केबल संगठन में पद मिला, पर शिवसेना में नहीं गया: एमआईएम की सहर शेख के पिता युनूस शेख
ठाणे में एमआईएम पार्षद सहर शेख के पिता युनूस शेख को एकनाथ शिंदे से जुड़े केबल संगठन में कलवा-मुंब्रा का अध्यक्ष पद मिलने से सियासी चर्चा तेज है। उनका कहना है कि वे अब भी एमआईएम में ही हैं।
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ठाणे की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है। ठाकरे सेना के विभाग प्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के बाद पूरे राज्य की सियासत पहले ही गरम थी, और अब एक और अजीब मामला सामने आ गया है। एमआईएम की पार्षद सहर शेख, जिन्हें "मुंब्रा हरा कर देंगे" वाले बयान के लिए जाना जाता है, के पिता युनूस शेख को एकनाथ शिंदे से जुड़े एक पद पर नियुक्त किया गया है। इस खबर से ठाणे में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि युनूस शेख को शिंदे से जुड़े केबल संगठन में कलवा-मुंब्रा इलाके का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या उन्होंने शिंदे की शिवसेना में प्रवेश कर लिया है। लेकिन युनूस शेख ने साफ कहा है कि वे अभी एमआईएम में ही हैं और उन्होंने शिवसेना में प्रवेश नहीं किया है।
अपनी सफाई में युनूस शेख ने कहा, "केबल और इंटरनेट का कारोबार हमारा कई सालों से चला आ रहा है। केबल कारोबारियों के लिए एमआईएम का अलग संगठन नहीं है, इसलिए मैं केबल ऑपरेटरों के संगठन से जुड़ गया।" उनके मुताबिक इस संगठन में कलवा-मुंब्रा का अध्यक्ष पद मिलने का मतलब यह नहीं कि उन्होंने शिवसेना जॉइन कर ली। उन्होंने कहा कि पार्टी में आना होता तो वे एकनाथ शिंदे के हाथ से सीधे नियुक्ति पत्र लेते।
युनूस शेख ने एकनाथ शिंदे की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे साहब सबके ही बॉस हैं, हमारे भी बॉस हैं। शिंदे के साथ जाने से फायदा ही होगा।" इसी के साथ उन्होंने शिंदे से अपने पुराने रिश्तों का जिक्र किया। उनके अनुसार उनके परिवार का शिंदे से करीब 40 साल पुराना नाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मुश्किल वक्त में एकनाथ शिंदे और एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी मदद की थी।
युनूस शेख का कहना है कि शिवसेना का नियुक्ति पत्र मिल जाने या पार्टी का चिन्ह वाला गमछा पहन लेने भर से पार्टी में प्रवेश नहीं हो जाता। उनके मुताबिक शिंदे से पुराने संबंधों और केबल के कारोबार की वजह से वे संगठन से जुड़े। आगे अगर शिंदे कोई और जिम्मेदारी देते हैं, तो वे उस पर विचार करेंगे।
युनूस शेख की नियुक्ति से ठाणे में सियासी चर्चा शुरू हो गई है, मगर उन्होंने शिवसेना में प्रवेश करने की बात से इनकार किया है। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि उनकी संगठन वाली भूमिका और एमआईएम से उनके रिश्ते को लेकर आगे क्या होता है।