मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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ठाणे के गडकरी रंगायतन में 26 नवंबर को विठ्ठल उमप की 16वीं स्मृति पर संगीत समारोह

ठाणे के गडकरी रंगायतन में 26 नवंबर को विठ्ठल उमप की 16वीं स्मृति पर संगीत समारोह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

लोकशाहीर विठ्ठल उमप की 16वीं पुण्यतिथि पर ठाणे में संगीत समारोह होगा। इसी मंच पर विठ्ठल उमप फाउंडेशन के मृदगंध पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

लोकशाहीर विठ्ठल उमप को याद करने के लिए ठाणे में एक संगीत समारोह रखा गया है। उनकी 16वीं स्मृति के मौके पर "लोकशाहीर विठ्ठल उमप स्मृती संगीत समारोह" का आयोजन किया जा रहा है। इसमें उनकी यादों को सुरों के जरिए श्रद्धांजलि दी जाएगी।

कार्यक्रम 26 नवंबर को शाम 6 बजे ठाणे के गडकरी रंगायतन में होगा। इसी मंच पर विठ्ठल उमप फाउंडेशन के "मृदगंध पुरस्कारों" का वितरण समारोह भी रखा गया है। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अहम योगदान देने वाली शख्सियतों का इसमें सम्मान किया जाएगा।

विठ्ठल उमप अपनी पहाड़ी आवाज और लोककला के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाने जाते थे। इसी के दम पर उन्होंने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध किया। लोककला, लोकसंगीत और सामाजिक जागरूकता को उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों में एक साथ पिरोया। संगीत नाटक अकादमी का राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले इस वरिष्ठ शाहीर ने अपनी खास गायकी से लोकपरंपरा को नई पहचान दी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, फिर भी उनके गीत और उनकी कला की विरासत चाहने वालों की यादों में जिंदा है।

आयोजकों के मुताबिक इस समारोह के जरिए विठ्ठल उमप के कलात्मक योगदान को नमन तो किया ही जाएगा, साथ ही उनकी संजोई हुई लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश भी होगी।

इस आयोजन पर नंदेश उमप ने अपनी भावनाएं रखीं। उन्होंने कहा, "बाबा की याद मेरे लिए सिर्फ याद नहीं है, बल्कि मेरी जिंदगी और मेरी कला का अटूट हिस्सा है। उन्होंने अपनी आवाज से लोगों के दिलों में जो जगह बनाई, उस विरासत को आगे ले जाना मेरे लिए गर्व की बात है। आज वे मेरे साथ नहीं हैं, फिर भी उनके गीत, उनके विचार और लोककला के लिए उनका प्यार मुझे हर कदम पर प्रेरणा देता है।"

नंदेश उमप ने आगे कहा, "विठ्ठल उमप स्मृती संगीत समारोह के जरिए बाबा को श्रद्धांजलि देते वक्त मन में बस एक ही भावना होती है कि उन्होंने जो लोककला संजोई, वह यूं ही जिंदा रहे और नई पीढ़ी तक पहुंचे। मृदगंध पुरस्कारों के जरिए समाज के लिए दिल से काम करने वालों का सम्मान कर पाना मेरे लिए बाबा के काम को आगे बढ़ाने का एक भावनात्मक मौका है।"

विठ्ठल उमप फाउंडेशन की स्थापना 2012 में हुई थी। फाउंडेशन अब तक कई जरूरतमंदों को मदद का सहारा दे चुका है। लोककला के साथ समाजसेवा की विरासत को संभालते हुए नंदेश उमप ने लोकशाहीर विठ्ठल उमप के काम को आगे बढ़ाया है।

मृदगंध पुरस्कारों से इससे पहले कई जानी-मानी हस्तियों को नवाजा जा चुका है। इनमें पद्मश्री शाहीर साबळे, ना. धों. महानोर, अशोक पत्की, सुलोचना चव्हाण, सुबोध भावे, विक्रम गोखले, पद्मश्री डॉ. अभय बंग, डॉ. निलेश साबळे, मधुमंगेश कर्णिक, प्रशांत दामले, प्राजक्ता कोळी, जयंत सावरकर, पद्मश्री डॉ. रवींद्र कोल्हे, पद्मश्री पद्मा कोल्हे, दिलीप प्रभावळकर, सुदेश भोसले, सुमित राघवन, चिन्मयी सुमित, केतकी माटेगावकर, भीमराव पांचाळे और रिंकू राजगुरू शामिल हैं।

विठ्ठल उमप की यादों को संजोकर लोककला का सम्मान करने वाला यह समारोह इस बार भी संगीत, संस्कृति और सामाजिक योगदान का संगम बनने जा रहा है।

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