रजनीकांत की पढ़ाई: दसवीं में फेल हुए, आज CBSE की किताब में है उनका पाठ
सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' 15 अक्टूबर को रिलीज हुई। इसी बीच उनके स्कूल के दिनों और संघर्ष की कहानी फिर चर्चा में है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दक्षिण भारत के 'थलैवा' कहे जाने वाले सुपरस्टार रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जेलर 2' आज, 15 अक्टूबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में रजनीकांत 'टाइगर मुथुवेल पांडियन' की भूमिका में हैं और उन्होंने एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी है। रिलीज से पहले ही फिल्म की 60 करोड़ से ज्यादा की एडवांस बुकिंग हो चुकी थी।
फिल्म की इस बड़ी कामयाबी के बीच रजनीकांत की पढ़ाई और संघर्ष की कहानी फिर से चर्चा में आ गई है। आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत स्कूल के दिनों में अंग्रेजी की दिक्कत की वजह से पहली बेंच से सीधे आखिरी बेंच पर पहुंच गए थे। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं।
रजनीकांत का असली नाम शिवाजीराव गायकवाड है। उनका जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु में एक आम परिवार में हुआ था। उन्होंने प्राइमरी की पढ़ाई गवर्नमेंट कन्नड मॉडल प्राइमरी स्कूल, गवीपुरम से पूरी की। प्राइमरी की परीक्षा में उन्हें 98 फीसदी नंबर मिले थे और वे स्कूल के टॉपर रहे।
आगे की पढ़ाई के लिए उनके बड़े भाई ने उन्हें 'आचार्य पाठशाला हायस्कूल' नाम के अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिल करा दिया। माध्यम बदलने और अंग्रेजी की रुकावट की वजह से रजनीकांत की पढ़ाई पर बड़ा असर पड़ा। उन्होंने खुद एक वीडियो में बताया था, "प्राइमरी स्कूल का टॉपर रहा मैं, अंग्रेजी माध्यम में आते ही सीधे पीछे की बेंच पर फेंका गया।"
स्कूल के दिनों में रजनीकांत को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से बहुत डर लगता था। आठवीं और नौवीं में शिक्षकों की मदद से वे जैसे-तैसे पास हो गए, लेकिन दसवीं की परीक्षा में फेल हो गए। इसके बाद एपीएस हायस्कूल के शिक्षकों ने उनके लिए एक्स्ट्रा क्लास लेकर उन्हें दोबारा पढ़ाया और पास होने में मदद की।
इसी स्कूल के बड़े मैदान और स्कूलों के बीच होने वाली नाटक प्रतियोगिताओं ने उनके अंदर के कलाकार को जन्म दिया। एपीएस हायस्कूल में नाटक में उनके काम के लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' का पहला पुरस्कार मिला था।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वेद, इतिहास और भारतीय संस्कृति का अध्ययन किया। घर की हालत की वजह से शुरुआती दिनों में उन्होंने कुली का काम किया और बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट विभाग में बस कंडक्टर के तौर पर भी काम किया।
आगे चलकर उन्होंने मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग की बाकायदा ट्रेनिंग ली और फिल्मों में कदम रखा। आज रजनीकांत की कामयाबी और जिद की यह कहानी देश में CBSE के स्कूली पाठ्यक्रम में 'From Bus Conductor to Superstar' नाम के पाठ के जरिए बच्चों को पढ़ाई जाती है।