संभाजीनगर में एक ही प्लॉट की दो बार रजिस्ट्री, चार लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
छत्रपति संभाजीनगर में 2021 में बेटे के नाम रजिस्टर्ड हुए प्लॉट की 2023 में दूसरे के नाम फिर रजिस्ट्री होने का आरोप, सिटीचौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
छत्रपति संभाजीनगर में एक ही प्लॉट की दो बार रजिस्ट्री कराकर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जो प्लॉट बेचा जा चुका था और जिसका कब्जा भी खरीदने वाले के पास था, उसका 2021 में बेटे के नाम रजिस्टर्ड बैनामा करके दिए जाने के बाद 2023 में किसी और के नाम पर फिर से रजिस्ट्री कर दी गई। यह सब 18 अगस्त 2021 से 17 जनवरी 2023 के बीच हुआ।
इस मामले में सिटीचौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों के नाम तुलसाबाई पांडुरंग प्रधान (तक्षशिलानगर, सुतगिरणी मोदा), विजय रमेश किर्तिकर (संसारनगर, क्रांतिचौक), गणेश चंबूलाल परदेशी (गड्डीगुडम, छावनी) और राजू पांडुरंग प्रधान (रहनेवाले तक्षशिलानगर, मोंडा) बताए गए हैं। शिकायत पौर्णिमा विश्वनाथ हिवराले (48, रहनेवाली हाईकोर्ट कॉलनी, सातारा परिसर) ने दी है।
शिकायत के मुताबिक हिवराले के पिता ने क्रांतिचौक इलाके में कर्मवीर दादासाहेब गायकवाड पिछड़ावर्गीय गृह निर्माण संस्था शुरू की थी। उनके माता-पिता ने अपनी जान-पहचान की महिला तुलसाबाई प्रधान के नाम सोसायटी का सिटी सर्वे नंबर 17952 का प्लॉट क्रमांक 17/1, क्षेत्रफल 41.82 वर्ग मीटर, अलॉट किया था। शिकायतकर्ता ने यह प्लॉट 13 जुलाई 2004 को तुलसाबाई से खरीदने का तय किया था। हिवराले ने शिकायत में लिखा है कि उस वक्त एक लाख रुपये का सौदा हुआ और प्लॉट का कब्जा भी दे दिया गया।
पैसे कई बार में दिए गए। 13 जुलाई 2004 को 19 हजार रुपये, 13 मई 2008 को 12 हजार रुपये, 27 जनवरी 2009 को 12 हजार रुपये और 7 जुलाई 2011 को 50 हजार रुपये नकद दिए गए। इन लेन-देन के वक्त स्टैम्प पेपर पर करारनामे भी किए गए। शिकायत में दावा किया गया है कि 2015 में तुलसाबाई प्रधान ने प्लॉट के लिए दस लाख रुपये मांगे, और उसके बाद बाकी रकम भी वक्त-वक्त पर नकद दे दी गई।
सारी रकम के बाद 18 अगस्त 2021 को प्लॉट का रजिस्टर्ड बैनामा हुआ। हिवराले ने यह बैनामा अपने बेटे मिथिलेश सुरेश जोगदंडे के नाम पर करवाया। लेकिन उनकी बेटी डिलीवरी के लिए पुणे गई थी और उसके साथ रहने के लिए उन्हें भी पुणे जाना पड़ा, इसलिए आगे की प्रक्रिया रह गई।
वापस आने के बाद बेटे के नाम संपत्ति पत्रक पर नाम चढ़ाने के लिए वे जिलाधिकारी कार्यालय गईं। वहां उन्हें पता चला कि वह प्रॉपर्टी विजय कीर्तिकर के नाम पर है। इसके बाद उन्होंने संपत्ति पत्रक की कॉपी निकलवाई और उप-निबंधक कार्यालय से विजय कीर्तिकर के बैनामे की कॉपी भी ली। उससे सामने आया कि 17 जनवरी 2023 को दस्तावेज़ क्रमांक 504/2023 के तहत उसी प्लॉट की रजिस्ट्री विजय कीर्तिकर के नाम पर हुई है।
धोखाधड़ी का पता चलने पर हिवराले सिटीचौक पुलिस स्टेशन पहुंचीं और उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। मामले की आगे की जांच उपनिरीक्षक भागवत मुठाल कर रहे हैं।