जव्हार में PWD के 73 लाख के गबन के आरोप में तत्कालीन कार्यकारी अभियंता समेत तीन गिरफ्तार
जव्हार पुलिस ने सार्वजनिक बांधकाम विभाग में 73 लाख 13 हजार 884 रुपये के सरकारी पैसे की हेराफेरी के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अदालत ने उन्हें दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है।
पालघर जिले के जव्हार में पुलिस ने सार्वजनिक बांधकाम विभाग (PWD) में हुई एक बड़ी गड़बड़ी का भांडाफोड़ करने का दावा किया है। आरोप है कि सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं के विकास कामों के बिलों में फर्जी कागजात के जरिए हेराफेरी करके 73 लाख 13 हजार 884 रुपये का सरकारी फंड सीधे हड़प लिया गया।
इस मामले में उपविभागीय पुलिस अधिकारी समीर मेहर की टीम ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें तत्कालीन कार्यकारी अभियंता राजेंद्र शालिग्राम पवार के साथ कर्मचारी अशोक माळगावी और एकनाथ वांगड शामिल हैं। तीनों को जव्हार की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है। इस कार्रवाई से पालघर जिले के PWD महकमे में काफी हलचल है।
पुलिस के मुताबिक PWD जव्हार की बी-1 रजिस्टर में साल 2014-15 के दौरान करारनामा क्रमांक 331, 332, 334 से 337 और 344 के तहत सात अलग-अलग विकास कामों के वर्क ऑर्डर स्थानीय सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं के नाम पर मंजूर हुए थे। लेकिन 31 मार्च 2019 को इन कामों के बिल चुकाए गए, तब असली ठेकेदारों को अंधेरे में रखकर फाइल के मूल पन्ने बदल दिए गए।
आरोप है कि बिलों पर जगह-जगह व्हाइटनर लगाया गया और फॉर्म नंबर 47 की एंट्रियों में भी छेड़छाड़ हुई। असली लाभार्थियों की जगह "मे. जिजाऊ कन्स्ट्रक्शन, विक्रमगड" नाम की कंपनी का नाम डाल दिया गया। फिर ऑनलाइन कैशबुक और रोकड़ वही में भी हेरफेर करके 73 लाख से ज्यादा की रकम सीधे जिजाऊ कन्स्ट्रक्शन के खाते में भेज दी गई।
पुलिस का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में काट-छांट करके खजाने से पैसे निकालने में तत्कालीन कार्यकारी अभियंता पवार और कर्मचारियों की सीधी मिलीभगत सामने आई, इसीलिए यह कार्रवाई की गई। अब यह भी खंगाला जा रहा है कि इस रैकेट में PWD ठाणे मंडल के और कौन से वरिष्ठ अधिकारी, लेखापाल या बिचौलिए शामिल हैं।
गड़बड़ी सामने आने के बाद विधायक हरिश्चंद्र भोये ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाने की मांग की थी। मामले को गंभीर मानते हुए पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख ने गहरी जांच के आदेश दिए थे। जांच में जब यह सामने आया कि रकम निकाली गई है, तो संबंधित लोगों ने सितंबर के पहले हफ्ते में जल्दबाजी में वह रकम वापस सरकारी खजाने में जमा कर दी।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद जव्हार पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इस केस में जिजाऊ कन्स्ट्रक्शन के प्रोप्रायटर नीलेश सांबरे और बाकी पार्टनरों के खिलाफ भी मामला दर्ज है। अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।