मांग की।

तिरोडा के सातोना, बोरगाव, वडेगाव में लौहयुगीन स्थल, मंडल ने किया दौरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंदिया जिले के तिरोडा तालुका में सातोना, बोरगाव और वडेगाव परिसर में लौहयुगीन स्थल मिले हैं। इतिहास अभ्यास संशोधन मंडल, गोंदिया के पदाधिकारियों ने वहां जाकर इन स्थलों का मुआयना किया। मंडल की तरफ से नागपुर के पुरातत्त्व विभाग से मांग की गई है कि यहां के ऐतिहासिक महत्त्व वाले प्रस्तरवर्तुल (मेगालिथ्स) की हिफाजत और संवर्धन किया जाए और इस जगह को 'सुरक्षित ऐतिहासिक स्थल' घोषित किया जाए।

मुआयने के दौरान पता चला कि सातोना-बोरगाव परिसर में राजस्व खसरा नंबर 32 और 31/679 के इलाके में पूरे 70 प्रस्तरवर्तुल मिले हैं। बताया गया है कि बोरगाव, वडेगाव और सातोना में मिलने वाले इन प्रस्तरवर्तुलों का आकार करीब 150 सेंटीमीटर से 1700 सेंटीमीटर तक है। यहां लैटेराइट पत्थर (लैटेराइट स्टोन्स) से बने द्विसमकेंद्री प्रस्तरवर्तुल दिखते हैं। प्राचीन इतिहास और पुरातत्त्वीय शोध के लिहाज से इन स्थलों को बहुत अहम माना जा रहा है।

इन स्थलों को देखने के लिए मंडल के मुख्य समन्वयक अनिल देशमुख, उपाध्यक्ष योगेश पारधी, तिरोडा के मंडल सदस्य चंद्रकुमार पटले, प्राचार्य और पत्रकार डी. आर. गिरीपुंजे, यू. टी. पारधी और सातोना के पुलिस पाटील जी. डी. हटवार मौके पर पहुंचे और बारीकी से जायजा लिया।

मुआयने में यह भी दिखा कि उस जगह पर वन विभाग की तरफ से निर्माण कार्य चल रहा है। इन प्राचीन स्थलों का ठीक से सर्वे, पुरातत्त्वीय मूल्यांकन और संरक्षण होने से पहले ही काम शुरू हो गया। इसलिए इस अमूल्य विरासत को बचाने को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है।

हाल ही में गोंदिया में इतिहास अभ्यास संशोधन मंडल की सभा हुई थी। पुरातत्त्व विभाग के सहायक आयुक्त और अतिरिक्त जिलाधिकारी के कक्ष में हुई चर्चा में ऐसे ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा का अहम मुद्दा उठाया गया था।

मंडल के पदाधिकारियों ने महाराष्ट्र शासन के शिक्षण और सेवा योजना विभाग के 10 सितंबर 1982 के पत्र का हवाला दिया। उनके मुताबिक इस पत्र में निर्देश हैं कि ऐसी पुरानी ऐतिहासिक जगहों पर निर्माण से पहले पुरातत्त्व विभाग का 'ना-हरकत प्रमाणपत्र' (NOC) या पूर्व अनुमति लेना जरूरी है। इसके बावजूद उनका आरोप है कि वन विभाग बिना किसी पूर्व अनुमति के उस जगह पर काम करा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन फौरन जांच करे कि स्थल का पुरातत्त्वीय महत्त्व देखते हुए नियम के मुताबिक जरूरी अनुमतियां ली गई हैं या नहीं।

मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि सातोना-बोरगाव-वडेगाव की तरह माल्ही, गांगला और सिल्ली में भी ऐसे ही ऐतिहासिक स्थल मिले हैं। बताया गया कि माल्ही के कुछ हिस्सों में पुरातत्त्व विभाग पहले खुदाई भी कर चुका है।

इन सभी स्थलों का एक साथ अध्ययन किया जाए तो गोंदिया जिले के प्राचीन इतिहास, उस दौर की इंसानी बस्ती और तब की दफन विधि या दूसरी सांस्कृतिक परंपराओं पर काफी रोशनी पड़ने की पूरी संभावना है। लेकिन इन स्थलों का सटीक कालखंड और स्वरूप वैज्ञानिक तरीके से तय करने के लिए विशेषज्ञों से गहरा पुरातत्त्वीय शोध कराना वक्त की जरूरत बताया गया है।

मांग की गई है कि इन स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे हो, उनका पूरा दस्तावेजीकरण किया जाए और आगे के शोध के लिए जरूरी उपाय किए जाएं। नागपुर के पुरातत्त्व विभाग से यह भी कहा गया है कि इस परिसर को 'सुरक्षित ऐतिहासिक स्थल' घोषित कर वहां के प्राचीन अवशेषों की फौरन हिफाजत की जाए, और स्थल का ऐतिहासिक महत्त्व साफ होने तक नियम के मुताबिक पूरी एहतियात बरती जाए। इतिहासप्रेमियों और शोधकर्ताओं की उम्मीद है कि जिला प्रशासन वक्त रहते ध्यान देकर इस कीमती धरोहर को हमेशा के लिए बचाएगा।

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