डोंबिवली में 1998 के कत्ल का मुख्य आरोपी 28 साल बाद बिहार से गिरफ्तार
डोंबिवली जीआरपी ने 1998 के कत्ल के मुख्य आरोपी संदीप कृष्णन को बिहार से गिरफ्तार किया; दो आरोपी फरार।
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डोंबिवली जीआरपी पुलिस ने 1998 में हुई एक हत्या के मामले में मुख्य आरोपी संदीप कृष्णन को 28 साल बाद बिहार से गिरफ्तार किया है। यह वारदात डोंबिवली और कोपर रेलवे स्टेशन के बीच हुई थी। इस मामले के दो और आरोपी अभी तक फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
14 दिसंबर 1998 को डोंबिवली और कोपर रेलवे स्टेशन के बीच पटरियों पर एक आदमी की लाश मिली थी। शुरू में पुलिस को शक था कि यह रेलवे हादसा है। लेकिन जांच के दौरान पता चला कि मरने वाले का नाम शैलेश मोरे था। जब यह शक गहराया कि उनकी मौत हादसे में नहीं हुई, बल्कि उनकी हत्या की गई है, तो पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया।
डोंबिवली रेलवे पुलिस की दी हुई जानकारी के मुताबिक शैलेश मोरे ने संदीप कृष्णन की बहन को तलाक दिया था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। आरोप है कि इसी गुस्से में संदीप कृष्णन और उसके दो साथियों, विनोद यादव और विनेश कृष्णन, ने पार्टी के बहाने सबको इकट्ठा किया और पत्थर से कुचलकर शैलेश मोरे की हत्या कर दी।
जांच में सामने आया कि हत्या के बाद मामले को हादसा दिखाने के लिए शैलेश मोरे की लाश रेलवे पटरियों पर डाल दी गई थी। आरोपी फरार हो गए थे, इसलिए इस केस की जांच में बहुत लंबा वक्त लग गया। अब इतने साल बाद मुख्य आरोपी पुलिस के हाथ लगा है, तो इस पुराने मामले में फिर एक अहम मोड़ आया है।
डोंबिवली जीआरपी के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाबासाहेब थोरात के मार्गदर्शन में पुलिस ने संदीप कृष्णन को ढूंढा और बिहार से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे कल्याण कोर्ट में पेश किया गया। जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।
इस मामले के बाकी दो आरोपी, विनोद यादव और विनेश कृष्णन, अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगी है और उन्हें भी गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। 28 साल पहले हुई इस हत्या के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से जांच को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। अब सबकी नजर इस पर है कि बाकी आरोपी कब पकड़े जाते हैं और आगे की जांच में क्या जानकारी सामने आती है।