पिता की आखिरी इच्छा से बदली कृति महेश की राह, डांस से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नृत्यदिग्दर्शिका कृति महेश ने नवरात्रोत्सव के मौके पर 'नवदुर्गा' पॉडकास्ट में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी सुनाई।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जिंदगी में हम जो सपना तय करते हैं, वह हमेशा पूरा नहीं होता। कई बार नियति हमें किसी और रास्ते पर ले जाती है और वही रास्ता कामयाबी की नई पहचान बन जाता है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नृत्यदिग्दर्शिका कृति महेश का सफर भी कुछ ऐसा ही है। विदेश में ऊंची पढ़ाई के बाद वे इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन पिता की इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने डांस की दुनिया में कदम रखा और आगे चलकर उसी में अपनी अलग पहचान बनाई।
शारदीय नवरात्रोत्सव के मौके पर 'नवदुर्गा' नाम के खास पॉडकास्ट में कृति महेश ने अपनी जिंदगी के संघर्ष, कामयाबी, पिता की यादों और बॉलीवुड के अनुभवों पर बात की। उन्होंने महिलाओं के लिए एक प्रेरणा देने वाला संदेश भी दिया।
कृति ने बताया कि उन्होंने लंदन जाकर पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी की थी। उनके पास ऊंची डिग्री थी और इरादा इन्वेस्टमेंट क्षेत्र में काम करने का था। पर पिता की तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें भारत लौटना पड़ा। यहां आकर वे पिता के साथ वक्त बिताने लगीं। उसी दौरान 'डान्स इंडिया डान्स' का पहला सीजन चल रहा था, जिसे कृति और उनके पिता साथ बैठकर देखा करते थे। शो देखते हुए पिता ने उन्हें डांस के क्षेत्र में किस्मत आजमाने की सलाह दी।
कृति को लगा कि इतनी पढ़ाई के बाद अचानक डांस में करियर बनाने का फैसला ठीक नहीं होगा। बचपन से उन्हें नाचने का शौक था, लेकिन उन्होंने उसे कभी पेशेवर करियर की तरह नहीं देखा था। परिवार में भी इस क्षेत्र का कोई नहीं था, इसलिए आगे क्या करना है, इसका उन्हें अंदाजा नहीं था।
कृति की जिंदगी की सबसे भावुक याद उनके पिता की आखिरी इच्छा है। पिता के निधन के बाद उसे पूरा करने के लिए उन्होंने 'डान्स इंडिया डान्स' के दूसरे सीजन के लिए ऑडिशन देने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि चुनाव नहीं हुआ तो भी पढ़ाई है और दूसरी नौकरी की जा सकती है। मगर पहले, दूसरे और तीसरे जैसे कई राउंड पार करके उनका चयन दूसरे सीजन में हो गया। इसके बाद उनकी जिंदगी में अनपेक्षित मोड़ आया।
चयन के बाद कृति मशहूर नृत्यदिग्दर्शक टेरेन्स लुईस की टीम 'टेरेन्स की टोली' में शामिल हुईं। यहां उन्हें कई प्रतिभाशाली डांसरों के साथ काम करने का मौका मिला और डांस को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने बताया कि बचपन से शास्त्रीय नृत्य सीखा था, साथ ही पाश्चात्य शैली और कुछ हद तक जिम्नास्टिक्स का भी अभ्यास किया था। रियलिटी शो के अनुभव के बाद उन्होंने तय किया कि अगले एक-दो साल डांस को पूरा वक्त देंगी। शौक के तौर पर नहीं, बल्कि पूरी मेहनत, ध्यान और समर्पण के साथ।
इसी दौरान मशहूर नृत्यदिग्दर्शक रेमो डिसूजा की टीम से उन्हें फोन आया और एक प्रोजेक्ट में काम करने का मौका दिया गया। पहले ऐसा काम न किया होने के बावजूद उन्होंने वह मौका स्वीकार किया। उनका नजरिया था कि नई चीजें सीखनी हैं और मिले हर मौके का इस्तेमाल करना है।
रणबीर कपूर और दीपिका पदुकोण की फिल्म 'ये जवानी है दीवानी' के गाने 'बलम पिचकारी' ने उनके करियर में अहम पड़ाव का काम किया। कृति के मुताबिक दर्शक के तौर पर हम गाना देखकर अच्छा या बुरा कह देते हैं, पर एक गाना बनाने में कितनी मेहनत लगती है, यह सेट पर जाकर समझ आया। वहां बड़ी तादाद में डांसर, असिस्टेंट डायरेक्टर, असिस्टेंट नृत्यदिग्दर्शक, कॉस्ट्यूम डिजाइनर और तकनीकी स्टाफ काम कर रहा था। सिर्फ तीन-चार मिनट के गाने पर इतने लोगों की मेहनत, वक्त और हुनर लगता देख वे प्रभावित हुईं, और इसी अनुभव से फिल्मों में नृत्यदिग्दर्शन के लिए उनकी दिलचस्पी बढ़ी।
इसके बाद उन्हें 'डान्स इंडिया डान्स लिटिल मास्टर्स' में एक टीम की कैप्टन के रूप में काम करने का मौका मिला। पांच-छह साल के बच्चों में डांस की प्रतिभा देखकर वे दंग रह गईं। इस शो के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी और कई बार लगातार 16 घंटे काम करना पड़ता था। फिर भी बच्चों के साथ काम का अनुभव बेहद सुंदर और संतोषजनक रहा, ऐसा कृति ने बताया।
उनकी जिंदगी का एक बेहद अहम मोड़ संजय लीला भंसाली के दफ्तर से आया फोन था। एक कार्यक्रम में काम करते हुए उन्हें भंसाली के ऑफिस से मिलने के लिए बुलाया गया। कृति के मुताबिक यह फोन आने पर उन्हें लगा कि जिंदगी की बड़ी कामयाबी मिल गई। भंसाली ने उनका काम देखा था और उन्हें पसंद आया था। उन्होंने एक नए प्रोजेक्ट में नृत्यदिग्दर्शन की जिम्मेदारी देने पर बात की। लेकिन उस वक्त चल रहे टेलीविजन कार्यक्रमों के शेड्यूल की वजह से वे उस प्रोजेक्ट में काम नहीं कर सकीं।
भंसाली के साथ काम करने का मौका हाथ से जाने पर कृति बहुत निराश हुईं। उन्हें चिंता थी कि इतना बड़ा मौका दोबारा मिलेगा या नहीं। उन्होंने बताया कि इसके बाद तीन-चार महीने वे सचमुच रोती रहीं। फिर भी उन्होंने काम करना बंद नहीं किया और फिल्मों में असिस्टेंट के तौर पर काम करते हुए अपना सफर जारी रखा।
कुछ समय बाद उन्हें 'बाजीराव मस्तानी' के काम से जुड़ने का मौका मिला। फिल्म की रिहर्सल के दौरान उन्हें पता चला कि संजय लीला भंसाली आने वाले हैं। पहली मुलाकात को करीब दो साल हो चुके थे, इसलिए मन में सवाल था कि क्या भंसाली उन्हें पहचानेंगे। मगर भंसाली ने उन्हें देखते ही पहचान लिया। दो साल बाद भी उन्हें अपना नाम याद देखकर कृति हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि भंसाली की याददाश्त और काम की बारीकियों पर ध्यान देने की क्षमता गजब की है।
'बाजीराव मस्तानी' के गाने 'पिंगा' और 'दीवानी मस्तानी' पर काम करने का अनुभव कृति के लिए यादगार रहा। 'दीवानी मस्तानी' के नृत्यदिग्दर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जिसकी खुशी उन्होंने जाहिर की। उन्होंने याद किया कि इस काम का श्रेय देते हुए संजय लीला भंसाली ने उनके योगदान की तारीफ की थी। कृति के मुताबिक भंसाली जैसे बड़े निर्देशक का उनके काम पर ध्यान देना और सबके सामने सराहना करना उनका बड़प्पन है।
'बाजीराव मस्तानी' के बाद कुछ ही समय में कृति को फिर संजय लीला भंसाली के ऑफिस से फोन आया। नई फिल्म और उसके नृत्यदिग्दर्शन के काम पर उनसे बात हुई। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक लोकनृत्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली नृत्य रचनाओं पर काम करने का अनुभव बताया। राजस्थानी घूमर नृत्य की प्रस्तुति के लिए की गई मेहनत का भी जिक्र किया। इस अनुभव से उन्होंने कहा कि नृत्यदिग्दर्शन सिर्फ स्टेप्स बैठाना नहीं है, उस नृत्य शैली के पीछे की संस्कृति, परंपरा और इतिहास को समझना भी उतना ही जरूरी है।
पॉडकास्ट में कृति ने अपनी कंपनी 'काली' के नाम के पीछे की सोच भी बताई। काली देवी का रूप अक्सर रौद्र स्वरूप में देखा जाता है, लेकिन उनके बारे में ज्यादा पढ़ने पर कृति को इस रूप के पीछे की सृजन शक्ति और व्यापक अर्थ समझ आया। इसी सोच से उन्होंने अपनी कंपनी के लिए 'काली' नाम चुना।
नवरात्रोत्सव के मौके पर महिलाओं को संदेश देते हुए कृति महेश ने अपनी खुशी को अहमियत देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिंदगी में लगातार समझौते करते मत रहिए, पहचानिए कि आपको किस चीज में खुशी मिलती है और उसके लिए कोशिश कीजिए। उनका संदेश था, "आप खुद खुश होंगी, तभी दूसरों को भी खुश रख सकती हैं। इसलिए जिस चीज में आपको खुशी मिलती है, वह जरूर कीजिए।"
पिता की इच्छा से डांस में पहला कदम रखने वाली कृति ने मेहनत, जिद और अपनी कला पर भरोसे के दम पर राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर तय किया। उनका यह सफर नई पीढ़ी की युवतियों के लिए प्रेरणा देने वाला है।