पटाखों के डिब्बों पर दी जानकारी पर सवाल, नकली QR कोड और बेरियम का दावा, आवाज फाउंडेशन ने चेताया
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
आवाज फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि मुंबई में बिक रहे पटाखों के डिब्बों पर दी जानकारी भरोसे लायक नहीं है। कुछ में QR कोड नहीं है और जांच में बेरियम मिला।
मुंबई में बिक रहे पटाखों के डिब्बों पर छपी जानकारी ही भरोसे लायक नहीं है। यह गंभीर मुद्दा आवाज फाउंडेशन ने उठाया है। नियम के मुताबिक पटाखों के पैकेट पर उनकी आवाज का स्तर, रासायनिक घटक और QR कोड की जानकारी देना जरूरी है, फिर भी बाजार में ऐसे डिब्बे मिल रहे हैं जिन पर यह जानकारी भरोसेमंद नहीं है।
फाउंडेशन के मुताबिक कुछ पैकेटों पर QR कोड है ही नहीं, जबकि कुछ पर नकली QR कोड मिले हैं। इतना ही नहीं, फाउंडेशन का दावा है कि अलग से कराई गई रासायनिक जांच में बेरियम का अंश भी मिला है। बेरियम पर पाबंदी है और यह सेहत के लिए खतरनाक है। इसलिए सवाल सिर्फ पटाखों की आवाज का नहीं रह गया है। उनमें मौजूद रसायनों और लेबल पर लिखी जानकारी की सच्चाई पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आवाज फाउंडेशन की सुमैरा अब्दुलअली ने शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर इस ओर ध्यान दिलाया है। मुंबई के बाजार से 3 नवंबर को खरीदे गए पटाखों की आवाज का स्तर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से 5 नवंबर को जांचा गया। इन जांचों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जा चुकी है। फाउंडेशन 2012 से पटाखों में मौजूद रसायनों और भारी धातुओं की अलग से जांच कराता आ रहा है। उसका दावा है कि असल जांच के नतीजों और पैकेटों पर लिखे रासायनिक घटकों में फर्क है।
आवाज के मामले में तस्वीर कुछ बेहतर हुई है। 2006 में पटाखों की जांच के दौरान आवाज 144.9 डेसिबल तक दर्ज की गई थी, जबकि 2026 में यह अधिकतम स्तर घटकर 93 डेसिबल रह गया है। लेकिन फाउंडेशन का कहना है कि आवाज कम होने से पटाखे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते।
फाउंडेशन ने यह भी साफ किया है कि मुंबई के 110 शांति क्षेत्रों में पटाखे फोड़ने की मनाही है। इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी क्षेत्र में पटाखे नहीं फोड़े जा सकते। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए फाउंडेशन ने मांग की है कि पटाखों की बिक्री से लेकर असल इस्तेमाल तक के नियमों पर सख्ती से अमल हो और नियम तोड़ने वाले पटाखों पर कार्रवाई की जाए। पत्र में मुंबई की हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने का डर भी जताया गया है।
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