शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

प्रदर्शनकारियों के ठिकाने पर हाई कोर्ट सख्त, MSRTC को नोटिस देकर मांगा जवाब

PT24 टीम

नागपुर के शीतकालीन सत्र में आए प्रदर्शनकारियों के रात में रुकने के इंतजाम पर चल रही जनहित याचिका में हाई कोर्ट ने MSRTC को भी पक्ष बनाया है।

नागपुर में राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान अपनी मांगें लेकर आने वाले प्रदर्शनकारियों की हालत का मामला अब और आगे बढ़ गया है। हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन यानी MSRTC को नोटिस जारी किया है और उससे अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब हाई कोर्ट ने सत्र में पहुंचे प्रदर्शनकारियों की दुर्दशा पर खुद संज्ञान लिया। अदालत ने इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज किया और वरिष्ठ अधिवक्ता अक्षय नाईक को अदालत मित्र नियुक्त किया।

गुरुवार को सुनवाई हुई तो अदालत मित्र ने कोर्ट से इजाजत मांगी कि MSRTC को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाया जाए। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने सुनवाई के बाद यह छूट दे दी। इसके साथ ही MSRTC को नोटिस भेजा गया और नए प्रतिवादी को जवाब दायर करने का आदेश भी दिया गया।

इससे पहले अदालत राज्य सरकार को निर्देश दे चुकी थी कि कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वाले प्रदर्शनकारियों को तुरंत आपातकालीन और अस्थायी आश्रय गृह उपलब्ध कराए जाएं।

अपने आदेश में अदालत ने साफ कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अनुच्छेद 21 में जीवन का जो अधिकार दिया गया है, उसमें आश्रय भी शामिल है। इसलिए भीषण ठंड में लोगों की सुरक्षा करना सरकार का कानूनी और नैतिक कर्तव्य है।

सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि 1960 के समझौते के मुताबिक नागपुर में शीतकालीन सत्र होता है और इसका राजनीतिक व ऐतिहासिक महत्व है। इस दौरान विदर्भ के गांवों और दूर-दराज के इलाकों से 100 से 1,000 लोगों के बड़े-बड़े समूह अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखने नागपुर पहुंचते हैं।

सरकार ने इन लोगों के जमा होने और शांति से प्रदर्शन करने के लिए जगहें तो तय कर रखी हैं, लेकिन रात में रुकने के लिए कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई थी। यही कमी अदालत के सामने आई।

हालात की जांच के लिए हाई कोर्ट ने अधिवक्ता अभिषेक भुईभार की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक समिति भी बनाई थी। समिति को कहा गया था कि वह शाम 4 से 7 बजे के बीच प्रदर्शन वाली जगहों का निरीक्षण करे। उसे यह भी देखना था कि संबंधित अधिकारी सड़कों पर रहने वाले लोगों को आश्रय गृहों तक पहुंचाने के लिए सही रास्ता बता रहे हैं या नहीं।

#नागपुर#PT24#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे