मध्यावधि चुनाव में हार के बाद हरमीत ढिल्लन ने न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रमुख का पद छोड़ा
अमेरिका के न्याय विभाग में नागरिक अधिकार विभाग की प्रमुख, भारतीय मूल की वकील हरमीत ढिल्लन ने अचानक इस्तीफा दे दिया है। मध्यावधि नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन से बाहर जाने वाली वे पहली वरिष्ठ अधिकारी बताई गई हैं।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के बाद वॉशिंगटन की सियासत में हलचल मच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को पहला बड़ा झटका लगा है। न्याय विभाग के नागरिक अधिकार विभाग (Civil Rights Division) की प्रमुख और भारतीय मूल की वकील हरमीत ढिल्लन ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
चुनाव में ट्रंप की पार्टी को जो नुकसान हुआ, उसके बाद प्रशासन से बाहर निकलने वाली ढिल्लन पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं। उनके यूं अचानक जाने से अमेरिकी न्याय विभाग और सियासी गलियारों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है।
हरमीत ढिल्लन को ट्रंप का बेहद भरोसेमंद और करीबी माना जाता रहा है। ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान में वे मुख्य कानूनी सलाहकार थीं। इसके बाद प्रशासन में उन्हें न्याय विभाग के नागरिक अधिकार विभाग की जिम्मेदारी दी गई, यानी Assistant Attorney General for Civil Rights का पद।
करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में ढिल्लन ने इस विभाग के काम करने का पुराना तरीका पूरी तरह बदल दिया। पहले यह विभाग ज्यादातर वोटिंग के अधिकार, पुलिस सुधार और नस्लभेद के खिलाफ कानूनों को लागू करने पर जोर देता था। ढिल्लन ने ट्रंप के रूढ़िवादी एजेंडे के हिसाब से काम किया और 'DEI' (Diversity, Equity, and Inclusion यानी विविधता, समानता और समावेश) नीतियों का सख्त विरोध किया। महिलाओं और लड़कियों के खेलों में सुरक्षा और 'वोक' (Woke) सोच के खिलाफ भी उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया।
इस्तीफे की खबर आने के बाद अमेरिका के ऐटर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके उनके काम की तारीफ की। ब्लैंच ने लिखा, "हरमीत ढिल्लन ने बेहद मजबूती और अटूट निष्ठा के साथ नागरिक अधिकार विभाग की अगुवाई की। बिना किसी भेदभाव के कानून का राज कायम करने में उनका बड़ा योगदान रहा।"
ढिल्लन ने खुद भी 'एक्स' पर पोस्ट लिखकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकारों के लिए सहायक ऐटर्नी जनरल (AAG) के तौर पर अमेरिका की सेवा करना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान था। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने वामपंथी सोच वाली गैरकानूनी नीतियों को खत्म करने का काम किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने जो मौका दिया, उसके लिए आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि वे आगे की नई संभावनाओं के लिए उत्सुक हैं।
उनका कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा। उनके विभाग में पुराने कर्मचारियों के बीच जल्द ही भारी नाराजगी फैल गई। उनके काम के तरीके और नीतियों में बदलाव के चलते विभाग के 75 प्रतिशत से ज्यादा अनुभवी कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी या उन्हें हटा दिया गया। खाली जगहों पर ढिल्लन ने दक्षिणपंथी सोच वाले वकीलों को रखा, लेकिन इन नए लोगों के पास अनुभव की काफी कमी थी।
अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन (Second Amendment) के तहत नागरिकों को हथियार रखने का हक मिलता है। इस एजेंडे को समर्थन देते हुए ढिल्लन ने न्याय विभाग में इस हक की हिफाजत के लिए अलग कक्ष, यानी एक स्वतंत्र विभाग ही बना दिया था। इस पर अमेरिका में काफी विवाद हुआ था।
चुनाव से पहले ढिल्लन ने कई राज्यों में वोटर लिस्ट से 'गैर-अमेरिकी' नागरिकों के नाम हटाने के लिए आक्रामक कानूनी मुहिम छेड़ी थी। लेकिन अमेरिका की अलग-अलग अदालतों ने ये मुकदमे खारिज कर दिए। जजों ने टिप्पणी की थी कि इससे वैध मतदाताओं के अधिकारों पर आंच आएगी और उनकी निजता का गलत इस्तेमाल होगा। इसके अलावा यूनिवर्सिटियों में यहूदी विरोध और श्वेत छात्रों के साथ भेदभाव के मुद्दों पर उनके कानूनी रुख को भी अदालत में बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकी।
इस्तीफे से कुछ हफ्ते पहले ही न्याय विभाग के अंदर की हलचल के चलते ढिल्लन अकेली पड़ती दिखने लगी थीं। डेमोक्रेटिक पार्टी पर चुनाव में हेराफेरी के ट्रंप के आरोपों से जुड़े कई मुकदमों से उन्हें धीरे-धीरे अलग कर दिया गया था। जिन मामलों में ट्रंप की निजी दिलचस्पी थी, उनमें ढिल्लन की भूमिका न के बराबर रह गई थी। आखिरकार मध्यावधि चुनाव की करारी हार के बाद उन्होंने पद छोड़ना ही ठीक समझा। उनके जाने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन में कुछ और बड़े इस्तीफे हो सकते हैं।
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