सांसद प्रतिभा धानोरकर बोलीं, वोट बचेगा तभी देश और संविधान बचेगा
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चंद्रपुर में बहुजन विचार मंच के कोजागिरी स्नेहमिलन समारोह में सांसद प्रतिभा धानोरकर ने बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील की।
चंद्रपुर में बहुजन विचार मंच ने कोजागिरी स्नेहमिलन समारोह रखा था। इसी कार्यक्रम में सांसद प्रतिभा धानोरकर ने बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, "अगर कल वोट बचा तभी देश और संविधान बचेगा।" कार्यक्रम में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी, पार्षद और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद थे।
प्रतिभा धानोरकर ने कहा कि देश और राज्य में इस समय बेहद चिंताजनक और अराजकता वाला माहौल बना हुआ है। उनके मुताबिक लोकतंत्र के मूल्यों को पैरों तले रौंदा जा रहा है और बहुजनों के हक पर डाका डाला जा रहा है। यह बात उन्होंने मंच से बोलते हुए कही।
आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना की। धानोरकर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार बहुत तानाशाही तरीके से आरक्षण और बहुजनों के अधिकारों पर चोट कर रही है। उनके कहने के मुताबिक पहले खुले वर्ग में मेरिट के हिसाब से सबको बराबर मौका मिलता था, लेकिन इस सरकार के दौरान इन नियमों में पिछले दरवाजे से अन्यायपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये नीतियां बहुजन नौजवानों के भविष्य पर वार करने वाली हैं। इसके खिलाफ सभी भेदभाव, जाति और उपजाति को किनारे रखकर एकजुट होकर मजबूत वज्रमुष्टि बांधने और सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध जताने की सख्त जरूरत है, ऐसा उन्होंने बताया।
विधायक सुधाकर अडबाले ने बहुजन समाज के मौजूदा हालात पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि हम बहुजन के तौर पर साथ रहने के बजाय जाति और उपजातियों में बिखर गए हैं। संगठित न होने की वजह से हम पर कितना और कैसा अन्याय हो रहा है, इसका एहसास भी हमें नहीं रहा। अडबाले के मुताबिक अपने हक की रक्षा के लिए हम मजबूती से आवाज उठाने में नाकाम रहे हैं। इसलिए अगर स्वाभिमान से जीना है तो जाति की दीवारें दफनाकर बहुजन के रूप में एक छत के नीचे आने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
दिलीप चौधरी ने पुराने संघर्ष को याद करते हुए कहा कि हम इतिहास को भुला नहीं सकते। पहले जिस तरह शोषितों पर अन्याय और अत्याचार होते थे, आज उसका रूप भले बदल गया हो, पर शोषण की सोच वही है। उन्होंने कहा कि संविधान में होने वाले अनधिकृत बदलाव और देश को खतरे में डालने वाली नीतियों को रोकने में बहुजन विचार मंच जैसे मंच बहुत अहम भूमिका निभाएंगे।
सूर्यकांत खनके ने कहा कि बहुजन विचार मंच के जरिए समाज के सभी तबकों को साथ लाने की यह ईमानदार कोशिश है। उनका कहना था कि जब तक बहुजन समाज अपने जायज हक के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष नहीं करता, तब तक सत्ताधारी और प्रशासन उसकी समस्याओं को नजरअंदाज करते रहेंगे। खनके के मुताबिक संविधान से मिले अधिकारों को सुरक्षित रखने, आरक्षण की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ी का भविष्य बचाने के लिए अब तीव्र संघर्ष के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक देवराव भांडेकर, महाराष्ट्र अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अनिरुद्ध वनकर, कुणबी समाज के अध्यक्ष मालेकर, बहुजन विचार मंच के संयोजक सूर्यकांत खनके, डॉ. दिलीप कांबळे, दल नेता सुरेंद्र अडबाले, महिला कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष कुंदा जेणेकर, ओबीसी ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्यामकांत थेरे, अल्पसंख्यक कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोहेल रजा, महिला कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष चंदा वैरागडे, चंद्रपुर कांग्रेस तहसील अध्यक्ष अनिल नरुले, डॉ. संजय घंटे, बालवीर सिंग गुजर और अजगर अली प्रमुख रूप से मौजूद थे। संचालन पूर्व पार्षद गोपाल अमृतकर ने किया, जबकि प्रोफेशनल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रामकृष्ण कोंड्रा ने सबका आभार माना।
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