केंद्र ने आपदा मदद के नियम बदले, खेती और मौत पर अब ज्यादा रकम मिलेगी
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राष्ट्रीय आपदा प्रतिसाद निधि (NDRF) के तहत मिलने वाली मदद के निकष केंद्र सरकार ने सुधारे हैं। खेती, जानवर, मकान और मृतकों के परिवारों की रकम बढ़ी है, पर राज्य सरकार की मंजूरी बाकी है।
सूखे और कुदरती आफतों की मार झेल रहे महाराष्ट्र के किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिसाद निधि (NDRF) से दी जाने वाली आर्थिक मदद के मानदंड बदल दिए हैं। नए मानदंडों में खेती के नुकसान की भरपाई की रकम बढ़ाई गई है।
सबसे पहले खेती की बात। असिंचित खेती के लिए अब प्रति हेक्टेयर 11,000 रुपये मिलेंगे, जबकि पहले यह रकम 8,500 रुपये थी। सिंचित खेती में पहले 17,000 रुपये मिलते थे, अब 22,000 रुपये मिलेंगे। फलों के बाग का नुकसान हो तो पहले 22,500 रुपये मिलते थे, अब प्रति हेक्टेयर 30,000 रुपये दिए जाएंगे। अतिवृष्टि, बाढ़ या सूखे से फसल बर्बाद होने पर किसानों को पहले से ज्यादा मदद का रास्ता खुल सकता है।
कुदरती आफत में जान जाने पर परिवार को मिलने वाली मदद भी दोगुनी कर दी गई है। पहले मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये मिलते थे, अब 8 लाख रुपये मिलेंगे। जिन परिवारों ने आपदा में अपना कोई सदस्य खोया है, उन्हें इससे कुछ सहारा मिल सकता है।
जानवरों के नुकसान की रकम भी बढ़ी है। बड़े जानवर यानी गाय, भैंस, घोड़ा और ऊंट के लिए पहले 40,000 रुपये मिलते थे, अब 50,000 रुपये मिलेंगे। छोटे जानवर, यानी भेड़ और सुअर के लिए रकम 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,900 रुपये की गई है। बोझ ढोने वाले जानवर, जैसे गधा और खच्चर, के लिए पहले 20,000 रुपये थे और अब 25,400 रुपये होंगे। मुर्गीपालन में 100 मुर्गियों तक प्रति मुर्गी पहले 100 रुपये मिलते थे, अब 130 रुपये मिलेंगे।
मकानों के नुकसान पर भी बदलाव हुआ है। घर पूरी तरह गिर जाए तो पहले 1 लाख 25 हजार रुपये मिलते थे, अब 1 लाख 60 हजार रुपये मिलेंगे। दुर्गम इलाकों के घरों के लिए रकम 1 लाख 30 हजार रुपये से बढ़कर 1 लाख 70 हजार रुपये हो गई है। घर गिरने पर तात्कालिक मदद पहले 5,000 रुपये थी, अब 8,500 रुपये दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने इन सुधारे हुए मानदंडों को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पांच साल के लिए लागू करने का प्रावधान किया है। अमल वित्त वर्ष 2026-27 से अपेक्षित है। इसलिए किसान देख रहे हैं कि 1 अप्रैल 2026 के बाद हुए नुकसान पर नई दर लागू होगी या नहीं।
यहां एक अड़चन भी है। राज्य सरकार को इन मानदंडों को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी देनी होगी और उसके बाद ही अमल होगा। यानी 1 अप्रैल के बाद अतिवृष्टि से नुकसान झेलने वाले किसानों को बढ़ी हुई दर पर मदद मिलेगी या नहीं, यह आखिरी फैसले पर टिका है। असली मदद के लिए नुकसान के पंचनामों, पात्रता के मानदंडों और राज्य सरकार की ओर से होने वाला अमल भी अहम रहेगा।
जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने सूखे और नुकसान से जूझ रहे किसानों की मदद के लिए केंद्र को 31,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। अब केंद्र ने मानदंड बदल दिए हैं, इसलिए महाराष्ट्र सरकार को नया संशोधित प्रस्ताव देना पड़ सकता है। राज्य सरकार क्या फैसला लेती है और बढ़ी हुई मदद पर अमल कब शुरू होता है, यह देखना जरूरी होगा। किसानों को राहत की उम्मीद तो है, पर असल फायदा राज्य की मंजूरी, पात्रता और मदद बांटने के अधिकृत निर्देशों पर ही निर्भर करेगा।
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