आईसीआईसीआई गोल्ड लोन घोटाले में गिरफ्तारी
फरार प्रफुल चौधरी पर शिकंजा, आर्थिक अपराध शाख की कार्रवाई
नागपुर.
असली सोने से बैंक का भरोसा जीता, फिर उसी भरोसे को कथित करोड़ों के घोटाले का हथियार बना लिया. नागपुर में आईसीआईसीआई बैंक की नौ शाखाओं को करीब 24 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले गोल्ड लोन घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है. फरार चल रहे प्रफुल्ल अशोक चौधरी है. उसे 30 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. इस मामले में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इस घोटाले की कहानी में कथित तौर पर नकली सोना, फर्जी प्रमाणन रिपोर्ट, बैंक अधिकारियों की भूमिका और ऑडिट में गंभीर चूक जैसे पहलू सामने आए हैं.
पहले असली सोना, फिर नकली सोने का खेल!
इस मामले का मुख्य सूत्रधार कबाड़ कारोबारी सचिन राऊत है. उसने शुरुआत में बैंक में असली सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया. इससे बैंक में उसकी साख बनी और अधिकारियों का भरोसा हासिल हुआ. बाद में इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए गोल्ड लोन योजना के तहत अधिक कारोबार दिलाने का लालच दिया. बैंक प्रबंधक पंकज केकतपुरे को गोल्ड लोन का लक्ष्य पूरा कराने का प्रलोभन दिया. फिर नकली सोने को असली बताकर कर्ज मंजूर कराने का सिलसिला शुरू हुआ. जिस सोने की शुद्धता के आधार पर बैंक करोड़ों रुपये का कर्ज देता है, उसी जांच प्रक्रिया में सेंध लगाई गई.
हर रिपोर्ट के बदले 5 हजार रुपये देने का आरोप
इस मामले में सोने की शुद्धता प्रमाणित करने की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है. बैंक ने नंदू खरवड़े को चार शाखाओं में गिरवी रखे सोने की जांच के लिए नियुक्त किया था. खरवड़े को दूसरी शाखाओं में भी भेजा जाता था. उसने नकली सोने को असली बताने वाली रिपोर्ट बनाई. प्रत्येक रिपोर्ट के बदले उसे 5 हजार रुपये मिलते थे. इसी तरीके से 38 लोगों को नकली सोने के आधार पर गोल्ड लोन दिलाया गया. पुलिस अब इस प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका और जारी किए गए कर्ज की पूरी जानकारी जुटा रही है.
तीन महीने में होने वाले ऑडिट में भी नहीं खुला राज
घोटाले का एक चौंकाने वाला पहलू नियमित ऑडिट से जुड़ा है. बैंक में हर तीन महीने में गिरवी रखे सोने का ऑडिट किया जाता था. ऑडिटर प्रमोद टेटे, राजेंद्र शिलनकर और धनंजय ढोमणे ने भी नकली सोने को असली बताया. मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंक के विभागीय प्रबंधक धनंजय थिटे को गड़बड़ी का पता चला. उन्होंने विभिन्न शाखाओं में गिरवी रखे सोने का स्वतंत्र संस्था के माध्यम से दोबारा ऑडिट कराया. जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद करीब 24 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ.
9 शाखाओं तक पहुंची घोटाले की आंच
30 मार्च को आईसीआईसीआई बैंक की धंतोली शाखा से इस घोटाले का खुलासा हुआ था. जांच आगे बढ़ने पर बैंक की 9 शाखाओं में फर्जीवाड़े सामने आया. इस मामले में बैंक प्रबंधक पंकज केकतपुरे, दिनेश नागपुरे, आशिष वंजारी, उपप्रबंधक प्रकाश अवस्थी, सोने के प्रमाणनकर्ता प्रमोद टेटे, राजेंद्र शिलनकर और नंदू खरवड़े सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब प्रफुल्ल अशोक चौधरी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस घोटाले की बाकी कड़ियों की जांच कर रही है. मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक संतोष तोकलवाड कर रहे हैं.
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