रविवार, 11 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
13:39 IST

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन आज: घटस्थापना का मुहूर्त और शैलपुत्री की पूजा

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हुई है। पहले दिन घटस्थापना होती है और देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

शारदीय नवरात्रि का पहला दिन आज: घटस्थापना का मुहूर्त और शैलपुत्री की पूजा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से शुरू हुई है। साल में चार बार नवरात्रि आती है, लेकिन अश्विन महीने में आने वाली शारदीय नवरात्रि को ही बड़ी नवरात्रि माना जाता है। इन नौ दिनों में आदिशक्ति की पूजा, उपवास, जागरण और देवी का जयजयकार होता है।

नवरात्रि का पहला दिन घटस्थापना का दिन होता है। इसी दिन से नवरात्रि के उत्सव की असली शुरुआत मानी जाती है। पहले दिन दुर्गा माता के पहले रूप शैलपुत्री देवी की आराधना की जाती है।

शैलपुत्री पर्वतों के राजा हिमालय की बेटी हैं, इसीलिए उनका नाम शैलपुत्री है। तस्वीरों में उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल दिखता है, और वे नंदी पर बैठी होती हैं। कहा जाता है कि पहले दिन मन से पूजा करने पर जीवन की अड़चनें दूर होती हैं और घर में स्थिरता आती है।

नवरात्रि के नौ दिनों में रोज अलग-अलग देवी की पूजा होती है। पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा और पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। इसके बाद छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। हर देवी का अर्थ अलग है और उनकी शक्ति भी अलग है।

इस साल पहले दिन के लिए नारंगी रंग शुभ माना गया है। नारंगी रंग जोश और सकारात्मक सोच का रंग कहा जाता है, इसलिए कई महिलाएं पहले दिन नारंगी साड़ी या ड्रेस पहनकर पूजा करती हैं। यह रंग हर साल पंचांग के हिसाब से बदलता रहता है।

शैलपुत्री को गाय के घी से बने पदार्थ बहुत प्रिय बताए गए हैं। इसलिए इस दिन घी का नैवेद्य, गाय का दूध, खीर, पेड़ा और सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं। पूजा के समय सबसे जरूरी यह है कि जगह साफ हो और मन में भक्ति हो।

11 अक्टूबर को सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनने के बाद घर के मंदिर में घट बैठाया जाता है। घट पर कलश रखकर उस पर देवी की मूर्ति रखी जाती है। देवी के सामने फूल, अक्षत, धूप और दीप लगाकर पूजा की जाती है।

पंचांग के अनुसार 11 तारीख को सूर्योदय 6 बजकर 27 मिनट पर होगा। घटस्थापना के लिए सुबह 6:27 से 10:27 तक का समय सबसे अच्छा है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 से 12:48 तक है।

पूजा के समय यह मंत्र बोला जाता है: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। कई लोगों ने बताया है कि यह मंत्र बोलकर आरती करने से मन को शांति मिलती है।

पहली माला यानी पहला दिन नवरात्रि की नींव माना जाता है। इस दिन पूजा करके अगले नौ दिनों का संकल्प लिया जाता है। कहा जाता है कि शैलपुत्री की पूजा से मन स्थिर होता है और कॉन्फिडेंस बढ़ता है। कई लोग इसी दिन से नौ दिन का उपवास रखते हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे