श्रीलंका में हनुमान के मंदिर: रामायण ट्रेल पर आस्था और हरे-भरे पहाड़ों का संगम
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श्रीलंका के रामायण ट्रेल में हनुमान से जुड़े कई धार्मिक स्थल आते हैं, जहां श्रद्धा के साथ कुदरती खूबसूरती भी देखने को मिलती है।
श्रीलंका के रामायण ट्रेल (Ramayana Trail) में हनुमान से जुड़े कई धार्मिक स्थल आते हैं। हिंदू महाकाव्य रामायण में श्रीलंका का इतिहास और उसकी भौगोलिक जगहें बेहद अहम मानी जाती हैं। माता सीता की खोज में प्रभु श्रीराम के परमभक्त हनुमान समुद्र के ऊपर से उड़कर लंका नगरी पहुंचे थे। उन्होंने जहां-जहां कदम रखा, वे जगहें आज श्रीलंका में पवित्र तीर्थ बन चुकी हैं। ये मंदिर सिर्फ आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सैलानियों को अपनी ओर खींचने वाली खूबसूरत जगहें भी हैं।
इनमें सबसे पहले रामबोडा का श्री भक्त हनुमान मंदिर (Shri Bhakta Hanuman Temple) आता है। यह श्रीलंका के मध्य प्रांत के रामबोडा इलाके में, कैंडी-नुवारा एलिया हाईवे पर एक ऊंची टेकरी पर बसा है। स्थानीय मान्यता है कि सीता की खोज में निकले हनुमान ने श्रीलंका की जमीन पर पहली बार यहीं कदम रखा था और यहीं थोड़ी देर आराम किया था।
तमिल भाषा में रामबोडा को 'रामपडई' भी कहते हैं, जिसका मतलब है 'राम की सेना'। माना जाता है कि रावण के खिलाफ जंग से पहले श्रीराम ने अपनी सेना यहीं इकट्ठा की थी।
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत भगवान हनुमान की भव्य मूर्ति है। यह काले ग्रेनाइट पत्थर से बनी है और इसकी ऊंचाई 16 से 18 फुट है। पूरे श्रीलंका में हनुमान की यह सबसे बड़ी मूर्ति है।
मंदिर कोतमले जलाशय (Kotmale Reservoir) के ठीक ऊपर, पहाड़ों की गोद में है। यहां से चारों तरफ हरे-भरे चाय के बागान और धुंध की चादर ओढ़े पहाड़ बहुत सुंदर दिखते हैं। इस भव्य आधुनिक मंदिर को चिन्मय मिशन श्रीलंका ने बनवाया और 1999 से 2001 के बीच इसकी स्थापना हुई।
नुवारा एलिया के पास मशहूर 'सीता अम्मन मंदिर' है, जिसे रामायण काल की अशोक वाटिका माना जाता है। यहां भी हनुमान का बड़ा असर दिखता है। मंदिर के पास बहती नदी के किनारे चट्टानों पर हनुमान के विशाल पैरों के निशान (Footprints) आज भी देखे जा सकते हैं। मान्यता है कि हनुमान ने सीता से मिलकर उन्हें श्रीराम की अंगूठी दी थी, तब उन्होंने अपना विराट रूप दिखाया था और उसी के दबाव से चट्टान पर ये निशान बन गए।
कोलंबो के पास 'माउंट लैविनिया' में श्री पंचमुखी अंजनेयर कोविल है। यह श्रीलंका का अकेला मंदिर है, जहां हनुमान के पंचमुखी यानी पांच मुंह वाले रूप की पूजा होती है। इसके अलावा पूरी दुनिया में सिर्फ इसी हनुमान मंदिर के लिए अलग लकड़ी का रथ (Chariot) है, जो उत्सव के दौरान जुलूस में इस्तेमाल होता है।
रामायण काल के कुछ और सबूत भी बताए जाते हैं। लक्ष्मण जब जंग में बेहोश हो गए थे, तब हनुमान द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाए थे। उसका एक टुकड़ा श्रीलंका में जिस जगह गिरा, वह आज 'रितीगला' और 'हाकागाला बॉटनिकल गार्डन' के नाम से जाना जाता है। यहां के पेड़-पौधे और औषधियां आसपास के जंगलों से पूरी तरह अलग हैं।
उस्सनगोडा (Ussangoda) के बारे में कहा जाता है कि हनुमान ने अपनी जलती पूंछ से रावण की लंका जलाई थी और जलने वाले इलाके की मिट्टी आज भी काली और जली हुई दिखती है। वही जगह उस्सनगोडा राष्ट्रीय उद्यान है।
(धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई जैसे विषयों के लेख सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।)
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