पुलिस कमिश्नर के नाम पर भी साइबर फ्रॉड
साइबर अपराधियों पर पुलिस का प्रहार, चार मामलों में 7 आरोपी गिरफ्तार, हांगकांग-दुबई से जूड़े है तार
नागपुर.
साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उन्होंने पुलिस कमिश्नर विश्वास नागरे पाटील और एनआईए अधिकारियों की पहचान को ही ठगी का हथियार बना लिया है. नागपुर में एक व्यक्ति को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस कमिश्नर की तस्वीर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट किया गया. मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से संबंध होने का डर दिखाकर उससे 1 करोड़ 4 लाख रुपये ऐंठ लिए गए. दूसरी तरफ एआई तकनीक से आवाज की हूबहू नकल कर 50 लाख की ठगी की गई. वहीं फर्जी कंपनी का लेटरहेड बनाकर बैंक को भी चूना लगाया गया। इन तीनों मामलों में नागपुर साइबर पुलिस ने मुंबई, इंदौर और कानपुर में कार्रवाई कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस कमिश्नर की फोटो, एनआईए अधिकारी का नाम और 1.04 करोड़ की ठगी!
दीनदयाल नगर निवासी प्रविरकुमार तालुकदार साइबर ठगों को साइबर ठगों ने फोन किया. उन्हें खुद को पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील और एनआईए अधिकारी प्रदीप जायस्वाल बताया. पुलिस आयुक्त की तस्वीर का इस्तेमाल कर व्हाट्सऐप वीडियो कॉल किया और पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने का डर दिखाया. लगातार दबाव बनाकर अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए 1 करोड़ 4 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. इस मामले की जांच में नागपुर साइबर पुलिस ने मुंबई से दिनेश रावरीया (32) और अरविंद गाला (45) को गिरफ्तार किया है.
शेयर ट्रेडिंग का बिछाया जाल, 2.87 करोड़ पार
शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को 2 करोड़ 87 लाख रुपये का चूना लगाया गया. साइबर अपराधियों ने इंस्टाग्राम विज्ञापन के जरिए पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और टेलीग्राम ग्रुप व एफटीएमओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़कर निवेश के लिए प्रेरित किया. पीड़ित ने 33 ट्रांजेक्शन में करोड़ों रुपये निवेश कर दिए. बाद में उन्हें ठगी का एहसास हुआ. मामले की जांच में साइबर पुलिस ने 15 अक्टूबर को बीड जिले से काका साहेब मोहन दरुंडे को गिरफ्तार किया. दरुंडे भारी संख्या में करंट कार्पोरेट बैंक खातों संचालित करके साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था. उसकी सूचना पर मुंबई के बोरीवली से भूपेंद्र महावीर जैन और योगेश पारसमल जैन को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों मूलतः राजस्थान के अजमेर के निवासी हैं और मुंबई में रह रहे थे. उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने छह दिनों तक बोरिवली में जाल बिछाया था. झोमेटो पार्सल की डिलीवरी का झांसा देकर उन्हें पकड़ा गया. दोनों ने आरबीएल कार्पोरेट खातों के माध्यम से महज 24 सेकंड में 39 व्यवहार करके ठगी की राशि 38 खातों में ट्रांसर्फर कर दी थी. दोनों के हांगकांग और दुबई के साइबर अपराधियों से तार जूड़े है.
आवाज जानी-पहचानी, तस्वीर भी भरोसेमंद ... लेकिन पर्दे के पीछे था एआई
हिवरी लेआउट निवासी निखिल नखत के पिता को आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की तस्वीर लगाकर संपर्क किया. एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक से उसी व्यक्ति की आवाज की नकल की. मुसीबत में होने का बहाना बनाकर पैसों की मांग की. आवाज और तस्वीर पर भरोसा कर नखत के पिता ने 50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. इस मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर से 29 वर्षीय नेतराम श्रीराम चडार को गिरफ्तार किया.
फर्जी लेटरहेड से बैंक मैनेजर भी हुआ शिकार
अब ठगों ने सीधे बैंक को निशाना बनाया. फर्जी कंपनी कर्मचारी बनकर बैंक मैनेजर से लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जरीपटका स्थित यूनियन बैंक के मैनेजर यतिंद्र त्रिपाठी को एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को उन्नति मोटर्स का कर्मचारी बताया. इसके बाद कंपनी के नाम से फर्जी लेटरहेड बनाकर व्हाट्सऐप पर भेजा और 9 लाख 50 हजार रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवा लिए. इस मामले में साइबर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कानपुर से 36 वर्षीय दुर्गाकुमार भगत बहादुर को गिरफ्तार किया.
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