सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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सेना को मिलेंगे हल्के रडार, BEL के साथ करीब 770 करोड़ रुपये का करार

रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ करीब 770 करोड़ रुपये में आधुनिक हल्के रडार खरीदने का करार किया है।

भारतीय सेना की निगरानी की ताकत अब और बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने आधुनिक क्षमता वाले हल्के रडार खरीदने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब 770 करोड़ रुपये का करार किया है। इन रडार की मदद से दुश्मन के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ छोटे और सूक्ष्म ड्रोन की हरकतों पर भी नजर रखी जा सकेगी।

यह करार 21 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुआ। इस मौके पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मौजूद थे। इन रडार से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई टारगेट का पता लगाना और उन पर नजर रखना मुमकिन होगा।

रडार में हवाई टारगेट को खोजने और उनका पीछा करने की क्षमता होगी। साथ ही खतरे के स्तर के हिसाब से उन्हें प्राथमिकता भी दी जा सकेगी। इन्हें इस तरह विकसित किया गया है कि वे लड़ाकू विमान जितने आकार के टारगेट के साथ-साथ छोटे और सूक्ष्म ड्रोन को भी पकड़ सकें।

आज की जंग में बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम का इस्तेमाल बड़ी चुनौती बन गया है। छोटे ड्रोन का इस्तेमाल जासूसी के लिए भी हो सकता है और हमलों के लिए भी। ऐसे में आधुनिक रडार से हवाई खतरों की वक्त रहते पहचान करना और उसके हिसाब से बचाव की कार्रवाई की तैयारी करना सेना के लिए आसान होगा।

इन रडार की एक और अहम खूबी हवाई टारगेट की प्राथमिकता तय करना है। इससे एक साथ कई टारगेट पर नजर रखते वक्त ज्यादा बड़े खतरों पर ध्यान लगाया जा सकेगा।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह करार देश के हवाई रक्षा सिस्टम के स्वदेशीकरण की दिशा में अहम पड़ाव है। उम्मीद है कि इससे देश के भीतर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी रक्षा उत्पादन की सप्लाई चेन में मौका मिलने की उम्मीद है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में भी इस खरीद को अहम माना जा रहा है। इन कोशिशों का मकसद देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ाना, विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाना और ऐसा आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग खड़ा करना है जो दुनिया भर में मुकाबला कर सके।

करीब 770 करोड़ रुपये के इस करार से भारतीय सेना की हवाई निगरानी की क्षमता मजबूत होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही देश में आधुनिक रडार बनाने के काम को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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