8वें वेतन आयोग के बीच सिविल कर्मचारियों की OROP की मांग तेज, लेवल 1 से 18 तक लागू करने की बात
कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लेवल 1 से 18 तक के केंद्रीय सिविल कर्मचारियों के लिए वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे हैं।
8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट के लिए अलग-अलग पक्षों से बातचीत कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय सिविल कर्मचारियों की 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) की मांग फिर जोर पकड़ रही है। कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन चाहते हैं कि लेवल 1 से 18 तक के सभी केंद्रीय सिविल कर्मचारियों और पेंशनर्स को OROP मिले।
अभी OROP का फायदा सशस्त्र दलों के जवानों, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों और भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) को मिलता है। केंद्र सरकार ने सशस्त्र दलों के लिए OROP योजना 2015 में लागू की थी और इसका आर्थिक लाभ 1 जुलाई 2014 से दिया गया था। अब यही व्यवस्था केंद्रीय सिविल कर्मचारियों के लिए भी लागू करने की मांग उठी है।
AIDEF के महासचिव सी. श्रीकुमार ने ET Wealth Online से बातचीत में पेंशन के फर्क का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक एक ही पद से रिटायर हुए कर्मचारी अलग-अलग समय पर रिटायर होते हैं, इसलिए उनकी पेंशन में बड़ा फर्क आ जाता है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि OROP लागू होने पर समान रैंक और समान सेवा अवधि वाले कर्मचारियों की पेंशन में ज्यादा बराबरी लाई जा सकती है।
ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉईज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने भी पुराने पेंशनर्स की पेंशन में फर्क को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले वेतन आयोगों ने पेंशन में सुधार किए, फिर भी कई साल पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को अब भी पेंशन गैप का सामना करना पड़ रहा है।
सी. श्रीकुमार के कहने के अनुसार, 5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन सुधारने के लिए नोशनल पे फिक्सेशन का प्रस्ताव रखा था। साथ ही सिफारिश की गई थी कि रिटायरमेंट के पद के लिए संशोधित वेतनमान के 50 फीसदी से कम पेंशन न हो। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि 7वें वेतन आयोग ने भी पुराने और नए पेंशनर्स के बीच का फर्क घटाने के लिए पेंशन समानता की अहमियत पर जोर दिया था, और नोशनल पे फिक्सेशन से पुराने पेंशनर्स को मौजूदा वेतन ढांचे के ज्यादा करीब लाया जा सकता है।
AIDEF ने मांग की है कि सिविल कर्मचारियों के लिए OROP तय करते समय सिर्फ रिटायरमेंट के वक्त का वेतन ढांचा न देखा जाए। कर्मचारी की रिटायरमेंट के समय की रैंक, उस रैंक का वेतनमान और सेवा के दौरान मिले इन्क्रीमेंट भी गिने जाएं। संगठन का तर्क है कि अगर कोई पद कर्मचारी के रिटायर होने के बाद अपग्रेड हो जाए, तो पुराने पेंशनर्स को उस पद के संशोधित फायदों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
AIDEF ने नोशनल पेंशनेबल पे का 50 फीसदी पेंशन तय करने की सिफारिश की है। लेकिन यह अभी सिर्फ कर्मचारी संगठन की सिफारिश है। 8वें वेतन आयोग या केंद्र सरकार ने इसे मान लिया हो, ऐसा तय नहीं हुआ है।
अब कर्मचारी और पेंशनर्स की नजर इस पर है कि 8वां वेतन आयोग केंद्रीय सिविल कर्मचारियों की OROP की मांग पर कैसे विचार करता है, और अंतिम सिफारिशों में पेंशन समानता को लेकर क्या बदलाव सुझाए जाते हैं।