जनगणना नियम 1990 में बदलाव, अब निजी स्कूलों के शिक्षकों से भी लिया जाएगा जनगणना का काम
केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद निजी स्कूलों के शिक्षक और कई दूसरे क्षेत्रों के कर्मचारी भी जनगणना ड्यूटी के दायरे में आ गए हैं।
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देश में चल रही डिजिटल जनगणना के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की जारी की हुई अधिसूचना के मुताबिक अब सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी जनगणना के काम पर लगाया जा सकेगा।
इसके लिए सरकार ने दशकों पुराने 'जनगणना नियम, 1990' में बाकायदा संशोधन किया है। इस फैसले से निजी शिक्षण संस्थाओं में हलचल मच गई है। वजह यह है कि अब तक इस तरह के राष्ट्रीय सर्वे और गिनती के काम की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी कर्मचारियों और जिला परिषद या सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर ही रहती थी।
असल में केंद्र सरकार को यह कानूनी बदलाव इसलिए करना पड़ा कि हाल ही में देश की कई हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के कर्मचारियों को जनगणना के काम में लगाने पर रोक लगा दी थी। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट, महाराष्ट्र में बॉम्बे हाईकोर्ट और हरियाणा में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दी थी।
इन अदालतों की राय थी कि 1990 के पुराने नियमों के तहत बिना सरकारी अनुदान वाली निजी संस्थाओं के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों के लिए मजबूर करने का कोई साफ कानूनी अधिकार नहीं है। अदालतों के इन फैसलों से जमीन पर काम पर असर पड़ रहा था। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सीधे नियमों में ही बदलाव का रास्ता चुना।
संशोधित नियमों के हिसाब से अब राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को साफ कानूनी ताकत दी गई है कि वे किसी भी मान्यता प्राप्त या गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल के कर्मचारियों की सेवाएं ले सकें। नए राजपत्र के मुताबिक इस नियम के दायरे में सरकारी और स्थानीय निकायों के स्कूलों के अलावा सभी अनुदानित और गैर-अनुदानित निजी शिक्षण संस्थाएं आएंगी। जो स्कूल किसी ट्रस्ट, सोसायटी या निजी समितियों के जरिए चल रहे हैं, उनके शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी भी अब इस राष्ट्रीय कर्तव्य के दायरे में पूरी तरह शामिल माने जाएंगे।
सिर्फ शिक्षक ही नहीं, और भी कई लोगों की ड्यूटी लगेगी। सरकार ने प्रगणक और पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए केवल स्कूल के शिक्षकों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि दूसरे कई क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया है। नए संशोधनों के तहत केंद्र और राज्य सरकार के क्लर्क कर्मचारियों, नगर निगम और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों को भी काम पर लगाया जा सकेगा।
इतना ही नहीं, राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के कर्मचारी, वैधानिक संस्थाएं, निजी कंपनियां और कई सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं के अधिकारियों को भी जरूरत पड़ने पर घर-घर जाकर डेटा जमा करने का आदेश दिया जा सकता है।