कलिनिनग्राद पर नाटो का हमला हुआ तो परमाणु हथियार से जवाब देंगे, पुतिन की चेतावनी
मॉस्को में वाल्दाई डिस्कशन क्लब को संबोधित करते हुए पुतिन ने नाटो को चेताया कि कलिनिनग्राद पर हमला या नाकेबंदी हुई तो रूस परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाटो देशों को सीधी और सख्त चेतावनी दी है। मॉस्को में वाल्दाई डिस्कशन क्लब को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बाल्टिक सागर के किनारे बसे रूस के कलिनिनग्राद इलाके पर नाटो ने हमला किया या उसकी सैन्य नाकेबंदी करने की कोशिश की, तो रूस जवाब में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।
बताया गया है कि पुतिन ने एक ही घंटे के भीतर दो बार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात दोहराई। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब रूस और यूक्रेन की जंग को पांच साल पूरे होने जा रहे हैं।
अपने भाषण में पुतिन ने साफ कहा कि रूस का किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने या उस पर चढ़ाई करने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन उनके मुताबिक अगर पश्चिमी देशों की तरफ से कोई आक्रामक कदम उठाया गया या रूसी सीमा के लिए खतरा पैदा हुआ, तो रूसी सेना उसका बेहद कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कलिनिनग्राद को लेकर मॉस्को का रुख सख्त होने की वजहें भी बताई गई हैं। नाटो की सेनाएं इस इलाके के पास लगातार सैन्य अभ्यास करती रही हैं, और बाल्टिक सागर से गुजरने वाले रूसी जहाजों को रोकने की धमकियां भी दी गई हैं। सितंबर के आखिर में रूसी विदेश मंत्रालय ने भी चेताया था कि हवाई या समुद्री नाकेबंदी की कोई भी कोशिश युद्ध का ऐलान करने जैसी मानी जाएगी।
कलिनिनग्राद रूस का ऐसा इलाका है जो जमीन के रास्ते रूस की मुख्य भूमि से जुड़ा नहीं है। यह छोटा सा इलाका बाल्टिक सागर के किनारे है और इसकी सीमाएं नाटो के पूर्ण सदस्य पोलैंड और लिथुआनिया से लगती हैं। मुख्य भूमि से अलग होने की वजह से सैन्य नजरिए से इसे सुरक्षित रखना रूस के लिए चुनौती है, फिर भी इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत बड़ी है।
यह पूरा इलाका साल के 365 दिन बर्फ से मुक्त रहता है, इसलिए रूसी नौसेना का बाल्टिक फ्लीट यहां हमेशा तैनात रहता है। रूस के लिए यह एक मजबूत सैन्य किले जैसा है। यहां तैनात आधुनिक मिसाइल सिस्टम के जरिए रूस बहुत कम वक्त में बर्लिन, वारसॉ, कोपनहेगन और स्टॉकहोम जैसे बड़े यूरोपीय शहरों को निशाना बना सकता है। इसी वजह से नाटो देश कलिनिनग्राद में रूसी सैन्य गतिविधियों को शक और डर की नजर से देखते हैं।
उधर जंग के पांचवें साल में दोनों तरफ से आक्रामकता बढ़ी है। सर्दी करीब आ रही है और रूस ने कीव्ह तथा यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं, ताकि यूक्रेन की रसद टूट सके। दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के अंदरूनी हिस्सों में तेल रिफाइनरियों पर घातक ड्रोन हमले किए हैं।
इन ड्रोन हमलों से रूस के कई बड़े शहरों में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है और पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिख रही हैं। जंग से पहले ही मुश्किल में चल रही रूसी अर्थव्यवस्था पर इन हमलों से भारी दबाव पड़ा है। रूस के ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल सिस्टम पर हुए साइबर हमलों की मार भी आम नागरिकों को झेलनी पड़ी है। नाटो का कहना है कि रूस पश्चिमी देशों की एकजुटता कमजोर करने के लिए हाइब्रिड वॉरफेयर यानी संकर युद्धतंत्र का सहारा ले रहा है। पुतिन की ताजा परमाणु धमकी से तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका और गहरी हो गई है।