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02:52 IST

प्रभादेवी में 11 अक्टूबर को 'देवसखा', भक्त और देव के रिश्ते पर सुरीली शाम

रवींद्र नाट्य मंदिर में रविवार शाम 7 बजे संतसाहित्य और भक्तिसंगीत का कार्यक्रम होगा, प्रवेश मुफ्त है।

प्रभादेवी में 11 अक्टूबर को 'देवसखा', भक्त और देव के रिश्ते पर सुरीली शाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई के प्रभादेवी स्थित रवींद्र नाट्य मंदिर में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे एक खास संगीत कार्यक्रम होने जा रहा है। कार्यक्रम का नाम है 'देवसखा - एक सुरीला संवाद... भक्त और देव के बीच का...'। इसमें भक्त और देव के बीच के भावपूर्ण रिश्ते, संतसाहित्य की समृद्ध परंपरा और भक्तिसंगीत का अनुभव सुनने को मिलेगा। संगीत के शौकीनों के लिए प्रवेश मुफ्त रखा गया है।

कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग के तहत सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, महाराष्ट्र राज्य, मुंबई की ओर से किया जा रहा है।

आयोजकों के मुताबिक भक्त और देव का रिश्ता जितना निजी है, उतना ही सार्वभौमिक भी है। इस रिश्ते की भावनाएं, श्रद्धा, प्रेम और समर्पण के अलग-अलग पहलू संतों की रचनाओं में सामने आते हैं। इसी भावविश्व को खोलते हुए उसकी भावसंपदा को सहेजने का एक संगीतमय सफर है 'देवसखा'। कार्यक्रम के केंद्र में संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज, संत जनाबाई और संत नामदेव महाराज की संतपरंपरा का भक्तिभाव है।

प्रस्तुति प्राची कोकीळ-मराठे की है और दत्ता मेस्त्री सहगायक के तौर पर साथ होंगे। संगीत संयोजन विनय चेऊलकर का है। संगीत साथ में अक्षय कावळे कीबोर्ड पर, हिमांशु गिंडे बांसुरी पर, मयुरेश शेर्लेकर और आदित्य आठल्ये तबले पर, जयंत बगाडे पखवाज पर और चेतन परब तालवाद्य पर रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ देशपांडे करेंगे, जबकि लेखन प्रतिमा कुलकर्णी का है।

यह सांस्कृतिक उपक्रम सांस्कृतिक कार्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री एड. आशिष शेलार की संकल्पना से आयोजित किया गया है। इसे सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। महाराष्ट्र के संतसाहित्य, भक्तिसंगीत और सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने, बढ़ाने और फैलाने के लिए सांस्कृतिक कार्य संचालनालय की ओर से कई उपक्रम चलाए जा रहे हैं।

सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संचालक प्रशांत खेडेकर ने अपील की है कि संगीतप्रेमी बड़ी संख्या में पहुंचें और संतसाहित्य व भक्तिसंगीत की इस भावपूर्ण महफिल का आनंद लें।

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