रेल कर्मचारी बोले: ड्यूटी का नियम 9 घंटे, फिर 14 से 17 घंटे काम क्यों
8वें वेतन आयोग की चर्चा में रेल यूनियनों ने ड्यूटी के घंटे, TA और OT की देरी और ट्रैकमैन की दूरी का मुद्दा उठाया।
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केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तनख्वाह में संभावित बढ़ोतरी को लेकर हर तरफ उत्सुकता है। लेकिन रेल कर्मचारियों के लिए यह लड़ाई सिर्फ बेसिक पे (Basic Pay) और भत्तों तक सीमित नहीं रह गई है। तय वक्त से ज्यादा घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम के पैसों में देरी और काम के भारी दबाव की वजह से तनख्वाह से ज्यादा रोज की नौकरी की मुश्किल हकीकत सामने आ गई है। रेलवे बोर्ड की हाल की बैठक में रेल कर्मचारी संगठनों ने इन सभी गंभीर सवालों पर प्रशासन को घेरा।
ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (AIRF) ने 8वें वेतन आयोग की बैठक के दौरान लोको पायलटों की ड्यूटी के घंटों का मुद्दा बहुत आक्रामक ढंग से उठाया। फेडरेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि नियम के मुताबिक लोको पायलटों से 9 घंटे से ज्यादा काम न लेने का साफ लिखित नियम है। फिर हकीकत में उनसे इससे ज्यादा काम क्यों करवाया जा रहा है, यह सीधा सवाल उन्होंने पूछा।
AIRF का कहना है कि जरूरत का हवाला देकर लोको पायलटों से 14, 16 और पूरे 17 घंटे तक लगातार ट्रेन चलवाना बिल्कुल गलत है। संगठन ने चेतावनी दी कि यह सिर्फ कर्मचारियों की तकलीफ का मामला नहीं है। यह मुसाफिरों की और पूरे ट्रेन ऑपरेशन की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
बैठक में कर्मचारियों का ट्रैवल अलाउंस (Travel Allowance - TA) और ओवरटाइम (Overtime - OT) वक्त पर न मिलने का मुद्दा भी खूब गूंजा। AIRF की जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने बैठक में साफ किया कि करीब Rs 2.90 लाख करोड़ के रेल बजट में से लगभग 95 प्रतिशत फंड खर्च हो चुका है।
इस पर कर्मचारी संगठन ने सवाल किया कि अगर कर्मचारी दिन-रात अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, तो उनके हक के TA और OT का पैसा क्यों रोका जा रहा है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की असल कमाई सिर्फ मूल वेतन पर टिकी नहीं होती। वक्त पर मिलने वाले भत्ते और ओवरटाइम के पैसे उनकी आमदनी का मुख्य सहारा होते हैं।
8वें वेतन आयोग की इस चर्चा में रेलवे के ट्रैकमैन के काम के हालात पर भी गहराई से बात हुई। ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन की मांग है कि ट्रैकमैन से 12 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का काम न लिया जाए। अभी PW Manual में यह ज्यादा से ज्यादा सीमा 20 किलोमीटर तक बताई गई है। AIRF ने रेलवे बोर्ड से इस सीमा को 12 किलोमीटर पर तय करने की जोरदार मांग की है। संगठन ने यह दावा भी किया है कि कर्मचारियों के तीखे संघर्ष के बाद कुछ जगहों पर 12 किलोमीटर की यह शर्त लागू कर दी गई है।
रनिंग स्टाफ की ड्यूटी के घंटों पर भी बैठक में चिंता जताई गई। AIRF के मुताबिक रेलवे के एक आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि इमरजेंसी हालात में कर्मचारियों से लगातार 11 घंटे काम करवाने की छूट है, और कुछ खास हालात में यह सीमा 12 घंटे तक खिंच सकती है। लेकिन संगठन का कड़ा आरोप है कि हकीकत में कई जगह कर्मचारियों से पूरे 17-17 घंटे लगातार ड्यूटी करवाई जा रही है। संगठन के मुताबिक इतना भारी दबाव रेल के सुरक्षित सफर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में रेल कर्मचारियों का ध्यान अब सिर्फ मूल वेतन की बढ़ोतरी पर नहीं है। उनका जोर काम के घंटों, ओवरटाइम के मोबदले, बकाया TA-OT के वक्त पर भुगतान और सुरक्षित माहौल में काम करने के हक पर है। किसी कर्मचारी की असली कमाई और नौकरी का स्वरूप समझने के लिए सिर्फ बेसिक पे की बढ़ोतरी काफी नहीं होगी। ड्यूटी के घंटों का सख्ती से पालन और भत्तों का वक्त पर भुगतान भी उतना ही जरूरी है।
रेलवे बोर्ड की बैठक में कर्मचारी संगठन ने ये सारे जमीनी मुद्दे रखे हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि रेलवे बोर्ड इन मांगों पर क्या ठोस कदम उठाता है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। देखना होगा कि यह चर्चा सिर्फ तनख्वाह बढ़ाने तक सीमित रहती है, या काम के घंटे और हालात बदलने के लिए कोई बड़ा फैसला होता है।