राम मंदिर दान की कथित गड़बड़ी: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं निपटाईं, आगे सुनवाई अयोध्या की निचली अदालत में
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उत्तर प्रदेश सरकार के SIT की चार्जशीट दाखल होने की जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं निपटा दीं।
अयोध्या के राम मंदिर में आए दान की कथित गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर) को याचिकाएं निपटा दीं। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि विशेष जांच दल यानी SIT ने इस मामले में चार्जशीट दाखल कर दी है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अब आगे की सुनवाई निचली अदालत कानून के हिसाब से करे।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि SIT की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखल कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी कि वे अयोध्या की संबंधित निचली अदालत में ट्रायल के दौरान अपनी बात रख सकते हैं और अभियोजन पक्ष की मदद कर सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि उसने इस मामले के आरोपों की गुणवत्ता या उनकी सच्चाई पर कोई राय नहीं दी है।
इस जांच की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई के निर्देश से हुई थी। तब कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से नया SIT बनाने को कहा था। सरकार ने 27 जुलाई को नया SIT बना दिया। इस दल की कमान लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. को सौंपी गई। दल में एक डीआईजी और एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) भी शामिल थे।
21 सितंबर को SIT ने सुप्रीम कोर्ट में जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। दल ने बताया था कि मंदिर में दान की गिनती के दौरान नकदी को बिना इजाजत निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं CCTV फुटेज के आधार पर सामने आई हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया था कि आठ लोगों के खिलाफ सबूत मिले हैं।
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखल हुई थीं, जिनमें राम मंदिर के दान की कथित गड़बड़ी की अलग से जांच CBI से कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय, RJD सांसद सुधाकर सिंह, हिंदू धर्म परिषद और अखिल भारत हिंदू महासभा शामिल थे।
इन याचिकाओं में कई मांगें रखी गई थीं। मामले की जांच CBI को देना, अलग SIT बनाना और दान के इंतजाम की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ कमेटी बनाना इनमें शामिल था। ट्रस्ट का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और मंदिर को मिलने वाले दान का ब्योरा आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग भी की गई थी।
दान की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इंतजाम में भी कुछ बदलाव हुए। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाकर नियुक्ति की। यह जिम्मेदारी पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को दी गई। इस बीच खबर है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने 27 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट से याचिकाएं निपटने के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई अयोध्या की निचली अदालत में होगी। चार्जशीट के सबूतों और अदालती सुनवाई से ही इस कथित गड़बड़ी की आगे की तस्वीर साफ होगी।
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