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पुर्णेकर हत्याकांड: आंदोलन से पहले बेटे राम पुर्णेकर पुलिस हिरासत में

प्रदीप पुर्णेकर हत्याकांड में 26 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर हैं। बेटे राम पुर्णेकर को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ठाणे वाले घर के बाहर आंदोलन से पहले हिरासत में लिया गया।

पुर्णेकर हत्याकांड: आंदोलन से पहले बेटे राम पुर्णेकर पुलिस हिरासत में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ठाणे में शिवसेना (उबाठा) नेता प्रदीप उर्फ बाळू पुर्णेकर की हत्या को 26 दिन हो चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इसी बात से नाराज़ होकर उनके बेटे राम पुर्णेकर ने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ठाणे वाले घर के बाहर आंदोलन करने की ठानी। आंदोलन शुरू होने से पहले ही वागले एस्टेट पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिससे इलाके में काफ़ी हलचल मच गई।

राम पुर्णेकर की मुख्य मांगें साफ़ हैं। वे चाहते हैं कि ठाणे की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे को फ़ौरन गिरफ़्तार किया जाए। साथ ही सीसीटीवी में दिखने वाले पांचवें हेलमेट पहने आरोपी को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए। इन्हीं मांगों को लेकर उन्होंने उपमुख्यमंत्री के घर के बाहर आंदोलन की चेतावनी दी थी।

सोमवार, 26 अक्टूबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम पुर्णेकर ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। यह मियाद पूरी होने के बाद मंगलवार को वे अपने समर्थकों के साथ एकनाथ शिंदे के शुभदीप बंगले की तरफ़ निकल पड़े। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बंगले के बाहर सख़्त खुफ़िया इंतज़ाम और भारी बंदोबस्त लगा रखा था। आंदोलन की जगह पहुंचते ही पुलिस ने राम को रोक लिया।

इस दौरान राम पुर्णेकर अपने आंसू नहीं रोक पाए और फूट-फूटकर रो पड़े। पुलिस के कामकाज पर गुस्से में सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "यह कैसा पुलिस प्रशासन है, जो हमें इंसाफ़ नहीं दे सकता? सरकार हमारी सुनती नहीं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी हमें इंसाफ़ नहीं मिल रहा!" कानून-व्यवस्था का सवाल खड़ा न हो, इसलिए वागले एस्टेट पुलिस ने राम को तुरंत हिरासत में ले लिया।

प्रदीप पुर्णेकर की हत्या 29 सितंबर को ठाणे के मानपाड़ा इलाके में बेरहमी से की गई थी। इसके पीछे गहरी साज़िश बताई गई है। पुर्णेकर का कुछ समय पहले ही एक मेडिकल ऑपरेशन हुआ था। घटना के दिन उनके कार्यकर्ता नवरात्रोत्सव का चंदा जमा करने बाहर गए हुए थे और पुर्णेकर अपने दफ़्तर में अकेले थे। तभी हेलमेट पहने और चेहरा ढके बंदूकधारी अचानक दफ़्तर में घुस आए और उन्होंने पुर्णेकर पर नज़दीक से सीधे 7 गोलियां दागीं।

हमलावर सिर्फ़ गोलीबारी करके नहीं रुके। उन्होंने धारदार हथियार से भी जानलेवा वार किए और वहां से फ़रार हो गए। पुर्णेकर को फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुर्णेकर परिवार ने इस मामले में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं। परिवार के मुताबिक हत्या के वक़्त घटनास्थल के सीसीटीवी फ़ुटेज में एक हेलमेट वाला संदिग्ध साफ़ दिख रहा था, पर 26 दिन बाद भी पुलिस इस मुख्य सूत्रधार यानी पांचवें आरोपी को नहीं पकड़ सकी है।

परिवार का यह भी आरोप है कि पुलिस प्रशासन सत्ता में बैठे लोगों के दबाव में काम कर रहा है और मुख्य आरोपियों को बचा रहा है। इसी वजह से पुर्णेकर परिवार ने सीधे उपमुख्यमंत्री के दरवाज़े पर आंदोलन करने का रास्ता चुना।

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