नई कारों के सेफ्टी नियम बदले: क्रैश टेस्ट से इमोबिलाइजर तक सब पर नए नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 19 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना में कारों के लिए नए सेफ्टी नियम जारी किए हैं, जो 2027 से 2032 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।
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देश में कारों को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने गाड़ियों के सेफ्टी नियमों में अहम बदलाव का ऐलान किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 19 अक्टूबर 2026 को एक अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक क्रैश टेस्ट, पैदल चलने वालों की सुरक्षा, पीछे से टक्कर लगने पर बचाव और चोरी रोकने वाले इमोबिलाइजर समेत कई चीजों पर नए नियम आएंगे। ये बदलाव एक साथ नहीं, बल्कि 2027 से 2032 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।
सबसे पहले इमोबिलाइजर की बात। M1 श्रेणी की पैसेंजर कारों में 1 अक्टूबर 2027 से इमोबिलाइजर लगाना जरूरी हो जाएगा। यह चोरी रोकने वाला सिस्टम है, जो बिना इजाजत के कार का इंजन चालू होने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा पेडल्स के डिजाइन और काम करने के तरीके से जुड़े सुधरे हुए नियम नए मॉडलों के लिए 1 अप्रैल 2028 से लागू होंगे। इन सारे बदलावों का मकसद गाड़ियों के सुरक्षा मानक मजबूत करना है।
अब क्रैश टेस्ट के नियम देखें। कार के सामने के हिस्से में ऑफसेट टक्कर और बगल से लगने वाली टक्कर में सवारियों की सुरक्षा परखने के लिए सुधरे हुए टेस्ट आएंगे। नए मॉडलों के लिए ये टेस्ट 1 अक्टूबर 2027 से लागू होंगे, जबकि नियमों के दायरे में आने वाले सभी मॉडलों के लिए 1 अक्टूबर 2028 से।
सीटबेल्ट और एयरबैग जैसे सवारियों की हिफाजत करने वाले सिस्टम पर ध्यान देने वाला अलग फ्रंटल क्रैश टेस्ट नए मॉडलों के लिए 1 अक्टूबर 2029 से और संबंधित सभी मॉडलों के लिए 1 अक्टूबर 2031 से लागू होगा।
पीछे से टक्कर लगने पर फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन कितने सुरक्षित रहते हैं, इसके लिए भी नियम तय हुए हैं। संबंधित मानकों के दायरे में आने वाले सभी मॉडलों के लिए ये 1 अप्रैल 2029 से लागू होंगे। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बैटरी और ड्राइव सिस्टम की सुरक्षा के लिहाज से यह बदलाव अहम साबित हो सकता है।
हादसों में पैदल चलने वालों और दूसरे कमजोर सड़क इस्तेमाल करने वालों को लगने वाली चोट घटाने के लिए सुधरे नियम नए मॉडलों पर 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे। उसके आगे 1 अक्टूबर 2032 से पैरों की सुरक्षा की जांच के लिए FlexPLI नाम का खास उपकरण इस्तेमाल करना जरूरी होगा।
हादसे के वक्त गाड़ी से जुड़ा डेटा दर्ज करने वाले इवेंट डेटा रिकॉर्डर की वाहन-मंजूरी से जुड़ी शर्तें 1 अक्टूबर 2029 से लागू होंगी। इससे हादसे की जानकारी समझने में मदद मिल सकती है।
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