रत्नागिरी के सभी तालुके सूखाग्रस्त घोषित हों, भास्कर जाधव ने मुख्यमंत्री को लिखा कड़ा पत्र
विधायक भास्करराव जाधव ने मुख्यमंत्री फडणवीस से गुहागर, चिपलून, खेड, दापोली, मंडणगड और लांजा को सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल करने की मांग की है।
रत्नागिरी जिले में इस साल बारिश बहुत कम और बेतरतीब रही। इससे धान और नाचणी की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसके बावजूद सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में जिले के सिर्फ तीन तालुके रखे गए हैं। इसी बात पर शिवसेना नेता और विधायक भास्करराव जाधव (Bhaskar Jadhav) ने सख्त रुख अपनाया है।
जाधव ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर मांग की है कि गुहागर, चिपलून, खेड, दापोली, मंडणगड और लांजा, इन छह तालुकों को फौरन सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल किया जाए। साथ ही नुकसान झेल रहे किसानों को न्यायसंगत नुकसानभरपाई दी जाए।
यह मुद्दा उन्होंने सोमवार को रत्नागिरी जिला नियोजन समिति की बैठक में भी जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने बैठक में एक प्रस्ताव रखा। उसमें कहा गया कि जिले में असल में कितनी बारिश हुई, खेती की हालत क्या है और धान-नाचणी को कितना नुकसान पहुंचा है, यह सब देखते हुए बाकी नुकसान वाले तालुकों को भी सूखाग्रस्त तालुकों में गिना जाए। अब आज मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र देकर उन्होंने इस मांग को और तेज कर दिया है।
जाधव ने पत्र में लिखा है कि राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुके सूखाग्रस्त सूची में डाले गए हैं। इसके बावजूद रत्नागिरी जिले के छह तालुकों के किसानों को मदद से बाहर रखा गया है। उनके मुताबिक यह फैसला जमीनी हालात से मेल नहीं खाता और इन किसानों के साथ नाइंसाफी है।
उन्होंने कहा है कि सरकार के पास बारिश के आंकड़े मौजूद हैं। गांव-गांव में फसलों का नुकसान साफ दिख रहा है और प्रशासन को भी असली हालत की जानकारी है। ऐसे में सिर्फ कागजी पैमानों के आधार पर नुकसान झेल रहे तालुकों को सूखे की मदद से दूर रखना मंजूर नहीं है।
पत्र में जाधव ने यह भी मांग की है कि इन छह तालुकों में फसल नुकसान के असली पंचनामे किए जाएं। हर पात्र किसान को जल्द और पूरी आर्थिक नुकसानभरपाई मिले। सूखाग्रस्त तालुकों को जो भी सहूलियतें, मदद और सरकारी उपाय मिलते हैं, उनका फायदा इन किसानों को भी दिया जाए।
जिला नियोजन समिति में आवाज उठाने, फिर मुख्यमंत्री फडणवीस को सीधा पत्र लिखने और छह तालुकों के लिए अड़े रहने से जाधव ने रत्नागिरी के किसानों के सवाल पर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब जिले के किसानों की नजर इस पर है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है।