शनिवार, 7 नवंबर 2026

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सूखाग्रस्त तालुकों में खुलेगा मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष, हर कक्ष में अलग चिकित्सा अधिकारी

सूखाग्रस्त तालुकों में खुलेगा मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष, हर कक्ष में अलग चिकित्सा अधिकारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त तालुकों में मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष शुरू करने को मंजूरी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 नवंबर 2026 को इसका सरकारी आदेश जारी किया।

महाराष्ट्र सरकार ने सूखे की हालत में लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष को अब तालुका स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह फैसला लिया है। हर कक्ष में एक अलग चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति होगी, ताकि सूखाग्रस्त तालुकों के लोगों तक सेहत से जुड़ी सेवाएं ठीक से पहुंच सकें।

राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त इलाकों के जरूरतमंद मरीजों को वक्त पर इलाज दिलाने के लिए यह व्यवस्था तालुका स्तर तक ले जाने को मंजूरी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 नवंबर 2026 को इस बारे में सरकारी आदेश जारी किया। इसके साथ जिला और तालुका स्तर पर स्वास्थ्य समन्वय समितियां भी बनेंगी। यह कक्ष सिर्फ उन्हीं तालुकों में बनेगा, जिन्हें खरीफ मौसम 2026 में ट्रिगर-1 के तहत सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

कक्ष संबंधित तालुका के पंचायत समिति कार्यालय में शुरू होगा। जिलाधिकारी एक अलग चिकित्सा अधिकारी को कक्ष प्रमुख नियुक्त करेंगे। उनकी मदद के लिए क्लर्क और टाइपिस्ट रहेंगे, जबकि जरूरी सुविधाएं खंड विकास अधिकारी को प्राथमिकता से मुहैया करानी होंगी।

मरीजों को उनकी पात्रता के हिसाब से पहले आयुष्मान भारत, महात्मा फुले जन आरोग्य योजना, श्रम विभाग की योजनाओं और धर्मार्थ अस्पतालों से इलाज दिलाया जाएगा। जो मरीज इन योजनाओं के लिए पात्र नहीं होंगे, उनके आवेदन संबद्ध अस्पतालों के जरिए ऑनलाइन प्रणाली पर मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। इसमें कक्ष मार्गदर्शन करेगा।

कक्ष प्रमुख को उपजिला और ग्रामीण अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपकेंद्रों और आशा सेविकाओं के जरिए जरूरतमंद मरीजों को ढूंढना है। कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे, इसकी जिम्मेदारी इस कक्ष पर होगी।

तालुका स्तरीय समिति के अध्यक्ष स्थानीय विधायक होंगे और उपविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह-अध्यक्ष। तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केमिस्ट-ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। कक्ष प्रमुख सदस्य सचिव के तौर पर काम देखेंगे।

जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष प्रभारी मंत्री होंगे, सह-अध्यक्ष जिलाधिकारी और सदस्य सचिव जिला स्वास्थ्य अधिकारी। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र के दो समाजसेवक गैर-सरकारी सदस्य के रूप में इस समिति में रहेंगे।

महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र मेडिकल परिषद, स्थानीय चिकित्सा संगठनों और निजी अस्पतालों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। सूखाग्रस्त इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों को दवा और इलाज मुहैया कराया जाएगा।

दोनों समितियों को महीने में कम से कम दो बैठकें करनी होंगी। दुर्गम इलाकों, बड़ी आबादी वाले और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले इलाकों की पहचान कर वहां प्राथमिकता से उपाय किए जाएंगे। पीने के पानी और गर्मी से जुड़ी बीमारियों की समीक्षा, स्वास्थ्य शिविर, घूमती मेडिकल टीमें और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं की योजना समितियां बनाएंगी। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और डायबिटीज व ब्लड प्रेशर के मरीजों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

तालुका कक्ष रोजमर्रा के कामकाज और शिविरों की रिपोर्ट जिला कक्ष को देगा। जिला कक्ष सभी तालुकों की रिपोर्ट इकट्ठा कर मंत्रालय में मौजूद मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष को सौंपेगा।

मुख्यमंत्री सहायता निधि और धर्मार्थ अस्पताल मदद कक्ष के कक्ष प्रमुख रामेश्वर नाईक ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सोच से सहायता निधि की व्यवस्था को आम लोगों के और करीब लाने के लिए यह फैसला लिया गया है। उनके मुताबिक तालुका स्तर पर कक्ष शुरू होने से सूखाग्रस्त इलाकों के जरूरतमंद मरीज वक्त पर पहचाने जा सकेंगे और उन्हें सही इलाज व आर्थिक मदद दिलाना मुमकिन होगा। स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ और जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री सहायता निधि की मदद के बीच तालमेल बिठाया जाएगा। नाईक ने कहा कि कोई भी जरूरतमंद मरीज पैसे की दिक्कत से इलाज से वंचित न रहे, यही इस पहल का मुख्य मकसद है।

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