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15:52 IST

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग: कोटा स्टेशन पर ट्रेन से तीन संदिग्ध पुलिस के हाथ लगे

मुंबई से ट्रेन में निकले तीन संदिग्धों को राजस्थान पुलिस ने कोटा स्टेशन पर पकड़ा। पुलिस का दावा है कि वे दिल्ली के रास्ते नेपाल जाने की तैयारी में थे।

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग: कोटा स्टेशन पर ट्रेन से तीन संदिग्ध पुलिस के हाथ लगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले में पुलिस के हाथ अब बड़ी सफलता लगी है। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि ये तीनों गोलीबारी के बाद मुंबई छोड़कर निकल गए थे और दिल्ली होते हुए नेपाल पहुंचने की तैयारी में थे। हालांकि इनकी असली भूमिका क्या थी, यह अभी जांच से ही साफ होगा।

वारदात रविवार, 18 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7 बजे जुहू के पुष्पा नरसी पार्क के पास हुई। टाइगर इस पार्क में फुटबॉल खेलने आए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक वे हर रविवार करीब दो घंटे यहां खेलते हैं। खेल के बाद वे कार से घर लौट रहे थे, तभी बाइक पर आए तीन अनजान हमलावरों ने उनकी गाड़ी की तरफ गोलियां दागीं और भाग गए। उस वक्त आसपास फैंस की भीड़ थी, इसलिए अचानक गोलियां चलने से अफरातफरी मच गई। वारदात का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर घूम रहा है।

टाइगर खुद गोली से बच गए। पुलिस ने साफ कहा है कि वे सुरक्षित हैं, हालांकि एक रिपोर्ट में बताया गया कि बारूद और टूटे कांच से उन्हें हल्की खरोंचें आई थीं। उनके ड्राइवर फिरदौस के बाएं हाथ में गोली लगी। एक और आदमी भी घायल हुआ, जिसे कहीं राहगीर तो कहीं रिक्शा चालक बताया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ड्राइवर घायल हुआ तो टाइगर ने खुद गाड़ी संभाली और उसे अस्पताल तक पहुंचाया। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज की जगह को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं: एक में नानावटी अस्पताल का नाम आया, दूसरे में जुहू के कूपर अस्पताल का।

गोलियों की गिनती पर भी एक राय नहीं है। एक रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कुल 5 गोलियां चलने की बात है, जबकि दूसरी में 7 राउंड फायरिंग बताई गई है। इसी तरह घायल राहगीर का नाम एक जगह उमेश चव्हाण लिखा गया है। दूसरी रिपोर्ट में उमेश चौहान को ड्राइवर कहा गया है, जिनकी हालत स्थिर बताई गई है। उन्हें देर रात बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया गया और वहां हृदय व छाती के सर्जनों की टीम इमरजेंसी आईसीयू में उनकी निगरानी कर रही है। बताया गया कि गोली से दिल या फेफड़ों को गंभीर नुकसान नहीं हुआ।

पकड़ाई कैसे हुई, इस पर कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने जानकारी दी। उनके मुताबिक मुंबई पुलिस को पता चला कि संदिग्ध पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में हैं। उसने फौरन राजस्थान पुलिस को खबर दी। इसके बाद पुलिस उपअधीक्षक और साइबर सेल की टीम तैयार की गई। राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स भी इस कार्रवाई में साथ रही। ट्रेन के कोटा पहुंचते ही डिब्बों की तलाशी हुई और करीब 15 मिनट में तीनों को पकड़ लिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार वे जनरल कोच में बैठे थे।

पुलिस के मुताबिक पहला संदिग्ध रेहान है, उम्र 18 साल, हरियाणा के सोनीपत की ईदगाह कॉलोनी का रहने वाला। उसे मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है और शक है कि हमले की प्लानिंग में उसका बड़ा हाथ था। दूसरा ऋतिक है, जो उर्फ रोशन के नाम से भी जाना जाता है। वह 22 साल का है और बिहार के बेगूसराय जिले के पिपराई गांव का रहने वाला है। फिलहाल वह मुंबई के अंधेरी पश्चिम में रहता था और रैपिडो पर बाइक राइडर का काम करता था। उसका सरनेम एक रिपोर्ट में कुमार और दूसरी में कुर्मी लिखा गया है। तीसरा संदिग्ध 17 साल का नाबालिग है, जो हरियाणा के सोनीपत का है। नाबालिग होने की वजह से उसकी पहचान उजागर नहीं की जा रही।

पुलिस के सूत्र बताते हैं कि हमले के बाद तीनों अंधेरी पहुंचे, स्टेशन पर बाइक छोड़ी और ट्रेन से राजस्थान की तरफ निकल पड़े। एक दावे के मुताबिक उनमें से एक का संपर्क अनिल पंडित से था। यह वही नाम है जो सोशल मीडिया की उस पोस्ट और ऑडियो क्लिप में आया, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। कहा जाता है कि पुलिस की नजर से बचने के लिए वे सिग्नल ऐप पर उससे बात करते थे। उस पोस्ट में सलमान खान के साथ काम करने वाले कलाकारों को धमकी भी दी गई थी। फिर भी गैंग के सीधे शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और एजेंसियां इस दावे को बाकी सबूतों से मिलाकर देख रही हैं।

अब तक तीनों के पास से कोई हथियार नहीं मिला है। इसलिए पूछताछ में यह जानना अहम होगा कि गोली चलाने वाला हथियार कहां छिपाया गया, किसे दिया गया या रास्ते में फेंक दिया गया। एक रिपोर्ट में शक जताया गया है कि कार पर देसी पिस्तौल से फायरिंग हुई, और शुरुआती फॉरेंसिक जांच से कुछ सुराग मिले हैं, पर अंतिम बात आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगी। यह भी देखा जाएगा कि हथियार किसने दिए, पैसा किसने लगाया और साजिश में और कौन शामिल है।

रेकी का सवाल भी जांच के केंद्र में है। सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट कहती है कि शूटर पिछले करीब 20 दिनों से टाइगर के घर, जिम और उनके आने-जाने की जगहों पर नजर रखे थे। पैपराजी और ब्लॉगरों की पोस्ट से वे उनका शेड्यूल भी जान रहे थे। एक पुलिस अफसर के हवाले से यह भी कहा गया कि आरोपियों ने शायद टाइगर का पीछा किया और पार्क के गेट के बाहर उनके पहुंचने का इंतजार किया। यह सब अभी जांच का हिस्सा है और कोई आखिरी नतीजा सामने नहीं आया है। पुलिस ने यह भी बताया कि टाइगर ने पहले धमकी भरे फोन की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

मामला जुहू पुलिस ने तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धाराओं में दर्ज किया है। एक रिपोर्ट में आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 का जिक्र है। धारा 109(1) हत्या की कोशिश की है और 3(5) कई लोगों के साझा इरादे से किए अपराध की। केस अब मुंबई क्राइम ब्रांच के पास है। हमलावरों की तलाश में मुंबई पुलिस ने 15 टीमें लगाई थीं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगाली, चश्मदीदों से बात की, फोरेंसिक सबूत जुटाए और हमले में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल का भी पता लगाया। संदिग्धों के सफर की जानकारी भी काम आई।

एक समय खबर आई थी कि मुंबई पुलिस ने सूरत एक्सप्रेस से दो संदिग्धों को उठाया है, और तब यह भी साफ नहीं था कि वे आरोपी हैं या नहीं। बाद की जानकारी में गिरफ्तारी कोटा में तीन की बताई गई, और कहा गया कि ये गुजरात की तरफ भागने की खबर पर भी नजर रखने के बाद पकड़े गए।

राजस्थान पुलिस हिरासत में लिए गए तीनों को आगे की पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस को सौंपेगी। वहां उनसे गहराई से पूछताछ होगी कि हमले का मकसद क्या था, टाइगर की आवाजाही की खबर उन्हें किसने दी, प्लानिंग कहां बनी, और नेपाल में पनाह दिलाने का वादा किसने किया था।

घटना के बाद सुरक्षा भी कड़ी की गई है। बांद्रा के कार्टर रोड पर टाइगर के घर के बाहर पुलिस तैनाती बढ़ाई गई है। सलमान खान के घर के आसपास भी इंतजाम सख्त हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने टाइगर और उनके परिवार को भरोसा दिलाया है कि पुलिस पूरी जांच करेगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। भीड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात से बॉलीवुड कलाकारों की सुरक्षा का सवाल फिर उठ गया है।

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