सात दिन में सात आरोपी गिरफ्तार, चार टीमों ने सुलझाए साइबर ठगी के चार मामले
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नागपुर सिटी साइबर पुलिस की चार टीमों ने कई शहरों में कार्रवाई कर वॉइस क्लोनिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों का पता लगाया।
नागपुर सिटी साइबर पुलिस ने सिर्फ सात दिन में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चार अलग-अलग टीमों ने कई शहरों में एक साथ चलाए गए ऑपरेशन के जरिए की।
इन ऑपरेशनों में साइबर ठगी के चार मामलों का पता चला, जिनमें वॉइस क्लोनिंग, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और WhatsApp पर किसी और का रूप धरकर ठगी शामिल है। जांच में कुछ आरोपियों के हॉन्ग कॉन्ग और दुबई से चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से संदिग्ध तार होने की बात भी सामने आई है।
पहले मामले में नागपुर के एक निवासी से कथित तौर पर 50 लाख रुपये की ठगी हुई। आरोप है कि साइबर ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाली वॉइस क्लोनिंग तकनीक से समाज की एक जानी-मानी हस्ती की आवाज की नकल की। उसी आवाज से कथित तौर पर इमरजेंसी जैसे हालात बनाए गए और पैसे मांगे गए। पुलिस ने आरोपी का सुराग इंदौर, मध्य प्रदेश में लगाया और उसे 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। उसके पास से दो मोबाइल फोन जब्त हुए।
दूसरा मामला बजाज नगर के एक निवासी का है, जिससे कथित तौर पर करीब 32.87 करोड़ रुपये की ठगी हुई। बताया गया है कि उन्हें Instagram पर फर्जी निवेश विज्ञापनों के जरिए फंसाया गया और फिर एक फर्जी ट्रेडिंग चैनल में जोड़ दिया गया, जहां अच्छे मुनाफे का वादा किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने मुंबई क्षेत्र से दो और आरोपियों को 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। जांच करने वालों को कथित तौर पर हॉन्ग कॉन्ग और दुबई से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से संदिग्ध संबंध मिले हैं।
पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट टोकन, बैंक चेकबुक, डेबिट कार्ड और पहचान पत्र जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए। जब्त सामान की कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई है।
तीसरा मामला डिजिटल अरेस्ट का है। नागपुर के एक निवासी को कथित तौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA के अधिकारी बनकर धमकाया गया। आरोप है कि ठगों ने कहा कि उनका आतंकियों से संबंध है, और डराने के लिए फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल का इस्तेमाल किया। डिजिटल अरेस्ट के बहाने उनसे कथित तौर पर RTGS के जरिए कई बैंक खातों में 1.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इस मामले में दो आरोपियों को 28 अक्टूबर को मुंबई से गिरफ्तार किया गया।
चौथे मामले में जरीपटका की यूनियन बैंक शाखा के मैनेजर से कथित तौर पर 9.5 लाख रुपये की ठगी हुई। बताया गया है कि खुद को एक मोटर कंपनी का कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया, WhatsApp पर फर्जी APK फाइल भेजी और उन्हें RTGS से पैसे भेजने के लिए राजी कर लिया। आरोपी का पता कानपुर, उत्तर प्रदेश में चला और उसे 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।
चारों मामलों में कथित तौर पर कुल करीब 34.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
ये ऑपरेशन नागपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुए, जिनमें पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल, जॉइंट कमिश्नर नवीनचंद्र रेड्डी और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
इस कार्रवाई से दिखता है कि साइबर अपराध कितना पेचीदा होता जा रहा है। अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तरीके से किसी का रूप धरने, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।
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