शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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12:30 IST

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस की नई टीम सक्रिय, वेणुगोपाल से प्रणिती शिंदे तक

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाले आंदोलन में संसद से सड़क तक राहुल गांधी के साथ एक नई टीम आगे दिख रही है।

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस की नई टीम सक्रिय, वेणुगोपाल से प्रणिती शिंदे तक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नई दिल्ली: राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के अंदर एक नई और आक्रामक टीम उभरकर सामने आई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहे आंदोलन में यही टीम सबसे आगे है। संसद से लेकर सड़कों और पुलिस थानों तक यह टीम राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। इस नई टीम में सबसे प्रमुख नाम संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल का है।

वेणुगोपाल पूरे आंदोलन के रणनीतिकार की भूमिका में हैं। लंच मीटिंग से लेकर राजघाट मोर्चे तक की पूरी योजना पर वही नजर रखते हैं और रोजमर्रा के आंदोलन की दिशा भी वही तय करते हैं। उनके बाद राज्यसभा सांसद और कांग्रेस की अल्पसंख्यक मामलों की समिति के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी इस आंदोलन की आवाज बने हुए हैं। वे हर दिन आंदोलन स्थल पर सबसे पहले पहुंचते हैं, कार्यकर्ताओं में जोश भरते हैं और मंच की कमान संभालते हैं।

मीडिया और नैरेटिव के मोर्चे पर कांग्रेस के संचार प्रमुख पवन खेड़ा, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, मणिकम टैगोर, राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा अगुवाई कर रहे हैं। पुलिस की एफआईआर और भाजपा के आरोपों का जवाब देने से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस और टीवी की बहसों तक, ये नेता लगातार पार्टी का पक्ष रख रहे हैं और सरकार को घेर रहे हैं।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी राहुल गांधी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है। कनॉट प्लेस और राजघाट पर हजारों लोगों के जुटने के पीछे उनकी टीम को माना जाता है। युवाओं और महिलाओं के बीच सोलापुर की सांसद प्रणिती शिंदे इस आंदोलन के नए चेहरे के रूप में उभरी हैं। संसद में मतचोरी के मुद्दे पर दिया गया उनका भाषण और महिला कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उनकी मौजूदगी का युवाओं पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे उन्हें काफी लोकप्रियता मिली है।

राहुल गांधी की इस नई टीम का उभरना एक बड़े राजनीतिक बदलाव से भी जुड़ा है। राहुल गांधी की आक्रामक और वैचारिक राजनीति से तालमेल न बिठा पाने वाले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अब पार्टी से दूर हो चुके हैं। इनमें सबसे प्रमुख गुलाम नबी आजाद हैं, जो कभी सोनिया गांधी के करीबी थे, लेकिन जी-23 के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसी तरह जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह और सबसे अहम, अब भाजपा में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया राहुल के 'सड़क की लड़ाई' वाले मॉडल से बेचैन थे।

इस नई कोर टीम में कई ऐसे चेहरे भी हैं जो कैमरे के सामने कम दिखते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे ज्यादा सक्रिय हैं। इनमें मीडिया टीम की भूमिका है। विनीत पुनिया, संजीव सिंह, मनोज त्यागी, सुप्रिया भारद्वाज, प्रमोद रावत, प्रखर सिंह, अरुण त्रिपाठी, नितिन सारस्वत, विवेक सिंह, गिरीश कुमार और रचना कपूर जैसे लोग आंदोलन को धार देने के लिए काम कर रहे हैं।

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