मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:55 IST

दुनिया में तेल की किल्लत के बीच भारत का कच्चा तेल आयात सितंबर में रिकॉर्ड 5.26 mbpd

अमेरिका में ईंधन के दाम रिकॉर्ड पर और कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर होने के बावजूद भारत ने सितंबर 2026 में आयात का नया उच्चांक छुआ।

दुनिया में तेल की किल्लत के बीच भारत का कच्चा तेल आयात सितंबर में रिकॉर्ड 5.26 mbpd
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पूरी दुनिया इस वक्त ईंधन और ऊर्जा के भारी संकट से जूझ रही है, लेकिन भारत में तेल की आवक ने रिकॉर्ड बना दिया है। सितंबर 2026 में देश का कच्चे तेल का आयात नए उच्चांक पर पहुंचा। सितंबर महीने में यह आयात सालाना उच्चांक पर रहा और 5.26 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbpd) दर्ज हुआ।

बाहर का माहौल कितना मुश्किल है, यह देखने लायक है। अमेरिका में ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप को अपने रिजर्व स्टॉक जारी करने के निर्देश दिए हैं। उधर चीन ने अपने ईंधन के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से कच्चे तेल के दाम फिर प्रति बैरल 100 से 102 डॉलर के ऊपर चले गए हैं।

सवाल यह है कि ऐसे में भारत इतना तेल जुटा कैसे पाया। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में खाड़ी देशों का हिस्सा करीब 39% रहा। इन खाड़ी देशों में सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, ओमान और कतर शामिल हैं।

सबसे ऊपर अब भी रूस है। अमेरिका के 'ग्राहम बिल' जैसे संभावित 100% टैरिफ का दबाव रूस पर मंडरा रहा है, फिर भी वह भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा। सितंबर में भारत ने रूस से रोजाना 18,72,000 बैरल कच्चा तेल मंगाया।

इराक की कहानी अलग है। फरवरी में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद उसके निर्यात में कुछ रुकावट आई थी। सितंबर में इराक ने जोरदार वापसी की और रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। उसने रोजाना 5,25,000 बैरल तेल भेजा।

सऊदी अरब की सप्लाई कुछ वक्त के लिए रुकी थी, क्योंकि उसकी मुख्य ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हूती विद्रोहियों ने हमला किया था। अब लाल सागर के यानबू पोर्ट से लोडिंग फिर शुरू हो गई है और सऊदी अरब ने रोजाना 5,17,000 बैरल भेजे। यूएई से 4,38,000 बैरल आए। कुवैत ने 3,35,000 बैरल भेजे, जो पिछले एक साल में उसका सबसे ज्यादा है। वेनेजुएला, नाइजीरिया, ओमान, अमेरिका और कतर से भी नियमित आवक चलती रही।

हजार बैरल प्रति दिन के हिसाब से सितंबर का आंकड़ा यह रहा: रूस 1872, इराक 525, सऊदी अरब 517, यूएई 438, कुवैत 335, वेनेजुएला 196, नाइजीरिया 137, ओमान 132, अमेरिका 125 और कतर 105।

इस आयात के पीछे भारत और दुनिया के तेल कारोबारियों ने कुछ रणनीतिक कदम उठाए। मध्यपूर्व के अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का बड़ा असर है और वहां तनाव है। डर था कि तेल की आवाजाही रोक दी जाएगी। इसका एक रास्ता निकाला गया। दर्जनों बड़े क्रूड कैरियर जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर बंद करके होर्मुज से निकल जाते हैं। फिर ये जहाज यूएई और ओमान के समुद्री इलाके में पहुंचते हैं, जहां शिप-टू-शिप (STS) तरीके से तेल एक जहाज से दूसरे में डाला जाता है। पहला जहाज नई खेप के लिए खाड़ी देशों के टर्मिनल पर लौट जाता है और दूसरा जहाज ग्राहकों तक, खासकर भारत जैसे देशों तक, तेल पहुंचाता है।

भारत के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ी थी कि ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ की व्यवस्था वाले 'ग्राहम बिल' पर चर्चा तेज कर दी। इसके बावजूद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को पहली प्राथमिकता रखी। एक तरफ रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा और दूसरी तरफ खाड़ी देशों से सप्लाई बहाल करके संतुलन बनाया।

चिंता अभी बाकी है। कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के ऊपर टिके हैं और अगर यह स्तर लंबे वक्त तक रहा तो देश के बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उसका बोझ आम लोगों पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है।

यही लचीलापन भारत ने दूसरे क्षेत्रों में भी दिखाया है। इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी और हाई-टेक उपकरणों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद जरूरी हैं। इनकी सप्लाई चेन गिने-चुने देशों या कंपनियों के हाथ में है, इसलिए सप्लाई टूटने का खतरा रहता है। इससे निपटने के लिए भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन बनाया है। इसके जरिए देश में खनिजों की खोज, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग की क्षमता तेजी से बढ़ाई जा रही है। साथ ही भारत ने अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे प्रमुख देशों के साथ हाथ मिलाया है, ताकि आगे किसी भी संकट का सामना किया जा सके।

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