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04:52 IST

राजुरा में 14,694 मतदाताओं का हिसाब न मिलने की बात सही नहीं, एसडीओ रवींद्र माने ने दी सफाई

राजुरा के उपविभागीय अधिकारी रवींद्र माने ने कहा है कि मतदाता पंजीकरण की श्रेणीवार जानकारी मौजूद है और 14,694 मतदाता गायब होने की खबर में तथ्य नहीं है।

राजुरा में 14,694 मतदाताओं का हिसाब न मिलने की बात सही नहीं, एसडीओ रवींद्र माने ने दी सफाई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर: राजुरा विधानसभा क्षेत्र के 14 हजार 694 मतदाताओं का हिसाब नहीं मिल रहा, इस खबर में कोई तथ्य नहीं है। मतदाता पंजीकरण अधिकारी और राजुरा के उपविभागीय अधिकारी रवींद्र माने ने यह साफ किया है। उनके मुताबिक क्षेत्र में मतदाता पंजीकरण और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) का काम चुनाव आयोग के निर्देश के हिसाब से पारदर्शी तरीके से और नियमों के अनुसार चल रहा है।

माने ने बताया कि 18 जून 2026 के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राजुरा विधानसभा क्षेत्र में कुल 3 लाख 10 हजार 584 मतदाता थे। इन सभी के लिए ईएफ (Enumeration Form) फॉर्म छापे गए और मतदान केंद्र स्तर के अधिकारियों (BLO) के जरिए बांटे गए। इनमें से 2 लाख 72 हजार 846 मतदाताओं के भरे हुए और दस्तखत किए हुए फॉर्म वापस मिल गए हैं और उनका डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है।

जिन मतदाताओं के फॉर्म नहीं मिले, उनका अलग से सत्यापन संबंधित बीएलओ ने किया। माने के मुताबिक ऐसे कुल 37 हजार 738 मतदाताओं की श्रेणीवार जानकारी तैयार है। इनमें 20 हजार 666 मतदाता हमेशा के लिए दूसरी जगह चले गए हैं, 9129 मतदाता मृत हैं, 3352 मतदाता पते पर नहीं मिले या अनुपस्थित हैं, 3817 मतदाताओं का पंजीकरण पहले ही कहीं और हो चुका है और 774 मतदाता दूसरी वजहों से इसी श्रेणी में आए हैं।

माने ने बताया कि प्रशासन के पास इन सब प्रविष्टियों के जरूरी अभिलेख मौजूद हैं और मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम तय प्रक्रिया से चल रहा है।

फर्जी पंजीकरण के संदिग्ध आवेदनों पर कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि ईआरओ नेट (ERO NET) ऑनलाइन प्रणाली से फर्जी कागजात के आधार पर मतदाता पंजीकरण के 7 हजार 465 संदिग्ध आवेदन आए थे। बीएलओ ने इनकी जांच की। आवेदक दिए गए पते पर नहीं मिला, आवेदक का वजूद ही नहीं मिला, फोटो और जरूरी सबूत नहीं थे, इन वजहों से 6 हजार 853 आवेदन नियमों के मुताबिक नामंजूर किए गए। इस मामले में तहसीलदार ओमप्रकाश गोंड की शिकायत पर 19 अक्टूबर 2024 को राजुरा पुलिस थाने में एफआईआर क्रमांक 0629 के तहत केस दर्ज हुआ है और आगे की जांच जारी है।

राजनीतिक दलों को जानकारी देने के बारे में माने ने बताया कि पंजीकृत दलों को समय-समय पर जानकारी दी गई। इसके लिए 11 मई, 6 जुलाई, 11 जुलाई, 29 जुलाई, 10 अगस्त, 13 अगस्त और 21 सितंबर 2026 को उपविभागीय कार्यालय में बैठकें हुईं। इनमें मतदाता सत्यापन, ईएफ फॉर्म जमा करने और पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी दी गई। फॉर्म न मिलने वाले 37 हजार 738 मतदाताओं की सूची दलों को पेनड्राइव से भी दी गई है।

31 अगस्त 2026 को जारी प्रारूप मतदाता सूची में 2 लाख 72 हजार 846 मतदाता हैं। यह सूची मतदान केंद्रों, तहसील कार्यालयों, पंचायत समिति कार्यालयों और नगर परिषद कार्यालयों में लोगों के देखने के लिए रखी गई है। इस सूची के सत्यापन में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (Logical Discrepancy) और नो मैपिंग (No Mapping) की कुल 9009 प्रविष्टियां ऐसी निकलीं जिनका सत्यापन जरूरी है। इनकी सुनवाई के लिए 25 सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (AERO) लगाए गए हैं। चारों तहसीलों में सुनवाई और सत्यापन चल रहा है और करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मतदाताओं से मिले कागजात बीएलओ ऐप पर अपलोड किए जा रहे हैं।

माने के अनुसार बाकी काम तय समय में पूरा कर 16 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी करने की योजना है।

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