टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के आरोपी कोटा में 15 मिनट के अंदर पुलिस की गिरफ्त में
कोटा पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के आरोपियों को रेलवे स्टेशन इलाके में पकड़ लिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एसपी तेजस्विनी गौतम को फोन कर पुलिस की तारीफ की।
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बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के बाद पूरे देश में हलचल मच गई थी। अब इस मामले के आरोपियों को कोटा पुलिस ने 24 घंटे के अंदर पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर कोटा पुलिस की फुर्ती और हिम्मत की खूब तारीफ हो रही है।
राजस्थान सरकार ने भी इस पूरे ऑपरेशन का नोटिस लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक (SP) IPS तेजस्विनी गौतम को फोन किया और पूरी पुलिस टीम को बधाई दी। उन्होंने एसपी तेजस्विनी के दमदार नेतृत्व की खास तारीफ भी की।
मिली जानकारी के मुताबिक, हमले वाले दिन सुबह करीब 9:45 बजे मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच से कोटा की एसपी तेजस्विनी गौतम को एक बेहद अहम इनपुट मिला। इसमें बताया गया था कि कुछ कुख्यात आरोपी ट्रेन से भागकर कोटा की तरफ आ रहे हैं।
खबर मिलते ही कोटा पुलिस ने एक पल भी गंवाए बिना कदम उठाए। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाके में नाकाबंदी कर दी गई। सिर्फ 15 मिनट के अंदर पुलिस ने सभी आरोपियों को पकड़ लिया। पुलिस की इस तेज और सटीक कार्रवाई से एक बड़ी वारदात टल गई और आरोपियों के मंसूबे धरे रह गए।
इस कार्रवाई की अगुवाई करने वाली IPS तेजस्विनी गौतम राजस्थान कैडर की 2013 बैच की अफसर हैं। वे मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं और पढ़े-लिखे परिवार से आती हैं।
पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में बीए (ऑनर्स) किया है। इसके अलावा उन्होंने एलएलबी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की पढ़ाई भी की है। बताया जाता है कि पढ़ाई के दिनों में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं।
कोटा आने से पहले तेजस्विनी गौतम चुरू, अजमेर और बीकानेर जैसे अहम जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुकी हैं। उन्होंने जयपुर में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में भी एसपी के तौर पर काम किया है। अपने दमदार काम, साफगोई और सख्त पुलिसिंग के लिए वे पूरे पुलिस महकमे में जानी जाती हैं।
वे सिर्फ अपराध पर लगाम कसने तक सीमित नहीं रहीं। चुरू में तैनाती के दौरान उन्होंने नुक्कड़ नाटकों और जागरूकता अभियानों के जरिए आम लोगों तक सुरक्षा और कानून का संदेश पहुंचाया। अजमेर में रहते हुए उन्होंने 'प्रेरणा' नाम की एक खास पहल शुरू की थी। इसके जरिए नशे से लड़ रहे और रास्ते से भटक रहे युवाओं के पुनर्वास में उन्होंने अहम योगदान दिया।
एक महिला पुलिस अधिकारी के तौर पर उन्होंने महिला सुरक्षा, कानून की जानकारी फैलाने और अपराध पर काबू पाने को हमेशा सबसे ऊपर रखा है। उनके इसी काम के तरीके की वजह से कोटा पुलिस की यह कार्रवाई आज पूरे देश में चर्चा में है।