नवरात्र में दुर्गा माता को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी, जानिए मान्यता
पवित्र मानी जाने वाली तुलसी देवी की पूजा में वर्जित क्यों है, इसके पीछे कथा और शास्त्र के नियम बताए जाते हैं।
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नवरात्र शुरू होते ही घर-घर में घट बैठाया जाता है और देवी की पूजा होती है। लोग देवी को हार, फूल और नैवेद्य जैसी हर पसंदीदा चीज़ चढ़ाते हैं। लेकिन एक चीज़ कोई नहीं चढ़ाता, और वह है तुलसी। हिंदू धर्म में तुलसी को सबसे पवित्र माना जाता है। घर-घर में तुलसी होती है और रोज़ उसकी पूजा होती है। फिर यही पवित्र तुलसी दुर्गा माता को क्यों नहीं चढ़ाई जाती, यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। इसके पीछे धार्मिक कथा भी है और शास्त्र का नियम भी।
पहली कथा शंखचूड के वध की है। पुराणों में बताया गया है कि तुलसी का विवाह शंखचूड नाम के असुर से हुआ था। शंखचूड कोई आम राक्षस नहीं था, वह बहुत ताकतवर था। उसे हराना देवताओं के लिए भी मुश्किल हो गया था। आखिर में देवी दुर्गा ने ही उसका वध किया। अपने पति को मारने वाली देवी होने के कारण तुलसी के मन में दुर्गा के प्रति नाराज़गी रह गई। माना जाता है कि तुलसी को दुर्गा पर गुस्सा आता है, इसीलिए तुलसी कभी दुर्गा देवी के पास नहीं जाती। यह भावना आज भी निभाई जाती है।
दूसरी कथा विष्णु और शिव की अलग-अलग परंपराओं से जुड़ी है। तुलसी को विष्णु की पत्नी माना जाता है। उसे विष्णुप्रिया या वैष्णवी भी कहते हैं। इसी वजह से जहां विष्णु की पूजा होती है, जैसे विठ्ठल, कृष्ण और राम की पूजा में, वहां तुलसी ज़रूर लगती है।
दुर्गा देवी शक्ति हैं और शैव पंथ से जुड़ी हैं। शैव और वैष्णव दो अलग परंपराएं हैं। इसलिए वैष्णव मानी जाने वाली तुलसी शक्ति की पूजा में इस्तेमाल नहीं होती। जैसे महादेव को तुलसी नहीं चढ़ती, वैसे ही दुर्गा माता को भी नहीं चढ़ाई जाती। गणपति, शनिदेव और भैरव को भी तुलसी नहीं चढ़ाते।
शाप की भी एक कहानी है। कुछ ग्रंथों में लिखा है कि एक बार तुलसी ने दुर्गा देवी को शाप दिया था। उसने कहा था कि तुम्हारी पूजा में मेरा कभी इस्तेमाल नहीं होगा। इसी वजह से परंपरा में दुर्गा पूजा में तुलसी वर्जित हो गई।
शास्त्र के मुताबिक शक्ति की पूजा के कुछ नियम हैं। जिस चीज़ का संबंध असुर से रहा हो, वह देवी को अर्पित नहीं की जाती। तुलसी का संबंध शंखचूड असुर से आया, इसलिए वह अपवित्र तो नहीं है, पर देवी की पूजा के लिए उचित नहीं मानी गई। इसीलिए नवरात्र में देवी को गेंदा, गुलाब, कमल और गुड़हल के फूल चढ़ाए जाते हैं, पर तुलसी का पत्ता गलती से भी नहीं रखा जाता।
इस नवरात्र में पूजा करते समय यह बात ध्यान में रखें। तुलसी विष्णु के लिए रखें और देवी के लिए दूसरे पवित्र फूलों का इस्तेमाल करें।