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17:57 IST

धूम्रपान से रक्तवाहिनियों को नुकसान, पुणे के डॉक्टर ने दी चेतावनी

पुणे के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के रक्तवाहिनी विशेषज्ञ डॉ. संतोष पाटील ने कहा है कि धूम्रपान, मधुमेह और उच्च रक्तदाब से रक्तवाहिनियों की बीमारी का खतरा बढ़ता है।

धूम्रपान से रक्तवाहिनियों को नुकसान, पुणे के डॉक्टर ने दी चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में रक्तवाहिकाओं के विशेषज्ञ डॉ. संतोष पाटील ने चेतावनी दी है कि देश में मधुमेह के मरीज बढ़ रहे हैं, इसलिए आने वाले समय में रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है। उनके मुताबिक मधुमेह, उच्च रक्तचाप, आनुवंशिक कारण और धूम्रपान इन बीमारियों की प्रमुख वजहों में गिने जाते हैं।

डॉ. पाटील ने बताया कि रक्तवाहिकाओं की बीमारियां शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक खून पहुंचाने वाली रक्तवाहिकाओं पर असर डालती हैं। उनका कहना है कि यह आजकल एक बढ़ती हुई सेहत की समस्या बन रही है। इन वजहों में धूम्रपान आम भी है और इससे बचा भी जा सकता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें न करने वालों के मुकाबले रक्तवाहिकाओं की बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। डॉ. पाटील के अनुसार धूम्रपान से रक्तवाहिकाएं खराब हो सकती हैं और शरीर में खून का बहाव प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि तंबाकू के धुएं में कई हानिकारक रसायन होते हैं। ये रसायन रक्तवाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे शरीर में सूजन या जलन पैदा हो सकती है और खून जमने की आशंका बढ़ सकती है।

डॉ. पाटील के मुताबिक तंबाकू के धुएं के लगातार संपर्क में रहने से रक्तवाहिकाओं की दीवारें कमजोर या खराब हो सकती हैं। इससे रक्तवाहिकाएं संकरी हो सकती हैं या उनमें रुकावट आ सकती है। नतीजा यह कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने वाला खून धीरे-धीरे कम हो सकता है।

मधुमेह के बारे में डॉ. पाटील ने कहा कि यह भी रक्तवाहिकाओं की बीमारियों का एक अहम जोखिम कारक है। लंबे समय तक खून में शुगर ज्यादा रहे तो रक्तवाहिकाओं और नसों को नुकसान हो सकता है। इससे शरीर में खून के बहाव से जुड़ी दिक्कतों का खतरा बढ़ता है। भारत में मधुमेह का फैलाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए अक्सर भारत को दुनिया की मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। डॉ. पाटील का कहना है कि मधुमेह और दूसरे जोखिम कारकों को ठीक से काबू में नहीं रखा गया तो आने वाले कुछ सालों में रक्तवाहिकाओं की बीमारियां बढ़ने की संभावना है।

डॉ. पाटील के अनुसार मधुमेह और रक्तवाहिकाओं की बीमारियों का आपस में गहरा रिश्ता है। मधुमेह के मरीज बढ़ रहे हैं, इसलिए रक्तवाहिकाओं की समस्याओं को जल्दी पहचानना और भी जरूरी हो गया है। उन्होंने मधुमेह, रक्तचाप और बाकी जोखिम कारकों को काबू में रखने की जरूरत बताई।

उच्च रक्तचाप को लेकर उन्होंने कहा कि इससे रक्तवाहिकाओं की दीवारों पर लगातार ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे समय के साथ रक्तवाहिकाएं खराब हो सकती हैं। परिवार में ऐसी बीमारियां हों या आनुवंशिक कारण हों, तो भी किसी व्यक्ति में रक्तवाहिकाओं की समस्या का खतरा बढ़ सकता है। अगर किसी में एक से ज्यादा जोखिम कारक हों, जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और धूम्रपान, तो रक्तवाहिकाओं की बीमारी का कुल खतरा और बढ़ सकता है।

डॉ. पाटील ने बताया कि चलते समय पैरों में दर्द या भारीपन महसूस होना, पैर ठंडे पड़ना, पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी आना, त्वचा के रंग में बदलाव होना या शरीर का घाव भरने में ज्यादा वक्त लगना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण रक्तवाहिकाओं की समस्याओं के संकेत हो सकते हैं।

डॉ. संतोष पाटील के मुताबिक खून में शुगर और रक्तचाप को काबू में रखना, वजन ठीक रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और धूम्रपान पूरी तरह बंद करना जरूरी है। उन्होंने रक्तवाहिकाओं की सेहत अच्छी रखने के लिए अपनी दी हुई सलाह का पालन करने और सेहतमंद जीवनशैली अपनाने को कहा है।

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