गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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18:47 IST

छोटे शहरों और जिलों से निकलेंगे भारत के अगले बैडमिंटन चैंपियन: प्रकाश पादुकोण

प्रकाश पादुकोण का कहना है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से भारत के भावी खेल चैंपियन निकल सकते हैं, बशर्ते वहां सुविधाएं, कोच और सामान मिले।

छोटे शहरों और जिलों से निकलेंगे भारत के अगले बैडमिंटन चैंपियन: प्रकाश पादुकोण तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण का कहना है कि भारत के आने वाले खेल चैंपियन ज्यादातर टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकल सकते हैं। लेकिन उन्होंने साथ में यह भी कहा कि इसके लिए छोटे शहरों के नौजवान खिलाड़ियों को अच्छी सुविधाएं, कोच और जरूरी खेल का सामान मिलना चाहिए।

पादुकोण 'पादुकोण स्कूल ऑफ बैडमिंटन' और 'इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट' (IISM) के बीच हुए सहमति करार के मौके पर बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि भारत में बैडमिंटन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और साथ ही जमीनी स्तर की ट्रेनिंग का दर्जा सुधारने की जरूरत भी है।

पादुकोण के मुताबिक टियर-2 और टियर-3 शहरों में टैलेंट पहले भी था। दिक्कत यह थी कि वहां सुविधाएं, ट्रेनिंग और खेल का सामान मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल के लिए ये तीन चीजें सबसे जरूरी हैं: अच्छी सुविधाएं, कोच और जरूरी सामान।

उन्होंने यह भी बताया कि अब छोटे शहरों में खेल की सुविधाएं और संसाधन बढ़ रहे हैं, इसलिए हालात बदल रहे हैं। पादुकोण ने कहा कि आगे चलकर देश को बड़ी तादाद में चैंपियन छोटे शहरों और जिलों से मिलेंगे।

उनकी राय में खिलाड़ियों को शुरू से ही सही ट्रेनिंग मिलना बहुत जरूरी है। सिर्फ एलीट खिलाड़ियों और इंटरनेशनल मेडल पर ध्यान देने के बजाय बैडमिंटन की जमीनी बुनियाद को मजबूत करना होगा। उनका कहना था कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे बैडमिंटन खेलें और उन्हें शुरुआत से ही सही तकनीक सिखाई जाए, इसे पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पादुकोण ने हाल ही में हुए 15 और 17 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों के टूर्नामेंट का उदाहरण दिया। इस टूर्नामेंट के लिए करीब 4 हजार एंट्रीज आई थीं। दस दिन चले इस टूर्नामेंट के पहले पांच दिनों में ही पूरे 22 कोर्ट की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि इससे बैडमिंटन की बढ़ती लोकप्रियता तो दिखती है, पर उसी वक्त इतने बड़े पैमाने पर अच्छी ट्रेनिंग देने की चुनौती भी सामने आती है।

उन्होंने साफ कहा कि ट्रेनिंग के दर्जे पर फौरन ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल काम चल रहा है, फिर भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

पादुकोण ने यह भी कहा कि खिलाड़ी की तरक्की की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ कोच पर नहीं डाली जा सकती। लगातार हार के बाद कुछ नौजवान खिलाड़ी अपनी अकादमी या कोच बदल लेते हैं। उनके मुताबिक अपने खेल की कमियों पर गौर करने के बजाय कोच को दोष देने की आदत ठीक नहीं है।

आखिर में उन्होंने भरोसा जताया कि अगर जमीनी स्तर की ट्रेनिंग का दर्जा सुधरा, सही सुविधाएं मिलीं और खिलाड़ियों को लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा, तो आने वाले वक्त में छोटे शहरों से देश को बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी मिल सकते हैं।

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