7 नवंबर को मेडिकल फिजिक्स डे, मेरी क्युरी के जन्मदिन से जुड़ा है इसका रिश्ता
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हर साल 7 नवंबर को दुनिया भर में इंटरनेशनल मेडिकल फिजिक्स डे यानी अंतरराष्ट्रीय वैद्यकीय भौतिकशास्त्र दिवस मनाया जाता है। इस क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की लगातार मेहनत को सम्मान देने के लिए यह दिन तय किया गया है। इसे काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है।
मेडिकल फिजिक्स भौतिकशास्त्र के सिद्धांतों और तरीकों को इलाज में इस्तेमाल करने वाला एक उन्नत क्षेत्र है। आज के दौर में मरीजों की बीमारी की सटीक पहचान करने, उनका असरदार इलाज करने और रेडिएशन के खतरों से बचाव रखने में मेडिकल फिजिसिस्ट की भूमिका बहुत अहम मानी जाती है। इस शास्त्र ने इंसान की सेहत को ज्यादा सुरक्षित बनाने में बड़ा रोल निभाया है।
अस्पतालों में जो एक्स-रे और एमआरआई स्कैन होते हैं, वे इसी शास्त्र के सहारे चलते हैं। कैंसर के इलाज में बेहद जरूरी रेडिएशन थेरेपी भी इसी पर टिकी है। इन आधुनिक मशीनों से शरीर के अंदर के बारीक हिस्सों की सटीक जांच हो पाती है। कहा जाता है कि इसी वजह से लाखों लोगों की जान बचाना मुमकिन हुआ है। विज्ञान और चिकित्सा का यह मेल इंसानी जिंदगी को आसान बना रहा है।
इस दिन को मनाने के पीछे एक बड़ी ऐतिहासिक वजह है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने 2013 में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर मनाने का फैसला किया था। 7 नवंबर की तारीख इसलिए चुनी गई कि 1867 में इसी दिन मेरी क्युरी (Marie Sklodowska-Curie) का जन्म हुआ था। मेरी क्युरी वही महान वैज्ञानिक हैं जिन्होंने रेडियम और पोलोनियम की खोज की।
रेडियोएक्टिविटी के क्षेत्र में मेरी क्युरी का क्रांतिकारी शोध मेडिकल फिजिक्स की बुनियाद बना। उनके इसी काम और उनकी याद को सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन को चुना गया। इस दिन दुनिया भर में अलग-अलग वर्कशॉप, वैज्ञानिक चर्चा सत्र और जागरूकता कार्यक्रम होते हैं, ताकि आम लोग इस क्षेत्र की अहमियत समझ सकें।
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