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08:27 IST

पुणे विद्यापीठ की छात्र चुनाव बैठक पर सवाल, बैलेट पेपर से वोटिंग की माँग

छात्रों और छात्र संगठनों ने चुनाव में राजनीतिक दखल रोकने और ऑनलाइन की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की माँग की है।

पुणे विद्यापीठ की छात्र चुनाव बैठक पर सवाल, बैलेट पेपर से वोटिंग की माँग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे में छात्र चुनाव को लेकर छात्रों और कई छात्र संगठनों ने माँग उठाई है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे, उसमें किसी तरह का राजनीतिक दखल न हो और वोटिंग ऑनलाइन की जगह बैलेट पेपर पर कराई जाए।

छात्र चुनाव के सिलसिले में बुलाई गई बैठक में नियुक्त 12 सदस्यों की कमेटी में से सिर्फ दो सदस्य मौजूद थे। डॉ. राहुल ससाणे ने आपत्ति दर्ज कराई कि बैठक के लिए बहुत कम वक्त दिया गया, इसलिए कई छात्र अपनी बात रख ही नहीं पाए।

शनिवार, 17 अक्टूबर को सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ के भू-शास्त्र विभाग सभागार में विद्यार्थी परिषद चुनावों पर संवाद हुआ। यह बुलावा सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ से जुड़े और स्वायत्त कॉलेजों, मान्यताप्राप्त संस्थाओं और विभागों के छात्रों, छात्र संगठनों, प्राचार्य संगठनों, शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों समेत सभी संबंधित लोगों के लिए था। कमेटी सदस्य और अधिष्ठाता डॉ. प्रभाकर देसाई, गणेशखिंड, पुणे के मॉडर्न महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय खरात और कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि वहाँ मौजूद थे।

ससाणे ने कहा कि छात्र चुनाव में गाँव-देहात के आम छात्रों को भी बराबर मौका मिलना चाहिए। राजनीतिक पार्टियों के संगठनों, शिक्षा संस्थाओं और कॉलेजों के संचालकों का चुनाव प्रक्रिया पर असर नहीं होना चाहिए। संस्था चलाने वाले अपनी पसंद के प्रतिनिधि जिताने के लिए वोटिंग पर असर न डालें, इसके लिए प्रक्रिया का पारदर्शी होना जरूरी है।

बैठक के आयोजन पर ससाणे ने सवाल उठाए। उनके मुताबिक कमेटी की बैठक का परिपत्र एक दिन पहले निकाला गया और बैठक अगले ही दिन रख दी गई। इससे छात्रों को पहुँचने के लिए पूरा वक्त नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि नगर और नाशिक इलाके के कई छात्र नहीं आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर कुछ ही संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। छात्रों की बात सुनी गई, लेकिन बैठक की कोई आधिकारिक वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं हुई।

ससाणे ने कहा कि सभी संबंधित लोगों की बात असरदार ढंग से रखी नहीं जा सकी, इसलिए बैठक अपना मकसद पूरा नहीं कर पाई। उनकी माँग है कि सही पूर्व सूचना और प्रचार के साथ बैठक दोबारा बुलाई जाए, नगर-नाशिक समेत सभी संबंधित छात्रों को इसकी जानकारी दी जाए, कमेटी के सभी सदस्य हाजिर रहें और पूरी बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग हो।

विद्यापीठ विद्यार्थी संघर्ष कृती समिति, पुणे विद्यापीठ के अध्यक्ष अभिषेक शेलकर ने कहा, "17 अक्टूबर 2026 को हुई विद्यार्थी संवाद बैठक की पूर्व सूचना काफी नहीं दी गई, इसलिए सभी छात्र समूह शामिल नहीं हो सके। सवालों और सुझावों का ठीक से इतिवृत्त और रिकॉर्डिंग भी नहीं हुई। छात्र चुनावों में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला, दिव्यांग और LGBTQIA+ वर्गों को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिलने के लिए खड़ा-आड़ा आरक्षण और भौगोलिक प्रतिनिधित्व जरूरी है। वरना वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व सीमित रहेगा और सामाजिक अन्याय बना रहने का डर है।"

एसएफआई की प्रतिनिधि निकिता मेचकर ने कहा, "छात्र चुनावों में गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े छात्रों की पात्रता को लेकर साफ नियम होने चाहिए। साथ ही छात्रों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर जनजागृति जरूरी है।"

छात्रा प्रतिक्षा नवले ने कहा, "राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र चुनाव कराने पर फैसला लेने से पहले कमेटी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की छात्र चुनाव प्रक्रिया का सीधे अध्ययन करे। वहाँ का अनुभव और तरीका समझकर स्थानीय हालात के हिसाब से फैसले लिए जाएँ।"

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