पेरिस की नौकरी छोड़ बेंगलुरु के पृथ्वीराज ने शुरू की मशरूम खेती, महीने की कमाई 4 लाख रुपये
पेरिस में पढ़ाई के बाद बड़े पैकेज की नौकरी के ऑफर ठुकराकर बेंगलुरु के पृथ्वीराज भारत लौटे और मशरूम की खेती से अब हर महीने 4 लाख रुपये कमा रहे हैं।
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नौकरी करें या अपना काम, यह सवाल हर किसी के मन में आता है। सही रास्ता चुन लिया जाए तो ज़िंदगी बदल सकती है। बेंगलुरु के पृथ्वीराज की कहानी ऐसी ही है। उन्हें पढ़ाई के लिए विदेश जाने का मौका मिला, वहां उन्होंने ऊंची तालीम ली और नौकरी के बड़े ऑफर भी मिले। लेकिन उन्होंने ये मौके छोड़ दिए और अपने देश लौटकर कुछ अपना खड़ा करने की हिम्मत दिखाई।
पृथ्वीराज मूल रूप से बेंगलुरु के रहने वाले हैं और पढ़ाई के लिए पेरिस में थे। हर किसी का सपना होता है कि पढ़ाई के बाद मोटी तनख्वाह की नौकरी मिले और रहने को आलीशान घर हो, पर पृथ्वीराज के मन में कुछ और ही था। पेरिस में उन्हें नौकरी के बड़े बड़े ऑफर आए, मगर उन्होंने इन्हें स्वीकार नहीं किया। पेरिस की पढ़ाई पूरी करके वे भारत लौट आए।
फ्रांस के मशहूर SKEMA बिज़नेस स्कूल से उन्होंने इंटरनेशनल बिज़नेस में मास्टर्स की डिग्री पूरी की। डिग्री के बाद उन्हें काफ़ी बड़े पैकेज वाली नौकरियों के ऑफर मिले। इतना बड़ा मौका छोड़कर भारत आने का फैसला आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने अपना खुद का काम शुरू करने की ठानी। भारत आकर उन्होंने अपने परिवार के पोल्ट्री शेड को मशरूम की खेती में बदल दिया। यहीं से उनके कारोबार का सफ़र शुरू हुआ।
बेंगलुरु के देवनहल्ली के अपने गांव में पहले उनकी खुद की पोल्ट्री थी। कुछ वजहों और बुरे दौर के चलते यह धंधा 2019 में बंद हो गया था। पृथ्वीराज ने उसे फिर से खड़ा करने का फैसला किया। भारत आने के बाद उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में सोचा। शुरुआत बहुत छोटी रखी। सीधे बड़ी रकम लगाने और बड़ा प्लान बनाने की बजाय उन्होंने 10 बैग से शुरुआत की। खेती के लिए बटन मशरूम की जगह उन्होंने ऑयस्टर मशरूम चुना, क्योंकि इसका उत्पादन काफ़ी आसान होता है और इसकी प्रक्रिया भी बहुत सरल है।
जनवरी 2025 में उन्होंने 180 रुपये के 2 किलो स्पॉन और मुफ़्त मिलने वाले अनाज से सिर्फ़ 10 बैग के साथ शुरुआत की। यह एक प्रयोग था। जो मशरूम उगे, उन्हें उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों में बांट दिया। उनसे राय ली, कमियां देखीं और उसी हिसाब से बदलाव किए। इसके बाद 6 मार्च 2025 से उन्होंने कमर्शियल उत्पादन शुरू किया।
25 बैग से शुरू हुआ यह काम अब 4000 बैग के सेटअप तक पहुंच गया है। इसमें कई चरण होते हैं। हर चरण पर ध्यान देकर और अपनी गलतियों से सीखकर उन्होंने सुधार किया। अब वे हर दिन 45 किलो उत्पादन लेते हैं, यानी पूरे महीने में 1350 किलो मशरूम का उत्पादन होता है। 320 किलो के दर से हर महीने 4 लाख रुपये की कमाई होती है। उनकी उपज की मांग भी उतनी ही बढ़ी है। स्थानीय बाज़ार, सुपरमार्केट और जेप्टो जैसी क्विक डिलिवरी कंपनियों से बड़ी मांग आ रही है।
पृथ्वीराज सिर्फ़ मशरूम की खेती पर नहीं रुके। इस काम से निकलने वाले अवशेषों का उन्होंने अच्छा इस्तेमाल किया और उससे वर्मीकंपोस्टिंग शुरू की। इतना ही नहीं, वे यह हुनर दूसरों को सिखाने भी लगे और ट्रेनिंग देना शुरू किया। इस तरह फ्रांस की मोटी तनख्वाह के जाल में फंसने की बजाय उन्होंने भारत लौटकर अपनी अलग पहचान बनाई।