Rs 10 लाख की पॉलिसी में गवाए Rs 82.30 लाख
बीमा लोकपाल का अधिकारी बनकर ठगी, Rs 1.29 करोड़ मिलने का दिया झांसा, बुजुर्ग व्यापारी हुआ शिकार
नागपुर.
अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की उम्मीद में एक बुजुर्ग व्यापारी साइबर ठगों के जाल में ऐसा फंसा कि बीमा की रकम मिलना तो दूर, उलटे 2 लाख 30 हजार रुपये गंवाने पड़े. ठगों ने खुद को बीमा लोकपाल से जुड़ा अधिकारी बताकर व्यापारी को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के माध्यम से 1 करोड़ 29 लाख 76 हजार रुपये मिलने का झांसा देकर शिकार बनाया.
10 साल की बीमा पॉलिसी, पांच साल तक भरा प्रीमियम
सदर निवासी 64 वर्षीय बुजुर्ग का नट-बोल्ट निर्माण का कारखाना है. 2015 में उन्होंने मुंबई की आईआईएफएल लिमिटेड कंपनी से 10 साल की बीमा पॉलिसी खरीदी थी. इसके लिए वे हर साल 50 हजार रुपये का प्रीमियम भरते थे. पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर उन्हें करीब 10 लाख रुपये मिलने की उम्मीद थी. उन्होंने लगातार पांच वर्षों तक पॉलिसी का प्रीमियम जमा किया. इसी दौरान कंपनी बंद हो गई. अपनी जमा रकम वापस पाने के लिए उन्होंने बीमा लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराई. उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत के जरिए उनकी बीमा पॉलिसी का मामला सुलझ जाएगा और उनकी रकम वापस मिल जाऐगी. इसी मामले को आधार बनाकर साइबर ठगों ने उन्हें निशाना बनाया.
ठग ने बताया बीमा लोकपाल का अधिकारी
अगस्त महीने में एक साइबर ठग ने पीड़ित के मोबाइल पर संपर्क किया. उसने अपना परिचय बीमा लोकपाल से दयानंद शास्त्री के रूप में दिया. बीमा संबंधी शिकायत की जानकारी होने के कारण उसकी बातों पर पीड़ित को भरोसा हो गया. फोन करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि पीड़ित को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के माध्यम से 1 करोड़ 29 लाख 76 हजार रुपये मिलने वाले हैं. इतनी बड़ी रकम मिलने की बात सुनकर पीड़ित को लगा कि उनकी पुरानी बीमा संबंधी परेशानी अब दूर होने वाली है. ठग ने रकम सीधे खाते में जमा करने के बजाय प्रक्रिया शुल्क जमा करने की शर्त रखी. इसी शर्त के जरिए कथित तौर पर ठगी का सिलसिला शुरू हुआ.
करते रहे रकम मिलने का इंतजार
साइबर ठग ने पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करने के लिए कहा. बड़ी रकम मिलने की उम्मीद में बुजुर्ग ने आरोपी द्वारा बताए गए खातों में समय-समय पर कुल 82 लाख 30 हजार रुपये जमा कर दिए. लेकिन इतनी बड़ी रकम जमा करने के बाद भी उनके खाते में वादा की गई बीमा राशि नहीं आई. हर बार पैसे जमा करने के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तब पीड़ित को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है. उन्होंने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पीड़ित से पैसे जमा कराने के लिए किन बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया. इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि पीड़ित पहले से ही अपनी बीमा पॉलिसी की रकम वापस पाने के लिए प्रयास कर रहे थे. इसी बीच उन्हें फोन आया और बीमा से जुड़ी बड़ी रकम मिलने का लालच दिया गया. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि फोन करने वाले व्यक्ति को पीड़ित की शिकायत से संबंधित जानकारी कहां से मिली.
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