शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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शहरी सहकारी बैंकों में MSME लोन 24 फीसदी CAGR से बढ़े, डिजिटल सुविधाओं पर जोर

शहरी सहकारी बैंकों में MSME लोन 24 फीसदी CAGR से बढ़े, डिजिटल सुविधाओं पर जोर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

NUCFDC के प्रभात चतुर्वेदी के मुताबिक शहरी सहकारी बैंकों का CRAR 18 फीसदी है और MSME कर्ज बाँटने ने 24 फीसदी CAGR दर्ज किया है।

देश की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्योग, कारोबार और रोजगार के नए मौके बन रहे हैं, तो वहां आसान कर्ज की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में शहरी सहकारी बैंकों, यानी Urban Co-operative Banks (UCBs) की भूमिका फिर अहम हो गई है। स्थानीय व्यापारी, छोटे उद्यमी और छोटे कारोबारी अपनी जरूरत के हिसाब से कर्ज पाने के लिए इन बैंकों पर भरोसा कर सकते हैं।

नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NUCFDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभात चतुर्वेदी का मानना है कि यह सेक्टर आर्थिक अनुशासन और नियामक सुधारों के रास्ते पर ज्यादा मजबूत होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बैंकों के बदलाव, आर्थिक स्थिरता, कर्ज वितरण और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर बात की।

शहरी सहकारी बैंकों की पहचान स्थानीय ग्राहकों से करीबी रिश्ते और जरूरत के मुताबिक कर्ज देने की रही है। बड़े कमर्शियल बैंकों की तय कर्ज जांच प्रक्रिया में छोटे कारोबारियों और अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमियों को अक्सर दिक्कत आती है। स्थानीय बाजार को जानने वाले सहकारी बैंक ऐसे लोगों के काम आते हैं। लेकिन बदलते माहौल में सिर्फ ग्राहकों से रिश्ता काफी नहीं है। कामकाज में पारदर्शिता, असरदार जोखिम प्रबंधन और नियामक नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है। इसीलिए इन बैंकों में प्रोफेशनल मैनेजमेंट और संस्थागत गवर्नेंस को ज्यादा अहमियत दी जा रही है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) शहरी सहकारी बैंकों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग और अनुपालन प्रक्रियाओं पर जोर दे रहा है। संचालक मंडल के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों को क्षेत्रीय भाषाओं में ट्रेनिंग देने पर भी ध्यान है। इससे फैसले लेने, जोखिम संभालने और नियम लागू करने में मदद मिल सकती है। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा, ग्राहक संरक्षण और अंदरूनी नियंत्रण भी अहम होते जा रहे हैं।

आर्थिक हालत परखते वक्त पूंजी की उपलब्धता और डूबे हुए कर्जों का अनुपात खास पैमाने माने जाते हैं। प्रभात चतुर्वेदी के बताए आंकड़ों के मुताबिक इस सेक्टर का औसत कैपिटल एडेक्वेसी रेशो (CRAR) 18 फीसदी है। यह अनुपात बताता है कि संभावित आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए बैंकों के पास कितनी पूंजी है। इसके साथ ही ग्रॉस NPA करीब 6 फीसदी और नेट NPA 1 फीसदी से कम बताया गया है।

सेक्टर की जमाएं 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हैं, जबकि कर्ज और अग्रिम का आंकड़ा करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये है। इन आंकड़ों का आधिकारिक संदर्भ और अवधि RBI की संबंधित रिपोर्ट से जांचना जरूरी है।

MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र देश में रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र है। कई छोटे उद्यमियों के पास बड़े बैंकों के कर्ज के लिए जरूरी सारे औपचारिक कागजात नहीं होते, इसलिए कर्ज मिलने में दिक्कत आ सकती है। शहरी सहकारी बैंक स्थानीय कारोबार की हालत, लेनदेन के इतिहास और ग्राहकों से रिश्ते के आधार पर कर्ज का फैसला कर सकते हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में इन बैंकों के स्थानीय कारोबारियों से मजबूत संबंध हैं।

प्रभात चतुर्वेदी की दी जानकारी के अनुसार इस सेक्टर के MSME कर्ज वितरण ने 24 फीसदी का चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर (CAGR) दर्ज किया है। होम लोन में करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इन आंकड़ों की अवधि और गणना का आधार साफ होना चाहिए।

बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ाने के लिए नियामक स्तर पर कुछ नियम बदले गए हैं। इनमें व्यक्तिगत होम लोन की सीमा 3 करोड़ रुपये तक बढ़ाना, गोल्ड लोन पर लगी सीमा हटाना और योजना के मुताबिक शाखाओं के विस्तार की इजाजत देना शामिल है। इससे पात्र ग्राहकों को ज्यादा कर्ज के विकल्प मिल सकते हैं, लेकिन असल में कर्ज मंजूर होना संबंधित बैंक के नियमों, ग्राहक की चुकाने की क्षमता और लागू नियामक शर्तों पर निर्भर करता है।

इन बैंकों के सामने एक और बड़ी चुनौती आधुनिक तकनीक का बढ़ता खर्च है। अपने दम पर डिजिटल सिस्टम खड़ा करना, सुरक्षित पेमेंट सुविधा देना और तकनीकी रखरखाव करना छोटे बैंकों के लिए महंगा पड़ सकता है। इसका हल NUCFDC जैसी संस्थाओं के जरिए साझा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में देखा जा रहा है। इससे छोटे बैंक कम खर्च में आधुनिक डिजिटल सेवाएं दे सकेंगे और ग्राहकों को ज्यादा सुविधाजनक बैंकिंग अनुभव मिलने की उम्मीद है।

आगे इस प्रगति को लंबे समय की कामयाबी में बदलने के लिए कर्ज वसूली का अनुशासन बनाए रखना, डिजिटल सुरक्षा मजबूत करना और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। अगर ये बैंक स्थानीय भरोसे और आधुनिक बैंकिंग तकनीक को जोड़ पाए, तो छोटे उद्यमी औपचारिक कर्ज व्यवस्था से जुड़ सकते हैं और टियर-2 व टियर-3 शहरों में कारोबार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास में ये बैंक अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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