मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:46 IST

कल्याण: 176 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, श्रीकांत शितोळे समेत चार पर खडकपाड़ा में केस

कल्याण पश्चिम के चिकनघर में टायकून गोल्ड एवेन्यू पुनर्विकास प्रोजेक्ट को लेकर खडकपाड़ा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ है। बिल्डर पक्ष ने आरोप खारिज किए हैं।

कल्याण: 176 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, श्रीकांत शितोळे समेत चार पर खडकपाड़ा में केस
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कल्याण पश्चिम के चिकनघर इलाके में चल रहे टायकून गोल्ड एवेन्यू पुनर्विकास प्रोजेक्ट में 176 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। इस मामले में डेवलपर श्रीकांत शितोळे, चेतन सराफ, महेश गोसावी और दूसरे संबंधित लोगों के खिलाफ खडकपाड़ा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। शिकायत करने वालों का आरोप है कि शांतीदूत सहकारी गृहनिर्माण संस्था के 184 सदस्यों और सैकड़ों फ्लैट खरीदारों से बड़ी रकम ली गई, लेकिन फ्लैटों का कब्जा किसी को नहीं दिया गया। दूसरी तरफ श्रीकांत शितोळे ने सारे आरोप खारिज कर दिए हैं और 176 करोड़ के घोटाले के दावे को झूठा बताया है।

शिकायत के मुताबिक चिकनघर की शांतीदूत सहकारी गृहनिर्माण संस्था के पुनर्विकास का काम टायकून अवंती प्रोजेक्ट्स एलएलपी को सौंपा गया था। शिकायतकर्ता नंदा प्रभाकर म्हात्रे ने शिकायत में लिखा है कि उन्होंने 2021 में करीब 39 लाख रुपये भरकर फ्लैट खरीदा था। करार के हिसाब से जुलाई 2025 तक उन्हें फ्लैट का कब्जा मिलना था। दावा है कि अब तक कब्जा नहीं मिला है।

शिकायतकर्ताओं के कहने के मुताबिक प्रोजेक्ट की बिल्डिंग सिर्फ दसवीं मंजिल तक बनी है और 2022 से काम पूरी तरह बंद पड़ा है। शिकायत में आरोप है कि डेवलपरों ने फ्लैट खरीदारों से बड़ी रकम ली, फिर भी एक भी खरीदार को कब्जा नहीं दिया गया। एक और गंभीर आरोप यह है कि कुलमुखत्यारपत्र, यानी पावर ऑफ अटॉर्नी, का इस्तेमाल करके सोसायटी की जमीन बैंक में गिरवी रख दी गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संस्था के 184 सदस्यों और सैकड़ों फ्लैट खरीदारों से मिलाकर 176 करोड़ रुपये से ज्यादा लिए गए।

खडकपाड़ा पुलिस स्टेशन में यह केस BNS की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस निरीक्षक प्रेमनाथ शेटे ढोळे के मार्गदर्शन में मामले की जांच चल रही है। पुलिस फ्लैट खरीदारों से ली गई रकम, पैसों के लेनदेन और जमीन गिरवी रखने के आरोप की पड़ताल कर रही है।

उधर टायकून्स समूह ने सारे आरोप खारिज किए हैं। समूह का कहना है कि शिकायतकर्ता ने प्रोजेक्ट में करीब 40 लाख रुपये का रिहायशी फ्लैट का सौदा किया था और 176 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा पूरी तरह गलत है। समूह के मुताबिक चिकनघर में म्हाडा के प्रोजेक्ट नीतिगत खामियों की वजह से काफी देर से चल रहे हैं, जिससे समूह को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। इसी वजह से ग्राहकों को घरों का कब्जा देने में देरी हुई। समूह ने यह भी कहा है कि प्रोजेक्ट रेरा प्राधिकरण में रजिस्टर्ड है, इसलिए ग्राहक रेरा प्राधिकरण के पास अपनी शिकायत ले जाएं।

टायकून्स समूह ने यह आरोप भी लगाया है कि कल्याण के कुछ स्थानीय विरोधी और नेता प्रोजेक्ट की दिक्कतों का फायदा उठाकर डेवलपरों के खिलाफ केस दर्ज करा रहे हैं। समूह का आरोप है कि गिरीश पवार, नरेंद्र पवार और कुछ हस्तकों ने समूह को परेशान करके प्रोजेक्ट हड़पने की साजिश रची। समूह का दावा है कि केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट को फंड देने की आखिरी मंजूरी मिल चुकी है, इसके बावजूद कुछ लोगों और ग्राहकों को साथ लेकर विरोध किया जा रहा है। समूह के मुताबिक केस दर्ज कराकर श्रीकांत शितोळे पर दबाव बनाने और बातचीत के जरिए प्रोजेक्ट हथियाने की कोशिश हो रही है। समूह ने कहा है कि इन आरोपों के बारे में उसके पास पक्के सबूत हैं।

समूह ने साफ किया है कि वह पुलिस की जांच में पूरा सहयोग करेगा। उसका कहना है कि इस मामले का असर प्रोजेक्ट के काम पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी फ्लैटधारकों और ग्राहकों के हित में प्रोजेक्ट पूरा करने की कोशिश जारी रहेगी। पुलिस की जांच अभी चल रही है। धोखाधड़ी के आरोपों के पीछे के लेनदेन, प्रोजेक्ट की मौजूदा हालत, जमीन गिरवी रखने के कागजात और फ्लैट खरीदारों से ली गई रकम की पड़ताल के बाद ही मामले की असलियत साफ होगी।

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