8वां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर और HRA पर नया अपडेट, बेंगळुरू दौरा 7-8 अक्टूबर को
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर नई जानकारी सामने आई है, फिटमेंट फैक्टर और HRA में बदलाव पर संगठनों की मांगें तेज हो गई हैं
केंद्र सरकार में नौकरी करने वालों और रिटायर हो चुके लोगों के लिए खुशखबरी वाली अपडेट सामने आई है। पिछले कई दिनों से लोग जिस 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे थे, उस पर अब काम तेजी पकड़ चुका है। 3 नवंबर 2025 से शुरू हुई आयोग की टीम पूरे देश में घूम-घूमकर अलग-अलग क्षेत्रों के संगठनों से बातचीत कर रही है, जिससे काम में रफ्तार आई है।
अभी तक चंडीगढ़, चेन्नई और पुद्दुचेरी में बड़ी बैठकें हो चुकी हैं। अब आयोग की टीम का अगला पड़ाव बेंगळुरू है, जहां 7-8 अक्टूबर 2026 को वहां के लोगों से चर्चा होनी है। इन सारी बातचीत के बाद ही तय होगा कि नई सैलरी में कितनी बढ़ोतरी की जाए।
सैलरी बढ़ाने का आधार क्या रहेगा, इसमें चार चीजें अहम बताई गई हैं। पहला नया मूल वेतन, दूसरा भत्तों यानी DA, HRA और TA में बदलाव, तीसरा इन्क्रिमेंट और बाकी फायदे, और चौथा पदों में सुधार।
कर्मचारी संगठनों की एक ही बड़ी मांग है कि जो महंगाई भत्ता यानी DA मिलता है, उसे मूल वेतन में ही जोड़ दिया जाए। इसका फायदा यह होगा कि PF, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी चीजें मूल वेतन पर ही तय होती हैं, तो अगर DA मूल वेतन में जुड़ गया तो मूल वेतन खुद बढ़ जाएगा। और मूल वेतन बढ़ने से उस पर मिलने वाले बाकी सारे फायदे भी अपने आप बढ़ जाएंगे।
अब बात फिटमेंट फैक्टर की, जो कि एक ऐसा आंकड़ा होता है जिससे पुरानी सैलरी को गुणा करने पर नई सैलरी पता चलती है। 7वें वेतन आयोग में यह फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। 8वें वेतन आयोग में यह 2.28 से लेकर 3.83 तक हो सकता है। अगर यह आंकड़ा 3.68 या 3.83 तक पहुंचा तो सैलरी में जबरदस्त और ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी, यानी न्यूनतम सैलरी में भी काफी उछाल आएगा। यही फिटमेंट फैक्टर सबकी नजरों के केंद्र में है।
HRA में भी बड़े बदलाव की मांग हो रही है। साल 2017 के बाद से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि मुंबई और पुणे जैसे शहरों में घर का किराया काफी बढ़ चुका है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन HRA बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
संगठनों ने HRA के लिए नया फॉर्म्युला भी सुझाया है। इसके तहत शहरों को तीन वर्गों में बांटा गया है। X वर्ग में मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहर आते हैं, जहां के लिए 36 प्रतिशत HRA की मांग है। Y वर्ग यानी मध्यम शहरों के लिए 24 प्रतिशत की मांग रखी गई है। वहीं Z वर्ग यानी छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए 12 प्रतिशत HRA मांगा गया है।
कुल मिलाकर, फिटमेंट फैक्टर और HRA का अंतिम आंकड़ा क्या तय होगा, यह आयोग की बेंगळुरू में होने वाली बातचीत और उसके बाद की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।