वाशिम: सूखे में बचत गट की महिलाओं पर कर्ज वसूली का दबाव रुके, तहसीलदार को ज्ञापन
कारंजा में वंचित बहुजन आघाडी ने तहसीलदार को ज्ञापन देकर बचत समूह की महिलाओं के कर्ज की किस्तों पर राहत और वसूली का कथित दबाव रोकने की मांग की।
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कारंजा में सूखे जैसे हालात की वजह से बचत समूह से जुड़ी महिलाएं आर्थिक संकट में हैं। इन महिलाओं के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनियों और बैंकों के कर्ज की किस्तें भरना मुश्किल हो गया है। इसी बीच वसूली के लिए महिलाओं पर दबाव डाले जाने की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद वंचित बहुजन आघाडी ने महिलाओं के सवाल पर आक्रामक रुख अपनाया। पार्टी का कहना है कि जबरन कर्ज वसूली तुरंत रोकना जरूरी है।
वंचित बहुजन आघाडी की ओर से कहा गया कि हर तरफ सूखा फैला हुआ है। किसान और खेत मजदूर सब परेशानी में हैं और काम न होने से उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। ऐसे में माइक्रो फाइनेंस कंपनी, महिला बचत समूह और ग्राम संघ से लिया हुआ कर्ज चुकाना मुमकिन नहीं है।
वंचित बहुजन आघाडी के जिला सचिव उस्मान भाई गारवे के मार्गदर्शन में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संबंधित महिलाओं से मुलाकात की और उनकी दिक्कतें सुनीं। महिलाओं को हौसला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार से उन्हें न्याय दिलाने की कोशिश की जाएगी।
तहसीलदार को दिए गए ज्ञापन में मांग की गई कि सूखे की हालत को देखते हुए महिलाओं को कर्ज की किस्तों के बारे में राहत दी जाए। साथ ही कर्ज वसूली के नाम पर होने वाला कथित दबाव और परेशान करना बंद किया जाए। ज्ञापन देते समय ग्राम मुरंबी के महिला बचत समूह की महिलाओं के साथ उस्मान गारवे, सुजित भगत, शेषराव मेश्राम, देवराव कटके और दूसरे कार्यकर्ता मौजूद थे।
ज्ञापन में कहा गया कि महिलाएं गांव की हैं और बैंक के कर्मचारियों के डर से अपने पास की चीजें बेचकर भी बैंक का पैसा दे रही हैं। इससे उनके घर का माहौल बिगड़ गया है। उन पर भारी आर्थिक बोझ आ गया है, इसलिए जबरन वसूली रोकना जरूरी है। इसी वजह से ग्राम मुरंबी के महिला बचत समूह की सभी महिलाओं ने एक साथ आकर तहसीलदार को ज्ञापन दिया और कर्जमाफी की मांग की।
इसी बीच संभावित चारा किल्लत को देखते हुए अवैध स्टोरेज, ढुलाई और हस्तांतरण रोकने के लिए कारंजा तहसील के उड़न दस्ते ने कार्रवाई की। कारंजा शहर के अलीनगर और एकतानगर इलाके से 260 टन सोयाबीन का भूसा जब्त किया गया। इसके अलावा तहसील के 10 गट्ठा कारखानों की जांच कर उन्हें उत्पादन बंद करने के नोटिस दिए गए।
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