सुपर अल निनो और सूखे का खतरा: गोंदिया में अगले आठ महीने के पानी का प्लान बनाने के निर्देश
पालकमंत्री इंद्रनील नाईक ने गोंदिया में समीक्षा बैठक लेकर पीने के पानी को सबसे ऊपर रखने और रब्बी के लिए पानी आरक्षित रखने को कहा।
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गोंदिया, 22 तारीख। सुपर अल निनो और सूखे के हालात की आशंका को देखते हुए पालकमंत्री इंद्रनील नाईक ने निर्देश दिए हैं कि अगले आठ महीने का पानी का नियोजन बारीकी से किया जाए। मकसद यह है कि जिले के लोगों को पीने का पानी और रब्बी सीजन के लिए खेती का पानी ठीक मात्रा में मिलता रहे।
किल्लत से निपटने के उपायों और उनके असरदार अमल पर चर्चा के लिए आज जिला नियोजन भवन में पालकमंत्री नाईक की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष लायकराम भेंडारकर, सांसद राजेंद्र जैन, विधायक राजकुमार बडोले, विनोद अग्रवाल और विजय रहांगडाले मौजूद थे। जिलाधिकारी मंदार पत्की, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनित चंद्रा दोंतुला, पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे, उपवनसंरक्षक पवनकुमार जोंग और संबंधित विभागों के अधिकारी भी आए थे।
पालकमंत्री नाईक ने साफ कहा कि भूजल स्तर को देखते हुए नए बोरवेल को इजाजत न दी जाए। उन्होंने कहा कि जो पानी है उसका सही इस्तेमाल जरूरी है और लोग भी पानी किफायत से खर्च करें। नाले और तालाब गहरे करने और जलसंधारण के काम हाथ में लेने को भी कहा गया। साथ ही यह भी कि ये काम शुरू करने से पहले संबंधित जनप्रतिनिधियों से बात करके उनका सहयोग लिया जाए।
बैठक में गांव, शहर और नगर पंचायत इलाकों में पानी की किल्लत के उपायों का पूरा जायजा लिया गया। पीने के पानी को सबसे ऊपर रखकर ऐसा प्लान बनाने को कहा गया कि अगले आठ महीने पानी मिलता रहे। पालकमंत्री ने जिले के सभी बड़े और मध्यम प्रोजेक्ट, उनमें अभी के जल भंडार और आरक्षित पानी की जानकारी ली।
रब्बी सीजन के लिए जरूरी पानी मिले, इसका नियोजन करने को कहा गया। इटियाडोह प्रोजेक्ट, धापेवाडा उपसा सिंचन प्रोजेक्ट, गोंदिया सिंचाई विभाग के तहत आने वाले प्रोजेक्ट और कटंगी मध्यम प्रोजेक्ट के जल भंडार और आरक्षित पानी पर तफसील से बात हुई। पालकमंत्री ने अगले आठ महीने के लिए जरूरी पानी आरक्षित रखने के लिए भी कहा।
बोदलकसा बांध की दीवार टूटने से पानी बह गया है। इसमें किसी की जान नहीं गई और कोई आर्थिक नुकसान भी नहीं हुआ, लेकिन बांध में पानी का स्तर घट गया है। पालकमंत्री ने कहा कि आने वाले सूखे को देखते हुए बचे पानी का सही नियोजन किया जाए और बांध का जरूरी काम पूरा करने के लिए फौरन कार्रवाई हो।
पानी की कमी या कीड़ों की बीमारी से फसलों को नुकसान हुआ हो तो उसके पंचनामे ठीक तरीके से करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए। जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में पानी की संभावित किल्लत के हालात भी रखे। उन्होंने ध्यान दिलाया कि आगे पानी की तीखी कमी हुई तो किसानों और आम लोगों पर असर पड़ सकता है, इसलिए अभी से असरदार नियोजन जरूरी है।
चारे को लेकर जिलाधिकारी मंदार पत्की ने बताया कि जिले में फिलहाल चारे की कमी नहीं है और चारा छावनी शुरू करने की जरूरत नहीं है। जिले के बाहर चारा ले जाने के लिए जिलाधिकारी की इजाजत जरूरी है, यह बात संबंधित विभागों को बता दी गई है। रब्बी में चारे की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को चारे के बीज देने के वास्ते 30 लाख रुपये के अतिरिक्त फंड की मांग की गई है। जिला वार्षिक योजना से 50 लाख रुपये के चारा बीज बांटने का प्रस्ताव है। विदर्भ-मराठवाडा दुग्ध विकास परियोजना के तहत 6.51 लाख रुपये के बीज बांटे जा चुके हैं और 2.63 लाख रुपये के बीज और बांटे जाएंगे। जंगल इलाके का उपलब्ध चारा लोगों को देने के उपाय भी किए जाएंगे। हालात के हिसाब से ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी कम पानी में जल्दी उगने वाली चारा फसलों के बीज बांटने को भी कहा गया।
भूजल स्तर की समीक्षा में जनप्रतिनिधियों ने सुझाया कि जहां ज्यादा पानी खींचा गया है, वहां के कुओं की भी जांच हो। अभी तय कुओं से ही भूजल स्तर जांचा जाता है, पर उनका इस्तेमाल खेती या दूसरे कामों में नहीं होता। इसलिए सही तस्वीर के लिए इस्तेमाल वाले कुओं की जांच भी होनी चाहिए।
जल जीवन मिशन के तहत जिले में 172 काम होने की जानकारी बैठक में दी गई। इन कामों की मौके पर जांच करके यह रिपोर्ट बनाने को कहा गया कि कितने काम पूरे हुए, कितने बाकी हैं और उनकी मौजूदा हालत क्या है। यह रिपोर्ट मुख्य कार्यकारी अधिकारी पेश करेंगे।
धान खरीद केंद्रों के बारे में भी बैठक में पूछा गया। जिला आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि धान खरीद केंद्र आज से शुरू हो गए हैं। अंत में पालकमंत्री नाईक ने निर्देश दिए कि मौजूदा संभावित सूखे को देखते हुए पानी, चारा, खेती और लोगों की बुनियादी जरूरतों के उपाय समय पर पूरे हों और सभी संबंधित विभाग तालमेल से काम करें, ताकि किल्लत की नौबत न आए।
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